पलिया को जिला बनाने की मांग, विधायक रोमी साहनी ने सीएम योगी से की बड़ी अपील


उत्तर प्रदेश के लखीमपुर खीरी जिले में एक बार फिर पलियाकलां को जिला बनाने की मांग जोर पकड़ने लगी है।

मुख्यमंत्री के दौरे के दौरान यह मुद्दा प्रमुखता से उठाया गया,

जिससे क्षेत्रीय राजनीति में नई चर्चा शुरू हो गई है।

क्या है पूरा मामला

Lakhimpur Kheri के दौरे पर पहुंचे Yogi Adityanath ने शनिवार को पलियाकलां के चंदन चौकी में

एक महत्वपूर्ण कार्यक्रम में हिस्सा लिया। इस दौरान क्षेत्रीय

विधायक रोमी साहनी ने मंच से बड़ी मांग रखते हुए पलिया को जिला बनाने की अपील की।

उन्होंने कहा कि अगर पलिया को जिला बना दिया जाए तो क्षेत्र के लोगों को प्रशासनिक

सुविधाएं आसानी से मिल सकेंगी और विकास को नई गति मिलेगी।

विधायक की भावुक अपील

कार्यक्रम के दौरान विधायक रोमी साहनी ने मुख्यमंत्री की तारीफ करते हुए उन्हें ‘भगवान’ तक बता दिया।

उन्होंने कहा कि उनके लिए सीएम योगी ही सबसे बड़े सहारा हैं और

उनसे ही उम्मीद है कि पलिया को जिला बनाने का सपना पूरा होगा।

यह बयान अब राजनीतिक गलियारों में चर्चा का विषय बन गया है।

क्यों उठी जिला बनाने की मांग

पलियाकलां क्षेत्र लंबे समय से पिछड़ा और बाढ़ प्रभावित माना जाता है। यहां के लोगों को कई प्रशासनिक कार्यों के लिए दूर-दूर तक जाना पड़ता है।

यदि पलिया को जिला बना दिया जाता है तो सरकारी सेवाएं, प्रशासनिक व्यवस्था और विकास कार्यों में तेजी आने की संभावना है। यही कारण है कि स्थानीय जनप्रतिनिधि और लोग लगातार यह मांग उठा रहे हैं।

थारू परिवारों को मिली बड़ी सौगात

इस कार्यक्रम में मुख्यमंत्री ने पलिया तहसील के 34 गांवों के 4356 थारू परिवारों को जमीन के स्वामित्व के अधिकार पत्र भी वितरित किए।

Tharu tribe समुदाय के लिए यह एक बड़ी पहल मानी जा रही है, जिससे उनके जीवन स्तर में सुधार की उम्मीद है।

राजनीतिक असर और संभावनाएं

पलिया को जिला बनाने की मांग यदि आगे बढ़ती है, तो यह क्षेत्रीय राजनीति में बड़ा मुद्दा बन सकती है। इससे आगामी चुनावों में भी असर देखने को मिल सकता है।

राजनीतिक दल अब इस मुद्दे पर अपनी रणनीति बनाने में जुट सकते हैं, क्योंकि यह सीधे तौर पर स्थानीय जनता की भावनाओं से जुड़ा हुआ है।

निष्कर्ष

पलियाकलां को जिला बनाने की मांग ने एक बार फिर जोर पकड़ लिया है।

अब यह देखना अहम होगा कि सरकार इस पर क्या फैसला लेती है। फिलहाल

यह मुद्दा राजनीतिक और सामाजिक दोनों स्तर पर चर्चा का केंद्र बना हुआ है।