AIMIM प्रदेश अध्यक्ष का गुस्सा: CO की चेतावनी पर तीखा प्रहार। उत्तर प्रदेश में हाल ही में एक पुलिस अधिकारी की नमाजियों को दी गई चेतावनी ने राजनीतिक हलचल मचा दी है। सीओ (सर्किल ऑफिसर) ने नमाज के दौरान सड़क जाम करने वालों को “सड़क छाप गुंडे जैसी भाषा” में चेतावनी दी, जिसके बाद AIMIM (ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन) के प्रदेश अध्यक्ष ने जमकर भड़क उठे। इस बयान पर इमरान प्रतापगढ़ी ने भी सोशल मीडिया पर रिएक्ट करते हुए सरकार को निशाने पर लिया। यह घटना महाराष्ट्र या यूपी के किसी जिले में घटी, जहां नमाजियों का सड़क पर जमा होना ट्रैफिक जाम का कारण बना। CO की वीडियो वायरल होते ही विपक्षी दलों ने इसे सांप्रदायिक रंग देने की कोशिश की। AIMIM प्रदेश अध्यक्ष ने कहा, “यह गुंडागर्दी की भाषा है, पुलिस को ट्रेनिंग की जरूरत है।
CO की चेतावनी का पूरा वीडियो: क्या कहा था अधिकारी ने?
वीडियो में CO साफ कहते नजर आ रहे हैं, “नमाजियों को संभल के रहना होगा, सड़क छाप गुंडों जैसी हरकतें बर्दाश्त नहीं।” यह चेतावनी तब दी गई जब नमाज के बाद सड़क पर अवैध अतिक्रमण और जाम की शिकायतें मिलीं। स्थानीय लोगों का कहना है कि रोजाना नमाज के नाम पर सड़कें ब्लॉक हो जाती हैं, जिससे एम्बुलेंस और अन्य वाहनों को परेशानी होती है। पुलिस का यह स्टैंड ट्रैफिक नियमों को सख्ती से लागू करने का था, लेकिन विपक्ष ने इसे मुस्लिम विरोधी करार दिया। AIMIM प्रदेश अध्यक्ष ने ट्वीट कर कहा, “पुलिस की यह भाषा असंवैधानिक है, मुसलमानों को टारगेट किया जा रहा।” इमरान प्रतापगढ़ी ने रिएक्ट करते हुए लिखा, “क्या यही है नई भारत की पुलिस? सड़क छाप भाषा से कानून व्यवस्था सुधरेगी?”
इमरान प्रतापगढ़ी का रिएक्शन: सोशल मीडिया पर बवाल
कांग्रेस सांसद इमरान प्रतापगढ़ी, जो हमेशा सामाजिक मुद्दों पर मुखर रहते हैं, ने इस पर तुरंत रिएक्ट किया। उनके ट्वीट में लिखा, “CO साहब, गुंडों जैसी भाषा छोड़िए। नमाज का सम्मान करें, सड़क का नियम भी।” AIMIM प्रदेश अध्यक्ष ने इसे BJP सरकार का षड्यंत्र बताते हुए कहा कि यूपी में मुसलमानों को दबाया जा रहा है। इस घटना ने राष्ट्रीय स्तर पर बहस छेड़ दी है—क्या पुलिस का सख्त रवैया सही है या यह सांप्रदायिकता? विशेषज्ञों का मानना है कि ट्रैफिक नियम सभी पर समान लागू होने चाहिए, चाहे किसी भी धर्म के हों। विपक्षी नेता जैसे असदुद्दीन ओवैसी भी इस पर चुप नहीं रहे।
राजनीतिक प्रभाव: यूपी चुनावों से पहले विवाद
यह विवाद यूपी विधानसभा चुनावों से ठीक पहले आया है, जहां मुस्लिम वोट बैंक अहम है। AIMIM प्रदेश अध्यक्ष का यह रुख पार्टी को मजबूत करने का प्रयास लगता है। पुलिस ने स्पष्ट किया कि चेतावनी सभी अवैध जाम करने वालों के लिए थी, न कि किसी समुदाय के खिलाफ। फिर भी, सोशल मीडिया पर बहस तेज है। क्या यह ट्रैफिक मैनेजमेंट का मुद्दा है या राजनीतिक ड्रामा? स्थानीय प्रशासन ने जांच के आदेश दिए हैं।
