‘मियांपुर’ अब बना ‘रविंद्र नगर’, सीएम योगी का बड़ा ऐलान


उत्तर प्रदेश के लखीमपुर खीरी जिले में मुख्यमंत्री के दौरे के दौरान एक बड़ा फैसला लिया गया। गांव के नाम बदलने की घोषणा के साथ ही कई विकास योजनाओं की सौगात भी दी गई, जिससे क्षेत्र में राजनीतिक और सामाजिक चर्चा तेज हो गई है।

क्या है पूरा मामला

Lakhimpur Kheri जिले के मोहम्मदी तहसील क्षेत्र में आयोजित कार्यक्रम के दौरान Yogi Adityanath ने मियांपुर गांव का नाम बदलने का ऐलान किया।

उन्होंने घोषणा की कि अब मियांपुर गांव को ‘रविंद्र नगर’ के नाम से जाना जाएगा। यह नाम Rabindranath Tagore के सम्मान में रखा गया है।

सीएम योगी का बयान

मुख्यमंत्री ने अपने संबोधन में कहा कि गांव का नाम पहले मियांपुर रखा गया था, जबकि वहां इस नाम के अनुरूप स्थिति नहीं है। उन्होंने तुष्टिकरण और विभाजन की राजनीति पर भी निशाना साधा और कहा कि अब इस तरह की राजनीति को खत्म करने का समय आ गया है।

उन्होंने कांग्रेस पर भी आरोप लगाते हुए कहा कि लोगों को उनका अधिकार नहीं दिया गया और केवल वोट के लिए इस्तेमाल किया गया।

विस्थापित परिवारों को मिला मालिकाना हक

कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री ने पूर्वी पाकिस्तान यानी बांग्लादेश से विस्थापित होकर आए बंगाली हिंदू परिवारों को जमीन का मालिकाना हक भी प्रदान किया।

करीब 2350 विस्थापित परिवारों को अधिकार पत्र दिए गए, जिससे उन्हें वर्षों बाद अपनी जमीन पर कानूनी अधिकार मिला।

थारू परिवारों को भी बड़ी सौगात

इससे पहले मुख्यमंत्री ने पलियाकलां के चंदनचौकी में Tharu tribe के 4356 परिवारों को

538 हेक्टेयर जमीन के स्वामित्व संबंधी अधिकार पत्र वितरित किए।

यह परिवार 1976 से जमीन का उपयोग कर रहे थे, लेकिन अब उन्हें आधिकारिक मालिकाना हक मिला है।

817 करोड़ की परियोजनाओं का लोकार्पण

मुख्यमंत्री ने जिले में आयोजित दो अलग-अलग कार्यक्रमों में कुल 817 करोड़ रुपये की

314 विकास परियोजनाओं का लोकार्पण और शिलान्यास भी किया।

इन परियोजनाओं में सड़क, शिक्षा और स्वास्थ्य से जुड़ी कई महत्वपूर्ण योजनाएं शामिल हैं,

जिनसे क्षेत्र के विकास को गति मिलने की उम्मीद है।

राजनीतिक और सामाजिक असर

गांव का नाम बदलने और बड़ी संख्या में लोगों को जमीन का

अधिकार मिलने से क्षेत्र में राजनीतिक माहौल गर्म हो गया है।

यह फैसला जहां एक ओर विकास और पहचान से जुड़ा बताया जा रहा है,

वहीं दूसरी ओर इस पर राजनीतिक प्रतिक्रियाएं भी सामने आ सकती हैं।

लखीमपुर खीरी में लिया गया यह फैसला प्रशासनिक, सामाजिक और राजनीतिक तीनों स्तर पर महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

अब देखना होगा कि इस बदलाव का क्षेत्र की राजनीति और विकास पर क्या असर पड़ता है।