गोरखपुर जिले में स्वास्थ्य सेवाओं की रीढ़ मानी जाने वाली आशा कार्यकर्ताओं ने एक बार फिर अपनी समस्याओं को लेकर आवाज बुलंद कर दी है। जिले की सैकड़ों आशा बहुएं एकजुट होकर जिलाधिकारी कार्यालय पहुंचीं और अपनी विभिन्न मांगों को लेकर एक विस्तृत ज्ञापन सौंपा। इस दौरान उन्होंने सरकार और प्रशासन से जल्द से जल्द उनकी समस्याओं का समाधान करने की मांग की।
प्रदर्शन के दौरान आशा कार्यकर्ताओं ने कहा कि वे पिछले कई वर्षों से बेहद कम मानदेय पर काम कर रही हैं, जबकि उनसे अपेक्षित कार्यभार लगातार बढ़ता जा रहा है। कोरोना महामारी के दौरान भी उन्होंने अपनी जान जोखिम में डालकर स्वास्थ्य सेवाओं को बनाए रखने में अहम भूमिका निभाई थी, लेकिन इसके बावजूद उन्हें उचित सम्मान और आर्थिक लाभ नहीं मिल पा रहा है।
वेतन बढ़ाने की मांग को लेकर सड़कों पर उतरी आशा कार्यकर्ता,
आशा कार्यकर्ताओं की प्रमुख मांगों में मासिक वेतन में वृद्धि, उन्हें सरकारी कर्मचारी का दर्जा देना, समय पर भुगतान सुनिश्चित करना, और विभिन्न प्रोत्साहन राशि को नियमित करना शामिल है। इसके अलावा उन्होंने यह भी मांग की कि उन्हें सामाजिक सुरक्षा जैसे बीमा, पेंशन और स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएं।
ज्ञापन सौंपते समय आशा कार्यकर्ताओं ने प्रशासन को चेतावनी दी कि यदि उनकी मांगों पर जल्द कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई, तो वे बड़े स्तर पर आंदोलन करने को बाध्य होंगी। उन्होंने कहा कि वे अपनी जायज मांगों के लिए किसी भी हद तक जाने को तैयार हैं।
वेतन बढ़ाओ या आंदोलन! गोरखपुर में आशा कार्यकर्ताओं का बड़ा ऐलान, प्रशासन में हलचल”
इस पूरे घटनाक्रम के दौरान प्रशासनिक अधिकारियों ने आशा कार्यकर्ताओं को आश्वासन दिया कि उनकी मांगों को गंभीरता से लिया जाएगा और संबंधित विभाग तक उनकी बात पहुंचाई जाएगी। हालांकि आशा कार्यकर्ताओं का कहना है कि उन्हें केवल आश्वासन नहीं, बल्कि ठोस कार्रवाई चाहिए।
गौरतलब है कि आशा कार्यकर्ता ग्रामीण और शहरी स्वास्थ्य सेवाओं में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं। वे गर्भवती महिलाओं की देखभाल, टीकाकरण, स्वास्थ्य जागरूकता और कई अन्य जरूरी कार्यों में अहम योगदान देती हैं। ऐसे में उनकी मांगों को नजरअंदाज करना स्वास्थ्य व्यवस्था पर भी असर डाल सकता है।
गोरखपुर में सैकड़ों आशा बहुएं सड़क पर, DM को दिया अल्टीमेटम—अब नहीं सहेंगे अन्याय”
इस आंदोलन ने एक बार फिर सरकार के सामने यह सवाल खड़ा कर दिया है कि आखिर कब तक आशा कार्यकर्ताओं को उनके अधिकारों से वंचित रखा जाएगा। यदि जल्द ही कोई समाधान नहीं निकाला गया, तो यह मुद्दा राज्य स्तर पर एक बड़े आंदोलन का रूप ले सकता ह
