गोरखपुर के शाहपुर इलाके में
निर्माणाधीन नाले में गिरने से मजदूर की मौत
Gorakhpur के शाहपुर इलाके में निर्माणाधीन खुले नाले ने एक मजदूर की जान ले ली। पादरी बाजार चौराहे के पास मंगलवार रात करीब आठ बजे 68 वर्षीय मजदूर Hansraj Yadav नाले में गिर गए, जहां लोहे का सरिया उनके पेट के आर-पार हो गया। दर्दनाक हादसे के बाद इलाके में हड़कंप मच गया।
सब्जी लेने निकले थे हंसराज
जानकारी के अनुसार हंसराज यादव देवरिया जिले के रामपुर कारखाना थाना क्षेत्र के गौरा गांव के निवासी थे। वह पिछले चार वर्षों से शाहपुर इलाके के लक्ष्मीपुर चौराहे स्थित चौरसिया डेयरी में काम करते थे और वहीं रहते भी थे।
मंगलवार शाम करीब 5:30 बजे वह सब्जी लेने के लिए निकले थे। पादरी बाजार चौराहे के पास ब्यासनगर कॉलोनी जाने वाले रास्ते पर निर्माणाधीन नाले को पार करते समय अचानक संतुलन बिगड़ गया और वह सीधे नाले में जा गिरे।
सरिया शरीर में धंसने से हुई मौत
स्थानीय लोगों के मुताबिक नाले में लोहे का सरिया खुला हुआ था, जो हंसराज के शरीर में धंस गया। हादसा इतना भयावह था कि मौके पर अफरा-तफरी मच गई। आसपास के लोगों ने किसी तरह उन्हें बाहर निकाला और पुलिस की मदद से जिला अस्पताल पहुंचाया, जहां डॉक्टरों ने मृत घोषित कर दिया।
सुरक्षा इंतजाम नहीं होने पर उठे सवाल
घटना के बाद स्थानीय लोगों में भारी आक्रोश है। लोगों का आरोप है कि नाला निर्माण के दौरान सड़क किनारे पर्याप्त बैरिकेडिंग नहीं की गई थी। केवल एक सफेद सांकेतिक पट्टी लगाकर काम चलाया जा रहा था।
प्रत्यक्षदर्शियों का कहना है कि यदि मजबूत बैरिकेड लगाए गए होते तो यह हादसा नहीं होता।
रोजाना हजारों लोग इस रास्ते से गुजरते हैं लेकिन सुरक्षा व्यवस्था बेहद लापरवाह तरीके से की गई थी।
जेई सस्पेंड, जांच शुरू
घटना के बाद प्रशासन हरकत में आया और संबंधित जूनियर इंजीनियर को
निलंबित कर दिया गया। मामले में जांच शुरू कर दी गई है।
इस संबंध में Ravi Singh ने बताया कि मजदूर के नाले में गिरने की
सूचना मिलने के बाद टीम मौके पर पहुंची थी। घायल को अस्पताल भेजा गया लेकिन
डॉक्टरों ने मृत घोषित कर दिया। शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया गया है।
लोगों ने ठेकेदार पर लगाया लापरवाही का आरोप
स्थानीय निवासी अर्जुन निषाद और दिनेश गुप्ता ने बताया कि निर्माण स्थल पर केवल चेतावनी पट्टी लगाई गई थी,
जबकि वहां बड़े बैरिकेड होने चाहिए थे। लोग रोज जान जोखिम में डालकर रास्ता पार करते हैं।
मौके पर मौजूद लोगों ने कहा कि ठेकेदार और निर्माण एजेंसी की लापरवाही के कारण एक परिवार उजड़ गया।
परिवार पर टूटा दुखों का पहाड़
हंसराज यादव अपने पीछे पत्नी और तीन बच्चों को छोड़ गए हैं।
का पालन-पोषण उनकी मेहनत से चलता था।
स्थानीय लोगों के अनुसार वह बेहद मेहनती इंसान थे और रोज सुबह तीन बजे से काम में जुट जाते थे।
पहले भी हो चुके हैं हादसे
यह पहला मामला नहीं है। इससे पहले चिलुआताल क्षेत्र के मानबेला में खुले नाले में गिरने से
12 वर्षीय बालक कन्हैया की भी मौत हो चुकी है। लगातार हो रहे
हादसों के बावजूद निर्माण स्थलों पर सुरक्षा मानकों की अनदेखी जारी है।
