गोरखपुर के ऐतिहासिक घंटाघर
गोरखपुर महानगर का ऐतिहासिक घंटाघर एक बार फिर चर्चा में है। लगभग 96 वर्ष पुराने इस विरासत स्थल का अब नया स्वरूप सामने आया है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ 5 अप्रैल को इस भव्य सौंदर्यीकरण कार्य का लोकार्पण करेंगे। यह केवल एक निर्माण परियोजना नहीं, बल्कि इतिहास, बलिदान और विकास का संगम है, जो आने वाली पीढ़ियों को अपनी गौरवशाली विरासत से जोड़ने का कार्य करेगा।
स्वतंत्रता संग्राम से जुड़ी ऐतिहासिक पहचान
घंटाघर का इतिहास स्वतंत्रता आंदोलन की यादों से गहराई से जुड़ा हुआ है। जिस स्थान पर आज यह इमारत खड़ी है, वहां कभी एक विशाल पाकड़ का वृक्ष हुआ करता था।
बताया जाता है कि प्रथम स्वतंत्रता संग्राम के दौरान इसी वृक्ष पर कई स्वतंत्रता सेनानियों को फांसी दी गई थी। यह स्थान देशभक्ति और बलिदान का प्रतीक बन गया।
पंडित रामप्रसाद बिस्मिल से जुड़ी भावनाएं
19 दिसंबर 1927 को काकोरी कांड के महानायक पंडित रामप्रसाद बिस्मिल को गोरखपुर कारागार में फांसी दी गई थी।
उनकी शवयात्रा घंटाघर पहुंची थी, जहां उनकी माता ने एक प्रेरणादायक उद्बोधन दिया था। तभी से यह स्थान बिस्मिल जी की स्मृतियों से जुड़ गया और लोगों के लिए श्रद्धा का केंद्र बन गया।
1930 में हुआ घंटाघर का निर्माण
घंटाघर का निर्माण वर्ष 1930 में रायगंज के सेठ राम खेलावन और सेठ ठाकुर प्रसाद द्वारा कराया गया था।
मीनार जैसी ऊंची इस इमारत पर एक बड़ी घड़ी लगाई गई थी, जिसके कारण इसे “घंटाघर” नाम मिला। समय के साथ यह स्थान गोरखपुर की पहचान और गौरव का प्रतीक बन गया।
सौंदर्यीकरण से निखरी ऐतिहासिक धरोहर
सीएम योगी आदित्यनाथ की प्रेरणा से नगर निगम ने लगभग
एक करोड़ रुपये की लागत से घंटाघर का सौंदर्यीकरण कराया है।
इमारत के निचले हिस्से पर पंडित रामप्रसाद बिस्मिल के बलिदान से जुड़ी चित्रकारी उकेरी गई है,
जो लोगों को इतिहास से जोड़ने का काम करती है। इस कार्य का उद्देश्य है कि
नई पीढ़ी भी स्वतंत्रता सेनानियों के त्याग और संघर्ष को समझ सके।
विकास परियोजनाओं की सौगात
घंटाघर के लोकार्पण के साथ ही मुख्यमंत्री दो महत्वपूर्ण विकास परियोजनाओं की भी सौगात देंगे।
पहली परियोजना अमर बलिदानी बंधु सिंह के नाम पर बनाई गई मल्टीलेवल पार्किंग और
कॉमर्शियल कॉम्प्लेक्स है, जिसकी लागत लगभग 27.26 करोड़ रुपये है।
इस कॉम्प्लेक्स में 43 दुकानों का निर्माण किया गया है और इसमें 50 कारों तथा
200 दोपहिया वाहनों की पार्किंग की सुविधा उपलब्ध होगी।
विरासत और आधुनिकता का संगम
इस कॉम्प्लेक्स की खास बात यह है कि इसमें भी स्वतंत्रता संग्राम से
जुड़े प्रसंगों को दीवारों पर पेंटिंग के माध्यम से दर्शाया गया है।
इसके अलावा पांडेयहाता विरासत गलियारा में एक नए कॉमर्शियल कॉम्प्लेक्स का
शिलान्यास भी किया जाएगा, जिससे शहर के विकास को नई दिशा मिलेगी।
गोरखपुर का घंटाघर अब केवल एक ऐतिहासिक इमारत नहीं, बल्कि विरासत और विकास का प्रतीक बन चुका है।
इसका सौंदर्यीकरण न केवल शहर की सुंदरता बढ़ाएगा बल्कि लोगों को अपने इतिहास से जोड़ने का कार्य भी करेगा।
मुख्यमंत्री द्वारा इस परियोजना का लोकार्पण शहर के विकास में एक नया अध्याय जोड़ने वाला साबित होगा।
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