उत्तर प्रदेश में कानून व्यवस्था और सड़क सुरक्षा को लेकर सख्त रुख अपनाते हुए राजीव कृष्णा ने बड़ा प्रशासनिक फैसला लिया है। प्रदेश भर में बढ़ते सड़क हादसों और लापरवाही को देखते हुए 5 थाना प्रभारियों को लाइन हाजिर कर दिया गया है, जबकि 2 डिप्टी एसपी स्तर के अधिकारियों के खिलाफ जांच के आदेश जारी किए गए हैं।
यह कार्रवाई पुलिस प्रशासन में जवाबदेही तय करने और सड़क सुरक्षा को मजबूत करने की दिशा में एक बड़ा कदम मानी जा रही है।
किन थाना प्रभारियों पर हुई कार्रवाई
DGP के आदेश के अनुसार जिन थाना प्रभारियों को हटाया गया उनमें शामिल हैं
चोलापुर थाना – दीपक कुमार
कैंपियरगंज थाना – जीतेन्द्र सिंह
छिबरामऊ थाना – विष्णुकांत तिवारी
रामसनेहीघाट थाना – जगदीश प्रसाद शुक्ला
सिकरारा थाना – उदय प्रताप सिंह
इन सभी थाना क्षेत्रों में सड़क दुर्घटनाओं की संख्या में अचानक बढ़ोतरी देखने को मिली थी, जिसके चलते यह सख्त कदम उठाया गया।
इन अधिकारियों पर भी जांच
कार्रवाई केवल थाना स्तर तक सीमित नहीं रही बल्कि ट्रैफिक व्यवस्था संभालने वाले अधिकारियों पर भी सवाल उठे हैं
बाराबंकी के CO ट्रैफिक आलोक कुमार पाठक
जौनपुर के CO ट्रैफिक गिरेन्द्र कुमार सिंह
इन दोनों अधिकारियों के खिलाफ प्रारंभिक जांच के आदेश दिए गए हैं ताकि जिम्मेदारी तय की जा सके।
कैसे हुई समीक्षा बैठक
यह महत्वपूर्ण बैठक पुलिस मुख्यालय में आयोजित की गई थी, जिसमें प्रदेश के सभी वरिष्ठ अधिकारी शामिल हुए।
वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से जुड़े अधिकारी
पुलिस कमिश्नर
ADG ज़ोन
IG और DIG रेंज
SSP और SP
बैठक में खास तौर पर सड़क सुरक्षा, ट्रैफिक प्रबंधन और बढ़ते हादसों पर चर्चा की गई।
सड़क हादसों पर सख्ती क्यों
उत्तर प्रदेश के कई जिलों में हाल के समय में सड़क दुर्घटनाओं में तेजी से वृद्धि हुई है। इसके पीछे कई कारण सामने आए हैं
ट्रैफिक नियमों की अनदेखी
ओवरलोडिंग और तेज रफ्तार
पुलिस निगरानी में कमी
स्थानीय प्रशासन की लापरवाही
DGP ने स्पष्ट कहा है कि अब किसी भी तरह की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी और जिम्मेदार अधिकारियों पर सीधे कार्रवाई होगी।
सरकार का सख्त संदेश
इस कार्रवाई के जरिए सरकार ने स्पष्ट संकेत दिया है कि
कानून व्यवस्था सर्वोच्च प्राथमिकता है
सड़क सुरक्षा से समझौता नहीं होगा
जिम्मेदारी तय होगी
लापरवाही पर तुरंत एक्शन लिया जाएगा
निष्कर्ष
उत्तर प्रदेश में DGP स्तर से लिया गया यह बड़ा फैसला प्रशासनिक सख्ती का संकेत है।
यह कार्रवाई न केवल अधिकारियों के लिए चेतावनी है
बल्कि आम जनता की सुरक्षा सुनिश्चित करने की दिशा में एक मजबूत कदम भी है।
आने वाले समय में इससे सड़क हादसों में कमी आने की उम्मीद जताई जा रही है।
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