फरसा वाले बाबा
फरसा वाले बाबा की मौत ने मथुरा को हिला कर रख दिया। ईद-उल-फितर 2026 के दिन ब्रज क्षेत्र के प्रसिद्ध गौरक्षक चंद्रशेखर उर्फ ‘फरसा वाले बाबा’ की संदिग्ध मौत के बाद शनिवार सुबह दिल्ली-आगरा हाईवे पर भारी बवाल मच गया। गुस्साई भीड़ ने हाईवे जाम किया, पथराव किया, पुलिस और एसडीएम की गाड़ियां तोड़ीं। पुलिस को आंसू गैस छोड़नी पड़ी और हालात संभालने के लिए सेना की टुकड़ी तक मोर्चा संभालने पहुंची। जानिए कौन थे फरसा वाले बाबा, जिनकी मौत पर इतना आक्रोश क्यों फैला?
फरसा वाले बाबा कौन थे? असली नाम और पृष्ठभूमि
फरसा वाले बाबा का असली नाम चंद्रशेखर था। वे उत्तर प्रदेश के फिरोजाबाद जिले के गांव गोपाल का नगला के मूल निवासी थे। (यह गांव पर्यटन मंत्री जयवीर सिंह का भी मूल स्थान है।) बाद में वे मथुरा के ब्रज क्षेत्र में सक्रिय हो गए, खासकर कोसीकलां, छाता और अंजनोख इलाकों में। वे एक निडर गौरक्षक और गौ-सेवक के रूप में प्रसिद्ध थे। हमेशा हाथ में फरसा (कुल्हाड़ी जैसा हथियार) लेकर चलते थे, इसी वजह से उन्हें ‘फरसा वाले बाबा’ कहा जाने लगा।
बाबा चंद्रशेखर गौ-तस्करी के खिलाफ मुखर थे। वे कई हिंदूवादी संगठनों से जुड़े थे और ब्रज में गौरक्षा आंदोलन का प्रमुख चेहरा बने। स्थानीय लोग उन्हें संत और प्रखर गौरक्षक मानते थे। उनकी लोकप्रियता इतनी थी कि उनके भक्तों की बड़ी संख्या थी।
गोरक्षा के लिए बनाई युवाओं की टीम
फरसा वाले बाबा ने गौ-रक्षा के लिए एक मजबूत नेटवर्क तैयार किया था। उन्होंने 200 से अधिक युवाओं की टीम गठित की थी, जो गांव-गांव में गो-सेवा और गौ-तस्करी रोकने के लिए तत्पर रहती थी। यह टीम 24 घंटे अलर्ट मोड पर रहती थी। बाबा खुद बाइक पर टीम के साथ निकलते और संदिग्ध वाहनों का पीछा करते थे। उनकी टीम ने कई बार गौ-तस्करों को पकड़ा और गायों को बचाया। ब्रज क्षेत्र में उनकी टीम को गौ-माता की रक्षा का मजबूत किला माना जाता था।
मौत की घटना और बवाल की वजह
बीती रात (शुक्रवार-शनिवार) कोसीकलां थाना क्षेत्र के नवीपुर गांव के पास बाबा चंद्रशेखर अपनी टीम के साथ संदिग्ध ट्रक का पीछा कर रहे थे, जिसमें गौ-तस्करी का शक था। आरोप है कि तस्करों ने ट्रक से उनकी बाइक को कुचल दिया, जिससे मौके पर ही मौत हो गई। समर्थकों का दावा है कि यह सुनियोजित हत्या थी।
मौत की खबर फैलते ही शनिवार सुबह हजारों गौरक्षक और स्थानीय लोग छाता कट पर एकत्र हो गए। उन्होंने दिल्ली-आगरा हाईवे जाम कर दिया। पथराव से
पुलिस की गाड़ियां क्षतिग्रस्त हुईं। पुलिस ने लाठीचार्ज और आंसू गैस का इस्तेमाल किया।
हालात बेकाबू होने पर सेना की टुकड़ी ने मोर्चा संभाला।
पुलिस ने कुछ आरोपियों को हिरासत में लिया, लेकिन भीड़ का गुस्सा ठंडा नहीं हुआ।
पुलिस का कहना है कि घने कोहरे के कारण ट्रक ने टक्कर मारी और
यह दुर्घटना थी, गौ-तस्करी से जुड़ा नहीं।
लेकिन समर्थक इसे हत्या मान रहे हैं और मांग कर रहे हैं कि
बाबा को गौ-पुत्र शहीद का दर्जा दिया जाए, दोषियों पर सख्त कार्रवाई हो।
ब्रज में क्यों इतना आक्रोश?
फरसा वाले बाबा ब्रज की आस्था और गौ-संस्कृति के प्रतीक थे। उनकी मौत ने गौरक्षा
आंदोलन को झटका दिया। ईद के दिन यह घटना होने से तनाव और बढ़ गया।
यह मामला गौ-रक्षा और तस्करी के बीच लंबे विवाद को फिर उजागर करता है।
CM योगी आदित्यनाथ ने मामले का संज्ञान लिया है और सख्त कार्रवाई के आदेश दिए हैं।
फरसा वाले बाबा की मौत ब्रज के गौरक्षकों के लिए बड़ा नुकसान है।
उनकी टीम और भक्त अब न्याय की लड़ाई लड़ रहे हैं।
