मथुरा के छाता में फरसा वाले बाबा
मथुरा छाता बवाल: फरसा वाले बाबा की मौत की जांच के लिए SIT का गठन
मथुरा जिले में फरसा वाले बाबा चंद्रशेखर की मौत के बाद उपजे विवाद और छाता क्षेत्र में हुए बवाल थमने का नाम नहीं ले रहा। हिंदू संगठनों, साधु-संतों और स्थानीय लोगों के विरोध के बाद प्रशासन ने बड़ा कदम उठाया है। अब पूरे मामले की गहन जांच के लिए विशेष जांच टीम (SIT) गठित कर दी गई है।
एसआईटी पुख्ता सबूत मिलने पर ही किसी की गिरफ्तारी करेगी और बाबा की मौत सड़क हादसे में हुई या साजिश के तहत हत्या, इसकी दोबारा जांच करेगी। साथ ही जिले के बाहर से आए प्रदर्शनकारियों के पीछे किसकी साजिश थी, यह भी देखा जाएगा।
SIT गठन की पृष्ठभूमि
फरसा वाले बाबा की मौत के बाद छाता क्षेत्र में भारी बवाल हुआ था। प्रदर्शनकारियों ने सड़क जाम किया, पथराव किया और पुलिस वाहनों को नुकसान पहुंचाया। पुलिस ने कई गोसेवकों को गिरफ्तार भी किया, जिससे हिंदू संगठन नाराज हो गए।
सोमवार को वृंदावन रोड पर तपोभूमि के सामने विद्या भारती के कार्यालय में एक महत्वपूर्ण गोपनीय बैठक हुई। इसमें शामिल थे:
- प्रांत प्रचारक धर्मेंद्र
- गोवर्धन विधायक मेघश्याम सिंह
- मांट विधायक राजेश चौधरी
- जिला पंचायत अध्यक्ष किशन चौधरी
- विहिप ब्रज प्रांत अध्यक्ष कन्हैया लाल अग्रवाल
- समाजसेवी गोपेश्वरनाथ चतुर्वेदी
- डीएम चंद्रप्रकाश सिंह
- एसएसपी श्लोक कुमार
बैठक में छाता बवाल, गिरफ्तार गोसेवकों और फरसा वाले बाबा की मौत पर विस्तार से चर्चा हुई। बैठक के बाद प्रशासन ने SIT गठित करने का फैसला लिया।
SIT क्या जांच करेगी?
- फरसा वाले बाबा की मौत सड़क हादसा थी या साजिश?
- बाबा की मौत में गौतस्करों की भूमिका या कोई और साजिश?
- छाता बवाल में शामिल जिले के बाहर के प्रदर्शनकारियों की पहचान और उनकी साजिश
- पत्थर फेंकने वालों और हिंसा फैलाने वालों की भूमिका
- पूरे प्रकरण की गहन जांच और सच्चाई सामने लाना
एसपी क्राइम की निगरानी में तीन सदस्यीय SIT पूरे मामले की जांच करेगी। प्रशासन का कहना है कि पुख्ता सबूत मिलने के बाद ही कोई कार्रवाई होगी।
फरसा वाले बाबा कौन थे?
चंद्रशेखर उर्फ फरसा वाले बाबा मथुरा के知名 गौरक्षक थे। वे अक्सर गौतस्करों पर नजर रखते थे। घटना की रात वे संदिग्ध वाहन की जांच कर रहे थे, जब घने कोहरे में एक ट्रक ने उनकी बाइक को टक्कर मार दी। पुलिस का प्रारंभिक दावा है कि यह सड़क दुर्घटना थी, लेकिन समर्थक इसे साजिश बता रहे हैं।
हिंदू संगठनों की प्रतिक्रिया
हिंदू संगठन और साधु-संत पुलिस की कार्रवाई से नाराज हैं। उन्होंने मांग की है कि बाबा की मौत की निष्पक्ष जांच हो और दोषियों पर सख्त कार्रवाई की जाए। SIT गठन को उन्होंने सकारात्मक कदम बताया है, लेकिन साथ ही चेतावनी दी है कि जांच निष्पक्ष और पारदर्शी होनी चाहिए।
अंतिम अपडेट: 24 मार्च 2026
मथुरा प्रशासन ने स्थिति को नियंत्रित रखने के लिए सुरक्षा बढ़ा दी है।
SIT की जांच रिपोर्ट आने के बाद आगे की कार्रवाई स्पष्ट होगी। इस मामले पर
नजर रखी जा रही है और नई अपडेट्स जैसे ही आएंगी, यहां शेयर की जाएंगी।
आपकी राय क्या है? फरसा वाले बाबा की मौत हादसा थी या साजिश? कमेंट में जरूर बताएं। शांति और न्याय की अपील।
मथुरा छाता बवाल SIT – फरसा वाले बाबा मामले में सच्चाई सामने आएगी।
