मेरठ ISIS Connection
मेरठ ISIS स्लीपर सेल का खुलासा उत्तर प्रदेश की सुरक्षा व्यवस्था के लिए बड़ा झटका और साथ ही सतर्कता का संकेत है। जांच में सामने आया है कि पाकिस्तानी गैंगस्टर शहजाद भट्टी और सरदार उर्फ सरफराज ने यूट्यूब और टेलीग्राम चैनलों के जरिए मेरठ में जासूसी नेटवर्क खड़ा किया। इस नेटवर्क में नाबालिगों को भी शामिल कर मंदिरों और सैन्य ठिकानों की रेकी कराई जा रही थी। वीडियो पाकिस्तान भेजे जा रहे थे और विस्फोटक भी उपलब्ध कराया गया था। एटीएस, स्थानीय पुलिस और खुफिया एजेंसियों की सतर्कता से कई आरोपी गिरफ्तार हुए, जिससे मंदिरों में बड़े विस्फोट की साजिश नाकाम हो गई।
पाकिस्तानी हैंडलर्स ने कैसे बनाया नेटवर्क?
जांच में खुलासा हुआ कि आईएसआई से जुड़े शहजाद भट्टी और सरदार उर्फ सरफराज ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स का इस्तेमाल कर दिल्ली-एनसीआर में स्लीपर सेल तैयार की। टेलीग्राम ग्रुप्स और यूट्यूब चैनलों के जरिए युवाओं को रैडिकलाइज किया जा रहा था। मेरठ के कई इलाकों से युवक इस जाल में फंसे। इनमें नाबालिग भी शामिल थे, जिन्हें आसानी से प्रभावित किया जा सकता था।
शहजाद भट्टी ने भारत में तैयार इस नेटवर्क को विस्फोटक भी मुहैया कराया। मकसद किसी विशेष मौके पर मंदिरों या सैन्य ठिकानों पर हमला करना था। खुफिया विभाग को संदेह है कि यह ISIS से प्रेरित साजिश का हिस्सा था।
गिरफ्तारियों की श्रृंखला: अंबाला से शुरू, मेरठ तक पहुंची
13 मार्च 2026 को अंबाला STF ने बराड़ा के पास तीन युवकों को 2 किलो विस्फोटक के साथ पकड़ा। इनमें शामिल थे:
- अंबाला के कंबासी गांव निवासी जंगवीर
- अजमेर निवासी अली अकबर
- मेरठ के लिसाड़ी गेट निवासी अनस
अनस की गिरफ्तारी के बाद जांच मेरठ पहुंची। इसके बाद हापुड़ और गाजियाबाद पुलिस ने जई गांव के आजाद, परतापुर के गणेश, शास्त्रीनगर के गगन और अन्य संदिग्धों को हिरासत में लिया। पूछताछ में पता चला कि ये लोग मंदिरों और सैन्य क्षेत्रों के वीडियो बनाकर पाकिस्तान भेज रहे थे।
मेरठ पुलिस और ATS अलर्ट मोड पर
गिरफ्तारियों के बाद मेरठ पुलिस, ATS और खुफिया विभाग हाई अलर्ट पर हैं।
शहर के संवेदनशील इलाकों में निगरानी बढ़ा दी गई है। मंदिरों की सुरक्षा कड़ी कर दी गई है।
पुलिस का कहना है कि सोशल मीडिया पर रैडिकलाइजेशन रोकने के लिए
साइबर सेल सक्रिय है। नाबालिगों को टारगेट करने वाले ग्रुप्स की पहचान की जा रही है।
यह मामला दिखाता है कि सोशल मीडिया अब जासूसी और आतंकी साजिशों का नया हथियार बन गया है। युवाओं को
ऑनलाइन जाल में फंसाकर इस्तेमाल किया जा रहा है। माता-पिता और युवाओं को सतर्क रहने की जरूरत है।
सुरक्षा एजेंसियों की बड़ी सफलता
एटीएस और पुलिस की समय पर कार्रवाई से बड़ी साजिश नाकाम हुई। अगर यह नेटवर्क सक्रिय रहता तो किसी
बड़े हमले की आशंका थी। अब जांच में और नाम सामने आने की उम्मीद है।
मेरठ जैसे शहर में ऐसी गतिविधियां बढ़ रही हैं
, इसलिए स्थानीय स्तर पर जागरूकता और निगरानी जरूरी है।
यह खुलासा राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए चेतावनी है। सोशल मीडिया का दुरुपयोग रोकना और
युवाओं को सुरक्षित रखना अब चुनौती है।
