कानपुर किडनी कांड
किडनी कांड में नया बड़ा खुलासा
कानपुर के चर्चित किडनी कांड में अब तक का सबसे बड़ा खुलासा सामने आया है। जिस आयुष चौधरी को अब तक पीड़ित बताया जा रहा था, वह जांच में बेहद शातिर निकला है।
फर्जी निकली ‘मजबूरी’ की कहानी
जांच में सामने आया है कि आयुष ने अपनी किडनी बेचने की जो कहानी पुलिस को सुनाई थी, वह पूरी तरह से फर्जी थी। उसने दावा किया था कि पढ़ाई के खर्च के लिए उसे यह कदम उठाना पड़ा, लेकिन अब यह कहानी झूठी साबित हो रही है।
पहले ही बेच चुका है 18 बीघा जमीन
पुलिस जांच में यह भी सामने आया है कि आयुष अपनी गलत संगत के चलते पहले ही गांव की करीब 18 बीघा जमीन बेच चुका है। इससे साफ होता है कि वह आर्थिक मजबूरी नहीं बल्कि अन्य कारणों से इस पूरे मामले में शामिल था।
पुलिस को कर रहा था गुमराह
अधिकारियों के अनुसार आयुष लगातार पुलिस को गुमराह करने की कोशिश कर रहा था। उसने खुद को बचाने के लिए कई झूठे बयान दिए और मामले को अलग दिशा में ले जाने का प्रयास किया।
साइबर ठगी केस में भी नाम
जांच में यह भी सामने आया है कि आयुष का नाम साइबर ठगी के एक मामले में भी जुड़ा हुआ है।
गुजरात पुलिस ने उसे इस मामले में नोटिस भेजा था, जिससे
उसके आपराधिक गतिविधियों से जुड़े होने के संकेत मिलते हैं।
अस्पतालों पर भी हुई कार्रवाई
इस पूरे मामले में पुलिस और स्वास्थ्य विभाग की टीम ने कई अस्पतालों पर छापेमारी की।
अवैध किडनी ट्रांसप्लांट की पुष्टि होने के बाद डॉक्टर दंपती समेत छह लोगों को गिरफ्तार किया गया है।
कैसे सामने आया मामला
31 मार्च को रावतपुर पुलिस ने स्वास्थ्य विभाग के साथ मिलकर छापा मारा था।
जांच के दौरान कई संदिग्ध मामलों का खुलासा हुआ, जिससे यह पूरा किडनी रैकेट सामने आया।
पढ़ाई की आड़ में खेल
आयुष ने खुद को देहरादून की यूनिवर्सिटी का छात्र बताया था, लेकिन जांच में उसकी कहानी संदिग्ध पाई गई।
अब पुलिस उसके पूरे नेटवर्क और कनेक्शन की जांच कर रही है।
कानपुर किडनी कांड अब और भी उलझता जा रहा है। इस मामले में
हर दिन नए खुलासे हो रहे हैं, जो यह दिखाते हैं कि
यह केवल एक व्यक्ति का मामला नहीं बल्कि एक बड़े नेटवर्क का हिस्सा हो सकता है।
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