हिमाचल प्रदेश में
हिमाचल प्रदेश सरकार ने महिलाओं के लिए चलाई जा रही इंदिरा गांधी प्यारी बहना सुख सम्मान निधि योजना में बड़ा संशोधन किया है। अब इस योजना का लाभ सभी महिलाओं को नहीं मिलेगा, बल्कि इसके लिए वार्षिक आय की सीमा तय कर दी गई है। इस फैसले के बाद लाखों महिलाओं पर इसका सीधा असर पड़ेगा।
क्या है इंदिरा गांधी प्यारी बहना सुख सम्मान निधि योजना?
यह योजना महिलाओं को आर्थिक रूप से सशक्त बनाने के उद्देश्य से शुरू की गई थी। सरकार ने 18 वर्ष से अधिक आयु की महिलाओं को हर महीने 1500 रुपये देने का वादा किया था, जिससे वे आत्मनिर्भर बन सकें।
शुरुआत में इस योजना में आय की कोई सीमा तय नहीं की गई थी, जिसके कारण बड़ी संख्या में आवेदन आए।
क्या बदला है नए संशोधन में?
सरकार ने अब योजना में वार्षिक आय की शर्त जोड़ दी है। नए नियम के अनुसार:
दो लाख रुपये से अधिक वार्षिक आय वाली महिलाओं को योजना का लाभ नहीं मिलेगा।
केवल वही महिलाएं पात्र होंगी जिनके परिवार की वार्षिक आय दो लाख रुपये से कम है।
बीपीएल श्रेणी की महिलाओं को भी योजना में शामिल किया जाएगा।
इस बदलाव के बाद योजना का दायरा सीमित हो गया है और अब यह केवल जरूरतमंद महिलाओं तक ही केंद्रित होगी।
दोबारा करना होगा आवेदन
सरकार के इस फैसले के बाद पहले किए गए सभी आवेदन अब मान्य नहीं होंगे।
महिलाओं को नए सिरे से आवेदन करना होगा।
नए आवेदन के लिए:
परिवार की आय का प्रमाण पत्र देना अनिवार्य होगा
नए फॉर्म में आय और बीपीएल से संबंधित जानकारी भरनी होगी
सरकार ने क्यों लिया यह फैसला?
सरकार के अनुसार, योजना में बहुत ज्यादा आवेदन आने लगे थे, जिससे वित्तीय बोझ बढ़ रहा था।
इसके अलावा, सरकार चाहती है कि इस योजना का लाभ सही और जरूरतमंद लोगों तक पहुंचे।
इसलिए पात्रता मानदंड को सख्त किया गया है ताकि संसाधनों का सही उपयोग हो सके।
अधिकारियों का क्या कहना है?
सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता विभाग के निदेशक सुमित खिमटा ने बताया कि सरकार के
आदेश के बाद नए आवेदन जल्द शुरू किए जाएंगे।
उन्होंने कहा कि नई प्रक्रिया के तहत पात्र महिलाओं को ही योजना का लाभ दिया जाएगा।
महिलाओं पर क्या पड़ेगा असर?
इस फैसले से उन महिलाओं को झटका लग सकता है जो पहले इस योजना के दायरे में थीं
लेकिन अब आय सीमा के कारण बाहर हो जाएंगी।
हालांकि सरकार का दावा है कि इससे वास्तविक जरूरतमंद महिलाओं को अधिक लाभ मिलेगा।
हिमाचल प्रदेश में 1500 रुपये वाली योजना में किया गया यह संशोधन सरकार की नई रणनीति को दर्शाता है,
जिसमें संसाधनों को सीमित करके सही लाभार्थियों तक पहुंचाने पर जोर दिया गया है।
अब देखना होगा कि यह बदलाव कितना प्रभावी साबित होता है।
