बरेली में
उत्तर प्रदेश के बरेली जिले में मतदाता सूची से बड़ी संख्या में नाम हटाए जाने के बाद राजनीतिक माहौल गर्म हो गया है। विशेष गहन पुनरीक्षण अभियान के तहत लाखों मतदाताओं के नाम कटने से सभी दलों के संभावित उम्मीदवारों की चिंता बढ़ गई है। यह बदलाव आने वाले चुनावों में बड़ा असर डाल सकता है।
क्या है पूरा मामला
Bareilly जिले के नौ विधानसभा क्षेत्रों में 166 दिनों तक चले विशेष गहन पुनरीक्षण अभियान में कुल 7.14 लाख मतदाताओं के नाम सूची से हटा दिए गए हैं। इतनी बड़ी संख्या में नाम हटने से राजनीतिक दलों के बीच हलचल तेज हो गई है।
यह अभियान मतदाता सूची को शुद्ध और अपडेट करने के लिए चलाया गया था, लेकिन इसके परिणाम ने चुनावी समीकरणों को प्रभावित करने की आशंका पैदा कर दी है।
किन क्षेत्रों में पड़ा असर
बरेली के जिन विधानसभा क्षेत्रों में यह बदलाव हुआ है उनमें बरेली शहर, कैंट, भोजीपुरा, नवाबगंज, फरीदपुर, बिथरी चैनपुर, आंवला, मीरगंज और बहेड़ी शामिल हैं।
इन सभी क्षेत्रों में शहरी और ग्रामीण दोनों वर्गों के मतदाताओं के नाम हटे हैं, जिससे हर सीट पर अलग-अलग असर देखने को मिल सकता है।
राजनीतिक दलों की बढ़ी चिंता
इतनी बड़ी संख्या में मतदाताओं के नाम हटने से राजनीतिक दलों में चिंता का माहौल है। सभी दल यह समझने में जुटे हैं कि किस वर्ग और जातीय समूह के मतदाता सबसे ज्यादा प्रभावित हुए हैं।
अगर किसी एक वर्ग के वोटर ज्यादा संख्या में सूची से हटे हैं, तो
इससे कई सीटों पर पारंपरिक वोट बैंक कमजोर हो सकते हैं।
इससे नए राजनीतिक समीकरण और ध्रुवीकरण भी देखने को मिल सकता है।
चुनावी रणनीति में बदलाव संभव
इस बदलाव के बाद अब हर विधानसभा सीट पर नए सिरे से रणनीति बनाई जा रही है।
उम्मीदवारों के चयन से लेकर प्रचार के मुद्दों तक में बदलाव की संभावना है।
राजनीतिक दल अब यह भी आकलन कर रहे हैं कि कितने मतदाता दोबारा सूची में जुड़ सकते हैं और
इसका चुनाव परिणाम पर क्या असर पड़ेगा।
सपा का आरोप
Samajwadi Party के महानगर अध्यक्ष शमीम खां सुल्तानी ने आरोप लगाया है कि
बड़ी संख्या में लोगों का वोट ही नहीं बन पाया है।
उनके अनुसार, अंतिम मतदाता सूची से 4,56,833 लोगों के नाम हटाए गए हैं। पार्टी स्तर पर
इसकी समीक्षा शुरू कर दी गई है और बीएलए व सेक्टर प्रभारियों से रिपोर्ट ली जा रही है।
उन्होंने यह भी कहा कि कई लोगों के पास जरूरी दस्तावेज होने के बावजूद
उनके नाम सूची से हटा दिए गए हैं। ऐसे मामलों में आपत्ति दर्ज कराई जाएगी।
आगे क्या होगा
अब सभी राजनीतिक दल इस मुद्दे पर नजर बनाए हुए हैं। यह देखना अहम होगा कि कितने लोग
दोबारा मतदाता सूची में जुड़ते हैं और इसका चुनावी परिणाम पर क्या प्रभाव पड़ता है।
फिलहाल बरेली में मतदाता सूची से नाम कटने का मुद्दा सियासत का केंद्र बन गया है और
आने वाले समय में यह और भी बड़ा मुद्दा बन सकता है।
