आम की फसल बचाने
Uttar Pradesh में आंधी, बारिश और कीटों के हमले के बाद आम की फसल को बचाने के लिए बागवान अब बैगिंग तकनीक का सहारा ले रहे हैं। प्रदेश के कई जिलों में किसान आम को विशेष कागज और बैग से ढककर सुरक्षित कर रहे हैं ताकि फसल खराब होने से बच सके और बाजार में बेहतर कीमत मिल सके।
बागवानों का कहना है कि लगातार बदलते मौसम और हल्की बारिश आम की फसल के लिए “जहर” साबित हो रही है। खासकर चौसा, लंगड़ा और अन्य प्रीमियम किस्मों पर इसका असर ज्यादा देखने को मिल रहा है।
बारिश और कीटों से बढ़ा खतरा,
काकोरी के सहिलामऊ क्षेत्र के बागवान शंकर सिंह बताते हैं कि हल्की बूंदाबांदी और बादल आम की फसल को तेजी से नुकसान पहुंचाते हैं। उन्होंने कहा कि इस बार मौसम की मार के कारण फसल को बचाने के लिए बैगिंग करना जरूरी हो गया है।
बागों में मजदूर आम के फलों पर विशेष बैग बांधते नजर आ रहे हैं। किसानों को निर्देश दिए जा रहे हैं कि केवल मजबूत और स्वस्थ फलों पर ही बैग लगाया जाए ताकि बेहतर गुणवत्ता हासिल की जा सके।
क्या है बैगिंग तकनीक,
बैगिंग तकनीक में आम के फलों को विशेष प्रकार के कागज या पॉलिथीन बैग से ढक दिया जाता है। यह बैग हवा और पानी प्रतिरोधी होते हैं, जिससे फल सुरक्षित रहते हैं और उनमें कीट या फंगस का असर कम होता है।
विशेषज्ञों के अनुसार फल जब 40 से 50 दिन का होता है तभी उस पर बैग बांधा जाता है। यह तकनीक खासकर Mango की प्रीमियम किस्मों जैसे चौसा, लंगड़ा और अवध समृद्धि के लिए ज्यादा उपयोगी मानी जा रही है।
बैगिंग से बढ़ रही आम की गुणवत्ता,
बस्ती के बागवान संदीप मौर्य बताते हैं कि पिछले साल उन्होंने तीन हजार आमों पर बैगिंग कराई थी। सामान्य आम जहां 20 से 25 रुपये किलो बिके वहीं बैगिंग वाले आम 35 से 45 रुपये किलो तक बिके।
उन्होंने बताया कि बैगिंग वाले आम ज्यादा चमकदार, बड़े और टिकाऊ होते हैं।
यही कारण है कि बाजार में इनकी मांग और कीमत दोनों ज्यादा मिलती हैं।
निर्यात लायक बनाए जा रहे आम,
बाराबंकी, उन्नाव, बुलंदशहर और अमरोहा समेत कई जिलों में किसान
बैगिंग तकनीक का इस्तेमाल कर आम को निर्यात योग्य बनाने की कोशिश कर रहे हैं।
विशेषज्ञों का कहना है कि बैगिंग से फलों पर फ्रूट फ्लाई,
स्पॉरेड बग और फंगस का खतरा काफी कम हो जाता है।
इससे आम की गुणवत्ता बेहतर होती है और विदेशों में भी इसकी मांग बढ़ सकती है।
प्रति किलो 15 रुपये तक आता है खर्च,
किसानों के अनुसार सामान्य बैग की कीमत लगभग 1.75 रुपये और अच्छी गुणवत्ता वाले बैग की कीमत
करीब 1.90 रुपये होती है। बैग बांधने और खोलने में भी अतिरिक्त मजदूरी लगती है।
एक किलो आम पर लगभग 15 रुपये का अतिरिक्त खर्च आता है, लेकिन बाजार में इसकी कीमत सामान्य आम से
15 रुपये प्रति किलो तक ज्यादा मिल जाती है। इससे किसानों को अच्छा मुनाफा हो रहा है।
सरकार भी दे रही अनुदान,
उद्यान विभाग किसानों को बैगिंग तकनीक अपनाने के लिए प्रोत्साहित कर रहा है।
विभाग की ओर से प्रति हेक्टेयर 25 हजार रुपये तक का अनुदान दिया जा रहा है।
संयुक्त निदेशक उद्यान विभाग के अनुसार “पहले आओ, पहले पाओ” योजना के
तहत किसानों को अधिकतम 50 हजार रुपये तक की सहायता दी जा रही है।
इसके लिए किसानों को विभागीय पोर्टल पर पंजीकरण करना होता है।
किसानों के लिए उम्मीद बनी बैगिंग तकनीक,
लगातार बदलते मौसम और कीटों के खतरे के बीच बैगिंग तकनीक
अब किसानों के लिए बड़ी उम्मीद बनती जा रही है।
इससे न केवल आम की गुणवत्ता सुधर रही है बल्कि किसानों को बेहतर बाजार मूल्य भी मिल रहा है।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि इस तकनीक का बड़े स्तर पर इस्तेमाल किया जाए तो
उत्तर प्रदेश का आम अंतरराष्ट्रीय बाजार में और मजबूत पहचान बना सकता है।
