गोरखपुर हादसा
गोरखपुर के बांसगांव थाना क्षेत्र के करहल गांव में शुक्रवार को एक दर्दनाक सड़क हादसे ने पूरे इलाके को स्तब्ध कर दिया। 13-14 वर्षीय किशोर आयुष साहनी पिछले तीन दिनों से घरेलू गैस सिलिंडर लेने के लिए सुदामा गैस एजेंसी के चक्कर लगा रहा था। शुक्रवार दोपहर करीब 2 बजे वह फिर एजेंसी पहुंचा, लेकिन OTP जांच के दौरान मोबाइल घर भूल गया। मोबाइल लेने घर लौटते समय एजेंसी से करीब 1 किमी दूर अज्ञात वाहन ने उसे टक्कर मार दी। गंभीर रूप से घायल आयुष को बांसगांव सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया।
तीन दिनों से सिलिंडर के लिए भटक रहा था आयुष
मृतक आयुष साहनी पुत्र बिहारी साहनी, करहल गांव निवासी था। उसके दादा चौथी साहनी ने बताया कि बुधवार को गैस की गाड़ी आई थी, लेकिन लंबी लाइन और भीड़ के कारण आयुष को सिलेंडर नहीं मिल सका। बृहस्पतिवार को गाड़ी नहीं आई, जिससे परिवार में गैस खत्म हो गई। शुक्रवार को आयुष फिर एजेंसी गया। OTP वेरिफिकेशन के दौरान मोबाइल घर भूल गया, इसलिए वापस लौटा। इसी दौरान रास्ते में तेज रफ्तार अज्ञात वाहन (संभावित कार या बाइक) ने उसे चपेट में ले लिया। टक्कर इतनी जोरदार थी कि आयुष कुछ फीट दूर जा गिरा, सिर और हाथ में गंभीर चोटें आईं। आसपास के लोगों ने उसे अस्पताल पहुंचाया, लेकिन बच नहीं सका।
परिवार में कोहराम, छोटा किशोर अनाथ
आयुष के परिवार में मां, पिता बिहारी साहनी, भाई-बहन हैं। हादसे की खबर सुनकर पूरा गांव सदमे में है। परिवार का कहना है कि गैस की किल्लत और लंबी लाइन के कारण आयुष बार-बार एजेंसी जा रहा था। यह घटना घरेलू गैस उपलब्धता की समस्या को उजागर करती है, जहां ग्रामीण इलाकों में लोग दिनों तक लाइन में लगे रहते हैं।
पुलिस जांच और कार्रवाई
सूचना पर बांसगांव थाना पुलिस मौके पर पहुंची। थानाध्यक्ष ने घटनास्थल का निरीक्षण किया और शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भिजवाया। अज्ञात वाहन की तलाश में जांच शुरू है। आसपास के CCTV और गवाहों से पूछताछ की जा रही है। पुलिस ने कहा कि हिट एंड रन केस दर्ज कर कार्रवाई की जाएगी।
गैस किल्लत और सड़क सुरक्षा पर सवाल
यह हादसा गोरखपुर में गैस सिलिंडर की कमी और ब्लैक मार्केटिंग की समस्या को सामने लाता है।
पिछले दिनों कई जगहों पर
लाइन और कालाबाजारी की शिकायतें आई हैं। साथ ही ग्रामीण सड़कों पर
तेज रफ्तार वाहनों से हादसे आम हो गए हैं।
विशेषज्ञों का कहना है कि गैस वितरण व्यवस्था सुधारने और सड़क सुरक्षा बढ़ाने की जरूरत है।
आयुष साहनी की मौत सिर्फ एक हादसा नहीं, बल्कि गैस किल्लत और लापरवाही का दर्दनाक नतीजा है।
तीन दिनों की जद्दोजहद में एक मासूम किशोर की जान चली गई। परिवार में शोक है,
जबकि प्रशासन को गैस उपलब्धता और सड़क सुरक्षा पर ध्यान देना होगा।
ऐसे हादसों को रोकने के लिए जागरूकता और सख्ती जरूरी है।
