ग्लोबल एआई कॉन्फ्लुएंस
गोरखपुर। उत्तर प्रदेश के उद्यान मंत्री दिनेश प्रताप सिंह ने कहा कि ‘ग्लोबल एआई कॉन्फ्लुएंस-2026’ केवल एक तकनीकी आयोजन नहीं बल्कि वैश्विक स्तर पर विचारों के मंथन का एक सशक्त मंच है। यहां 26 देशों से आए 180 प्रतिभागी ‘वसुधैव कुटुंबकम’ की भावना को साकार कर रहे हैं। इस ‘ज्ञान मंथन’ से विश्व कल्याण के लिए नई तकनीकें, नवाचार और समाधान निकलेंगे।
गोरखपुर में वैश्विक एआई मंथन का भव्य शुभारंभ
दीनदयाल उपाध्याय गोरखपुर विश्वविद्यालय (डीडीयू) के महायोगी गुरु गोरक्षनाथ शोधपीठ में अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद के प्रकल्प वर्ल्ड ऑर्गेनाइजेशन फॉर स्टूडेंट एंड यूथ (WOSY), मेटा एवं विश्वविद्यालय के संयुक्त तत्वावधान में ‘ग्लोबल आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस कॉन्फ्लुएंस 2026’ का उद्घाटन समारोह आयोजित हुआ।
मुख्य अतिथि के रूप में संबोधित करते हुए उद्यान मंत्री दिनेश प्रताप सिंह ने प्राचीन भारतीय संस्कृति से प्रेरणा ली। उन्होंने कहा कि जिस प्रकार सतयुग में समुद्र मंथन से अमूल्य रत्न प्राप्त हुए थे, उसी प्रकार इस आधुनिक ‘ज्ञान मंथन’ से भी विश्व के कल्याण के लिए नई तकनीकें, नवाचार और समाधान निकलेंगे। भारत की संस्कृति सदैव विश्व कल्याण की भावना से प्रेरित रही है।
मंत्री ने जोर देकर कहा कि एआई जैसे उभरते क्षेत्रों में आगे बढ़ते हुए हमें अपनी विरासत और मूल्यों को साथ लेकर चलना होगा। उन्होंने सभी शोधकर्ताओं और युवाओं से आह्वान किया कि एआई के क्षेत्र में कार्य करते समय मानवता के हित, नैतिक मूल्यों और वैश्विक कल्याण को सर्वोच्च प्राथमिकता दें।
मानव बुद्धिमत्ता एआई से ऊपर: प्रो. राजीव प्रकाश
विशिष्ट अतिथि आईआईटी भिलाई के निदेशक प्रो. राजीव प्रकाश ने स्पष्ट किया कि मानव बुद्धिमत्ता को सदैव कृत्रिम बुद्धिमत्ता से ऊपर रखना आवश्यक है। एआई हमारा सहायक है, स्वामी नहीं। एआई विशाल डेटा का विश्लेषण कर दिशा दिखा सकता है, लेकिन अंतिम निर्णय और जिम्मेदारी मानव की ही होनी चाहिए।
प्रो. प्रकाश ने कहा कि तकनीक तभी सार्थक है जब वह मानवता के हित में कार्य करे और जीवन को सरल, सुरक्षित एवं समृद्ध बनाए। उन्होंने एआई के नैतिक उपयोग पर जोर दिया।
कार्यक्रम में गोरखपुर विश्वविद्यालय की कुलपति प्रो. पूनम टंडन,
अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद के राष्ट्रीय संगठन मंत्री आशीष चौहान सहित अन्य
गणमान्य व्यक्ति उपस्थित रहे। धन्यवाद ज्ञापन WOSY के महासचिव शुभम गोयल ने किया।
एआई और भारतीय मूल्यों का अनोखा संगम
यह आयोजन गोरखपुर को वैश्विक तकनीकी मानचित्र पर नई पहचान दिला रहा है। 26 देशों के 180 युवा प्रतिभागी
यहां एआई की संभावनाओं, चुनौतियों और नैतिक आयामों पर विचार-विमर्श कर रहे हैं। ‘वसुधैव कुटुंबकम’ की
भावना से प्रेरित यह मंच सांस्कृतिक विविधता और तकनीकी नवाचार को जोड़ रहा है।
भारत में एआई विकास तेजी से हो रहा है। ऐसे में नैतिकता, मानव केंद्रित डिजाइन और विरासत संरक्षण के
साथ आगे बढ़ना जरूरी है। ग्लोबल एआई कॉन्फ्लुएंस 2026 इसी दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।
यह दो दिवसीय कार्यक्रम युवाओं को एआई टूल्स, रिसर्च और ग्लोबल कोलैबोरेशन के अवसर प्रदान कर रहा है।
प्रतिभागी विभिन्न सत्रों में चर्चा कर नई आइडियाज शेयर कर रहे हैं।
भविष्य एआई और मानवता का संतुलित होगा
‘ग्लोबल एआई कॉन्फ्लुएंस 2026’ साबित करता है कि तकनीकी प्रगति और सांस्कृतिक मूल्य साथ-साथ चल सकते हैं।
सतयुग के समुद्र मंथन की तरह यह ज्ञान मंथन भी विश्व को
अमूल्य उपहार देगा – नैतिक, मानवीय और समावेशी एआई समाधान।
गोरखपुर जैसे शहरों में ऐसे आयोजन न केवल स्थानीय युवाओं को प्रेरित करते हैं
बल्कि भारत को ग्लोबल एआई लीडरशिप की दिशा में मजबूत बनाते हैं।
