प्रयागराज सदर तहसील
प्रयागराज जिले के सदर तहसील में गंगा और यमुना जैसी नदियों के किनारे बसे दर्जनों गांवों के किसानों और ग्रामीणों के लिए जमीन का मालिकाना हक आज भी एक बड़ा संकट बना हुआ है। नदियों के रास्ता बदलने (अवरोधन) के कारण भूमि का स्वरूप बदल गया, लेकिन सर्वे, चकबंदी और रिकॉर्ड अपडेट की प्रक्रिया इतनी धीमी है कि 1922 के बाद कई गांवों में आज तक खतौनी दुरुस्त नहीं हो पाई। इससे 25 हजार से अधिक लोग प्रभावित हैं, जो सरकारी योजनाओं के लाभ से वंचित हैं।
नदी ने बदला रास्ता, जमीन का मालिकाना हक संकट में
सदर तहसील के उत्तरास्रोत इलाके में स्थित गांवों में नदियां हर कुछ सालों में अपना रास्ता बदलती हैं। जहां पहले खेती योग्य जमीन थी, वहां अब बालू या पानी आ गया, तो जहां पहले नदी थी, वहां अब जमीन उभर आई। लेकिन पुराने रिकॉर्ड में बदलाव नहीं होने से किसानों के पास पुरानी खतौनी ही है, जो अब वास्तविक स्थिति से मेल नहीं खाती।
- 1922 में हुई थी चकबंदी: उत्तरास्रोत गांव में आखिरी बार 1922 में चकबंदी हुई थी। उसके बाद नदी ने कई बार रास्ता बदला, लेकिन नया सर्वे और चकबंदी नहीं हो पाया।
- 12 से ज्यादा गांव प्रभावित: इनमें उत्तरास्रोत, मझगवां, करछना क्षेत्र के कई गांव शामिल हैं। कुल मिलाकर 25 हजार से अधिक लोग इस समस्या से जूझ रहे हैं।
- मैनुअल खतौनी का सहारा: लोगों को आज भी पुरानी मैनुअल खतौनी दिखानी पड़ती है, जिसके आधार पर न तो लोन मिलता है, न सरकारी योजनाओं का लाभ।
सर्वे और चकबंदी प्रक्रिया में सालों की देरी
राजस्व विभाग के अनुसार, नदी प्रभावित क्षेत्रों में सर्वे और चकबंदी के लिए विशेष नियम हैं। लेकिन:
- फाइलें लंबित रहती हैं।
- सर्वेक्षण दल समय पर नहीं पहुंचते।
- पुराने रिकॉर्ड और वर्तमान स्थिति में अंतर होने से विवाद बढ़ता है।
- पड़ोसी जिलों या राज्यों से जुड़े मामलों में और जटिलता आ जाती है।
इस देरी के कारण किसान जमीन बेच नहीं पाते, बैंक लोन नहीं मिलता, प्रधानमंत्री आवास योजना, किसान सम्मान निधि जैसी योजनाओं से वंचित रह जाते हैं। कई परिवारों में जमीन के बंटवारे भी रुके हुए हैं।
ग्रामीणों की व्यथा और मांगें
प्रभावित गांवों के लोग बताते हैं:
- “नदी ने हमारी जमीन खा ली, लेकिन रिकॉर्ड में अभी भी पुरानी जमीन दिख रही है।”
- “बैंक वाले खतौनी देखकर कहते हैं—यह पुराना है, नया सर्वे करवाओ।”
- “सरकारी अफसर कहते हैं फाइल चल रही है, लेकिन साल बीत जाते हैं।”
ग्रामीणों की मुख्य मांग है:
- तत्काल सर्वे और चकबंदी
- डिजिटल खतौनी अपडेट
- नदी प्रभावित क्षेत्रों के लिए विशेष अभियान
- पुराने रिकॉर्ड को वर्तमान स्थिति के अनुसार संशोधित करना
प्रशासन की स्थिति और संभावित समाधान
जिलाधिकारी और तहसील स्तर पर इस समस्या से अवगत हैं। कुछ गांवों में सर्वे शुरू भी हुआ है, लेकिन गति धीमी है। विशेषज्ञों का सुझाव है कि:
- ड्रोन सर्वे और जीआईएस तकनीक का उपयोग तेजी से रिकॉर्ड अपडेट कर सकता है।
- नदी प्रभावित क्षेत्रों के लिए अलग से एक समयबद्ध अभियान चलाया जाए।
- ग्रामीणों को अस्थायी प्रमाण-पत्र दिए जाएं ताकि योजनाओं का लाभ मिल सके।
जमीन का हक, विकास का आधार
नदियों के रास्ता बदलने से बदली जमीन का रिकॉर्ड न बदल पाना ग्रामीणों के लिए दोहरी मार है। प्रयागराज सदर तहसील के
इन 12+ गांवों के 25 हजार लोग दशकों से इंतजार कर रहे हैं।
यदि प्रशासन तेजी से सर्वे-चकबंदी पूरी करे, तो न
केवल मालिकाना हक सुरक्षित होगा, बल्कि सरकारी योजनाओं का लाभ भी
इन तक पहुंचेगा। समय आ गया है कि नदी प्रभावित क्षेत्रों को प्राथमिकता दी जाए,
ताकि ग्रामीणों की जमीन और भविष्य दोनों सुरक्षित रहें।
