गोरखपुर के गोलघर में
Gorakhpur के प्रमुख व्यापारिक क्षेत्र गोलघर में व्यापारियों ने बड़ा निर्णय लिया है। नगर निगम और प्रशासन की कार्रवाई से नाराज व्यापारियों ने 28 अप्रैल को पूरे बाजार को बंद रखने का ऐलान किया है। इस फैसले के बाद शहर के कारोबार और ट्रैफिक व्यवस्था पर भी असर पड़ने की संभावना है।
क्यों नाराज हैं व्यापारी
व्यापारियों का कहना है कि लगातार चल रहे अतिक्रमण विरोधी अभियान, पार्किंग की उचित व्यवस्था न होना और ई-रिक्शा संचालन पर प्रतिबंध ने उनके व्यापार को गंभीर रूप से प्रभावित किया है। ग्राहकों की आवाजाही कम हो गई है, जिससे बिक्री में गिरावट आई है।
व्हाइट लाइन कार्रवाई से बढ़ी परेशानी
व्यापार मंडल के अनुसार नगर निगम का प्रवर्तन दल व्हाइट लाइन के अंदर खड़ी गाड़ियों को उठाने या लॉक करने की कार्रवाई कर रहा है। इससे बाजार में आने वाले ग्राहकों को वाहन पार्क करने में दिक्कत हो रही है और वे बाजार आने से बच रहे हैं।
ई-रिक्शा प्रतिबंध बना बड़ा मुद्दा
व्यापारियों ने बताया कि ई-रिक्शा आम लोगों के लिए बाजार तक पहुंचने का सबसे आसान साधन है। लेकिन गोलघर क्षेत्र में इस पर लंबे समय से प्रतिबंध है, जिससे खासकर महिलाओं, बुजुर्गों और बच्चों को काफी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
व्यापार पर पड़ा असर
व्यापारियों का दावा है कि इन समस्याओं के कारण गोलघर, चटोरी गली, बलदेव प्लाजा और मंगलम टावर जैसे क्षेत्रों में व्यापार 20 से 50 प्रतिशत तक घट गया है। इससे छोटे और मध्यम व्यापारियों की स्थिति और कठिन हो गई है।
प्रशासन पर अनदेखी का आरोप
व्यापार मंडल के नेताओं का कहना है कि उन्होंने कई बार नगर निगम और प्रशासन को ज्ञापन सौंपे और
बैठकों में अपनी समस्याएं रखीं, लेकिन अब तक कोई ठोस समाधान नहीं निकला। हाल में दिए गए
आश्वासन भी पूरे नहीं किए गए, जिससे व्यापारियों में आक्रोश बढ़ गया है।
प्रमुख मांगें
व्यापारियों की मुख्य मांग है कि गोलघर क्षेत्र में अंडरग्राउंड पार्किंग की व्यवस्था की जाए और
ई-रिक्शा संचालन पर लगे प्रतिबंध को हटाया जाए। उनका कहना है कि
इन समस्याओं का समाधान होने पर ही व्यापार सामान्य हो पाएगा।
क्या होगा असर
28 अप्रैल को बाजार बंद रहने से शहर के व्यापार और आम जनता पर
असर पड़ सकता है। यह विरोध प्रशासन और
व्यापारियों के बीच टकराव को भी बढ़ा सकता है, जिससे आगे और वार्ता की जरूरत पड़ेगी।
Gorakhpur के गोलघर बाजार का बंद आह्वान व्यापारियों के बढ़ते असंतोष का संकेत है। अब देखना होगा कि
प्रशासन इस पर क्या कदम उठाता है और क्या बातचीत के जरिए समाधान निकल पाता है।
