🏥 उत्तर प्रदेश के Gorakhpur स्थित AIIMS Gorakhpur ने चिकित्सा क्षेत्र में एक ऐतिहासिक उपलब्धि हासिल की है। पहली बार यहां लैप्रोस्कोपिक तकनीक से पीयूजे ऑब्स्ट्रक्शन (PUJ Obstruction) की जटिल सर्जरी सफलतापूर्वक की गई है। यह उपलब्धि न केवल संस्थान की विशेषज्ञता को दर्शाती है, बल्कि पूर्वी उत्तर प्रदेश के मरीजों के लिए अत्याधुनिक इलाज की नई उम्मीद भी जगाती है।
क्या है पीयूजे ऑब्स्ट्रक्शन
पीयूजे ऑब्स्ट्रक्शन एक गंभीर किडनी संबंधी बीमारी है, जिसमें किडनी के रीनल पेल्विस से मूत्रवाहिनी (यूरेटर) तक मूत्र का प्रवाह बाधित हो जाता है। इस स्थिति में किडनी में सूजन यानी हाइड्रोनेफ्रोसिस हो जाती है और समय पर इलाज न मिलने पर किडनी फेल होने का खतरा भी बढ़ जाता है। यह बीमारी लंबे समय तक बिना लक्षण के भी रह सकती है, जिससे इसका खतरा और बढ़ जाता है।
मरीज की स्थिति और जांच
46 वर्षीय महिला मरीज पेट दर्द की शिकायत के साथ अस्पताल पहुंचीं। डॉक्टरों द्वारा किए गए सीटी स्कैन और डीटीपीए स्कैन में यह सामने आया कि उनकी दाहिनी किडनी केवल 20% ही काम कर रही थी। यह स्थिति बेहद गंभीर थी और तुरंत सर्जिकल हस्तक्षेप की आवश्यकता थी, ताकि किडनी को और नुकसान से बचाया जा सके।
सर्जरी के दौरान जटिल चुनौती
ऑपरेशन के दौरान डॉक्टरों को एक बड़ी चुनौती का सामना करना पड़ा। जांच में पता चला कि एक असामान्य रक्त वाहिका पीयूजे के ऊपर से गुजर रही थी, जो मूत्र के प्रवाह में बाधा डाल रही थी। इस रक्त वाहिका को हटाना संभव नहीं था, इसलिए सर्जरी को अत्यंत सावधानी और तकनीकी दक्षता के साथ अंजाम देना जरूरी था।
लैप्रोस्कोपिक तकनीक से सफल सर्जरी
डॉक्टरों की टीम ने अत्याधुनिक लैप्रोस्कोपिक तकनीक का उपयोग करते हुए पीयूजे को काटकर उसे नई स्थिति में पुनः जोड़ दिया। इस प्रक्रिया से मूत्र का प्रवाह सामान्य हो गया। खास बात यह रही कि पूरी सर्जरी बिना बड़े चीरे के की गई, जिससे मरीज को कम दर्द और जल्दी रिकवरी का लाभ मिला।
लैप्रोस्कोपिक सर्जरी के फायदे
लैप्रोस्कोपिक तकनीक आधुनिक सर्जरी की दिशा में एक बड़ा कदम है। इसमें मरीज को कम दर्द होता है, संक्रमण का खतरा कम रहता है और अस्पताल में रहने का समय भी कम होता है। इसके अलावा शरीर पर बड़े निशान नहीं पड़ते, जिससे मरीज जल्दी सामान्य जीवन में लौट सकता है।
डॉक्टरों की टीम का योगदान
इस जटिल सर्जरी को डॉ. धर्मेन्द्र कुमार पिपल के नेतृत्व में सफलतापूर्वक अंजाम दिया गया। टीम में
डॉ. सलमान खान और डॉ. एलन फिलिप का भी महत्वपूर्ण योगदान रहा। साथ ही एनेस्थीसिया टीम और
नर्सिंग स्टाफ ने भी इस ऑपरेशन को सफल बनाने में अहम भूमिका निभाई।
संस्थान की प्रतिक्रिया
एम्स गोरखपुर की कार्यकारी निदेशक मेजर जनरल (सेवानिवृत्त) प्रो. डॉ. विभा दत्ता ने
इस उपलब्धि पर पूरी टीम को बधाई दी। उन्होंने कहा कि संस्थान लगातार
आधुनिक चिकित्सा तकनीकों को अपनाकर मरीजों को बेहतर सेवाएं देने के लिए प्रतिबद्ध है।
पूर्वी उत्तर प्रदेश के लिए नई उम्मीद
यह सफलता पूर्वी उत्तर प्रदेश के लिए एक बड़ी राहत और उम्मीद की किरण है।
अब मरीजों को जटिल सर्जरी के लिए बड़े महानगरों का रुख नहीं करना पड़ेगा। गोरखपुर में ही
उच्च स्तरीय इलाज की सुविधा मिलने से समय, पैसा और जोखिम—तीनों की बचत होगी।
एम्स गोरखपुर की यह उपलब्धि चिकित्सा क्षेत्र में एक मील का पत्थर साबित हो सकती है।
लैप्रोस्कोपिक तकनीक से की गई इस जटिल किडनी सर्जरी ने यह साबित कर दिया है कि
अब छोटे शहरों में भी बड़े स्तर की चिकित्सा सुविधाएं उपलब्ध हैं।
यह न केवल स्वास्थ्य सेवाओं के विस्तार का संकेत है
बल्कि लाखों मरीजों के लिए नई जिंदगी की उम्मीद भी है।
