Ballia News: स्वगणना प्रक्रिया में तकनीकी संकट, लोकेशन से लेकर ‘नेक्स्ट’ बटन तक परेशान हो रहे लोग,

ऑनलाइन स्वगणना में लोगों के छूट रहे पसीने,

Ballia समेत उत्तर प्रदेश के कई जिलों में जनगणना की ऑनलाइन स्वगणना प्रक्रिया तकनीकी खामियों से जूझती नजर आ रही है। लोग घंटों कोशिश करने के बाद भी अपनी स्वगणना पूरी नहीं कर पा रहे हैं। कहीं जीपीएस मकानों की सही लोकेशन नहीं खोज पा रहा है तो कहीं सर्वर स्लो होने की वजह से प्रक्रिया बीच में ही अटक जा रही है।

स्थिति यह है कि लोग ऑनलाइन प्रक्रिया छोड़कर अब प्रगणकों के घर आने का इंतजार करने लगे हैं। तकनीकी दिक्कतों के कारण आम नागरिकों में नाराजगी और परेशानी दोनों बढ़ती जा रही हैं।

जीपीएस नहीं पकड़ पा रहा सही लोकेशन,

सबसे ज्यादा दिक्कत मकानों की लोकेशन दर्ज करने में सामने आ रही है। पोर्टल पर जीपीएस ऑन करने के बावजूद सिस्टम सही लोकेशन ट्रेस नहीं कर पा रहा। कई लोगों के मकान दूसरी गलियों या दूसरे मोहल्लों में दिखाई दे रहे हैं।

नई कॉलोनियों और ग्रामीण इलाकों में समस्या और ज्यादा गंभीर बनी हुई है। लोग मोबाइल हाथ में लेकर घर के बाहर और गलियों में घूमते नजर आ रहे हैं, लेकिन इसके बावजूद सिस्टम सही लोकेशन नहीं पकड़ पा रहा।

खड़सरा निवासी मधुरेंद्र सिंह ने बताया कि उन्होंने 15 से 20 बार प्रयास किया, लेकिन स्वगणना प्रक्रिया पूरी नहीं हो सकी। बड़ी मुश्किल से लोकेशन कंफर्म होने के बाद ‘सेव’ और ‘नेक्स्ट’ बटन ने काम करना बंद कर दिया।

‘सेव’ और ‘नेक्स्ट’ बटन भी बन रहे परेशानी की वजह,

कई लोगों ने शिकायत की है कि पूरा विवरण भरने के बाद भी डेटा सेव नहीं हो रहा। कभी ‘सबमिट’ बटन बंद हो जा रहा है तो कभी ‘नेक्स्ट’ विकल्प काम नहीं कर रहा।

जगदरा निवासी चंद्रप्रकाश ने बताया कि कई प्रयासों के बावजूद पोर्टल उनके मकान की लोकेशन नहीं खोज पाया। वहीं पंदह निवासी अनूप राय का कहना है कि ओटीपी आने में इतना समय लग जाता है कि तब तक पेज एक्सपायर हो जाता है।

करमौता निवासी अतुल राय ने बताया कि परिवार के

सभी सदस्यों का विवरण भरने के बाद भी डेटा सेव नहीं हुआ।

हर बार प्रक्रिया दोबारा शुरू करनी पड़ रही है, जिससे लोगों की परेशानी और बढ़ गई है।

मोबाइल और हिंदी फॉन्ट में भी आ रही दिक्कत,

लोगों ने यह भी शिकायत की है कि कई मोबाइल फोन में पोर्टल सही तरीके से खुल ही नहीं रहा।

वहीं हिंदी फॉन्ट में गड़बड़ी के कारण जानकारी पढ़ने और भरने में दिक्कत हो रही है।

इंटरनेट की थोड़ी धीमी स्पीड होते ही पूरी प्रक्रिया रुक जा रही है।

कई बार पेज लोड होने में काफी समय लग रहा है।

इससे बुजुर्गों और कम तकनीकी जानकारी रखने वाले लोगों को ज्यादा परेशानी हो रही है।

विशेषज्ञ बोले- जल्द सुधार जरूरी,

जनसेवा केंद्र संचालक संतोष सिंह का कहना है कि पहली बार बड़े स्तर पर

डिजिटल लोकेशन टैगिंग और ऑनलाइन सत्यापन की व्यवस्था लागू की गई है।

शुरुआती दिनों में सर्वर पर बढ़े दबाव और तकनीकी समन्वय की कमी के कारण यह समस्याएं सामने आ रही हैं।

विशेषज्ञों का मानना है कि यदि तकनीकी खामियां जल्द दूर नहीं की गईं तो

बड़ी संख्या में लोग ऑनलाइन स्वगणना से

दूरी बना सकते हैं। इससे डिजिटल जनगणना अभियान की रफ्तार भी प्रभावित हो सकती है।

ग्रामीण क्षेत्रों में ज्यादा परेशानी,

ग्रामीण इलाकों में इंटरनेट नेटवर्क कमजोर होने के कारण लोगों को और

ज्यादा मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है।

कई गांवों में लोग घंटों कोशिश करने के बाद भी स्वगणना पूरी नहीं कर पा रहे हैं।

लोगों का कहना है कि सरकार को पोर्टल की तकनीकी व्यवस्था मजबूत करनी चाहिए ताकि

आम नागरिक आसानी से अपनी स्वगणना पूरी कर सकें।