UP: भाजपा कार्यालय में हंगामा, महिला ने नेताजी का कॉलर पकड़ा, धक्का-मुक्की और गाली-गलौज से मचा बवाल

उत्तर प्रदेश के Maharajganj जिले से एक चौंकाने वाली घटना सामने आई है, जहां भाजपा कार्यालय में आयोजित स्वागत समारोह अचानक हंगामे में बदल गया। पार्टी के ही दो पक्षों के बीच विवाद इतना बढ़ गया कि एक महिला ने नेताजी का कॉलर पकड़ लिया और पैसे की मांग करने लगी। देखते ही देखते माहौल गर्म हो गया और धक्का-मुक्की के साथ गाली-गलौज शुरू हो गई।

क्या है पूरा मामला

घटना महराजगंज के नौतनवा स्थित Bharatiya Janata Party कार्यालय की है, जहां मनोनीत सभासदों और मंडल अध्यक्षों के स्वागत के लिए कार्यक्रम आयोजित किया गया था। समारोह के दौरान अचानक एक महिला निर्मला वर्मा वहां पहुंचीं और मनोनीत सभासद बृजेंद्र श्रीवास्तव से बकाया रुपये मांगने लगीं।

कॉलर पकड़कर मांगे पैसे

प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, महिला ने अचानक नेताजी का कॉलर पकड़ लिया और उनसे पैसे लौटाने की मांग करने लगीं। इस अप्रत्याशित घटना से वहां मौजूद लोग हैरान रह गए और माहौल अचानक तनावपूर्ण हो गया।

धक्का-मुक्की और गाली-गलौज

कुछ ही देर में विवाद इतना बढ़ गया कि दोनों पक्षों के बीच जमकर बहस और गाली-गलौज शुरू हो गई। स्थिति हाथापाई तक पहुंच गई और कार्यक्रम स्थल पर अफरा-तफरी मच गई। पार्टी के अन्य पदाधिकारियों ने बीच-बचाव करने की कोशिश की, लेकिन मामला शांत नहीं हुआ।

पुलिस को बुलानी पड़ी

स्थिति बिगड़ते देख आयोजकों ने तुरंत पुलिस को सूचना दी। पुलिस मौके पर पहुंची और किसी तरह मामले को शांत कराया। इसके बाद दोनों पक्षों को समझाकर स्थिति को नियंत्रण में लिया गया।

राजनीतिक माहौल में हलचल

इस घटना के बाद स्थानीय राजनीतिक माहौल में हलचल मच गई है। एक ही पार्टी के पदाधिकारियों के बीच

इस तरह का विवाद सामने आने से पार्टी की छवि पर भी असर पड़ने की चर्चा हो रही है।

लेनदेन बना विवाद की वजह

प्रारंभिक जानकारी के अनुसार, विवाद की जड़ रुपये के लेनदेन को बताया जा रहा है। हालांकि इस मामले की पूरी

सच्चाई जांच के बाद ही सामने आएगी। फिलहाल दोनों पक्ष अपने-अपने आरोपों पर कायम हैं।

सोशल मीडिया पर वायरल

घटना के बाद इसका वीडियो और जानकारी सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रही है।

लोग इस पर तरह-तरह की प्रतिक्रियाएं दे रहे हैं और मामले को लेकर चर्चा जारी है।

महराजगंज भाजपा कार्यालय में हुआ यह विवाद एक बड़ा सवाल खड़ा करता है कि

राजनीतिक संगठनों के भीतर अनुशासन और आपसी समन्वय कितना जरूरी है।

इस घटना ने यह भी दिखाया कि छोटे विवाद कैसे बड़े बवाल में बदल सकते हैं।

प्रशासन और पार्टी दोनों के लिए यह एक चेतावनी है कि

भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए ठोस कदम उठाए जाएं।