सरकारी योजना का लालच देकर
उत्तर प्रदेश में साइबर ठगी का एक बड़ा खुलासा हुआ है, जहां पुलिस ने नेटवर्क मार्केटिंग के नाम पर चल रहे एक संगठित गिरोह का पर्दाफाश किया है। उन्नाव और आसपास के जिलों से जुड़े इस गिरोह ने लोगों को सरकारी योजनाओं का लालच देकर उनके बैंक खाते खुलवाए और फिर उन्हीं खातों का इस्तेमाल करोड़ों रुपये के अवैध लेन-देन के लिए किया।
कैसे काम करता था पूरा गिरोह?
पुलिस जांच में सामने आया कि आरोपी भोले-भाले लोगों को सरकारी योजनाओं का लाभ दिलाने का झांसा देते थे। इसके बाद उनके नाम पर बैंक खाते खुलवाए जाते थे।
खाता खुलवाने के बाद:
- एटीएम कार्ड
- पासबुक
- चेक बुक
सब कुछ आरोपी अपने पास रख लेते थे। इसके जरिए वे साइबर फ्रॉड से आए पैसों को अलग-अलग खातों में ट्रांसफर कर “साफ” करने का काम करते थे।
म्यूल अकाउंट क्या होता है?
म्यूल अकाउंट ऐसे बैंक खाते होते हैं जिनका इस्तेमाल असली मालिक नहीं, बल्कि अपराधी करते हैं। इन खातों का उपयोग अवैध पैसों को इधर-उधर घुमाने के लिए किया जाता है, जिससे असली अपराधियों तक पहुंचना मुश्किल हो जाता है।
सात आरोपी गिरफ्तार
पुलिस ने इस मामले में सात आरोपियों को गिरफ्तार किया है। इनमें कई जिलों के लोग शामिल हैं, जो अलग-अलग जगहों पर रहकर इस गिरोह को चला रहे थे।
गिरफ्तार आरोपियों में मुख्य रूप से:
- ओमकार अग्रहरि उर्फ अजीत
- ऋतुराज यादव
को इस नेटवर्क का मुख्य संचालक बताया जा रहा है।
पीड़ित ने ऐसे खोला राज
इस मामले का खुलासा तब हुआ जब एक पीड़ित ने पुलिस में शिकायत दर्ज कराई। उसने बताया कि उसके बेटे को सरकारी योजना का लाभ दिलाने का झांसा देकर बैंक खाता खुलवाया गया।
कुछ समय बाद भी कोई लाभ नहीं मिला तो शक हुआ। जांच करने पर पता चला कि उसके खाते का इस्तेमाल साइबर ठगी के पैसों के लेन-देन में किया जा रहा है।
पुलिस की कार्रवाई
शिकायत मिलने के बाद पुलिस ने जांच शुरू की और धीरे-धीरे पूरे गिरोह का खुलासा हो गया।
आरोपियों को गिरफ्तार कर कोर्ट में पेश किया गया, जहां से उन्हें जेल भेज दिया गया है।
पुलिस अब इस गिरोह से जुड़े अन्य लोगों और खातों की भी जांच कर रही है।
करोड़ों का ट्रांजेक्शन
जांच में यह भी सामने आया है कि आरोपियों ने कई लोगों के खाते खुलवाए थे और
उनके जरिए करोड़ों रुपये का लेन-देन किया गया।
यह रकम साइबर ठगी से जुड़ी बताई जा रही है, जिसे अलग-अलग खातों के जरिए छुपाने की कोशिश की गई।
लोगों के लिए चेतावनी
यह मामला आम लोगों के लिए एक बड़ी चेतावनी है। किसी भी अनजान व्यक्ति के कहने पर
बैंक खाता खुलवाना या अपनी बैंक डिटेल्स देना खतरनाक साबित हो सकता है।
सरकारी योजनाओं के नाम पर धोखा देने वाले ऐसे गिरोह लगातार सक्रिय हैं, इसलिए सतर्क रहना जरूरी है।
नेटवर्क मार्केटिंग के नाम पर चल रहा यह साइबर ठगी का खेल दिखाता है कि अपराधी
कितने नए-नए तरीके अपना रहे हैं। पुलिस की कार्रवाई से इस गिरोह का खुलासा जरूर हुआ है,
लेकिन ऐसे मामलों से बचने के लिए लोगों को भी जागरूक रहना होगा।
