शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद
शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद का राजनीतिक दलों पर निशाना: सपा-कांग्रेस में चतुरता नहीं
उत्तर प्रदेश में धार्मिक और राजनीतिक हलचल तेज हो गई है। ज्योतिषपीठ के शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ने सपा और कांग्रेस पर तीखा हमला किया है। उन्होंने अमर उजाला से विशेष बातचीत में कहा कि सपा, कांग्रेस या कोई भी राजनीतिक दल इतना चतुर नहीं है कि मुझे चुनाव में इस्तेमाल कर सके। हम किसी पार्टी के लिए नहीं, बल्कि गंगा और गोरक्षा जैसे मुद्दों के लिए काम कर रहे हैं, जो पहले से भाजपा के भी प्रमुख विषय रहे हैं। चाहे तो भाजपा भी मेरे समर्थन में आ सकती है। चुनाव में किसी की चालाकी से मेरा इस्तेमाल हो जाना संभव नहीं है। ये बातें उन्होंने बृहस्पतिवार को अमर उजाला से खास बातचीत में कहीं।
शंकराचार्य ने कांग्रेस और सपा के साथ बन रहे उनके समीकरणों पर टिप्पणी की। उन्होंने साफ किया कि उनका फोकस धार्मिक और सामाजिक मुद्दों पर है, न कि किसी राजनीतिक दल की चुनावी रणनीति पर। यह बयान ऐसे समय आया है जब लोकसभा चुनाव की सरगर्मियां तेज हैं और विभिन्न दल धार्मिक नेताओं के समर्थन की तलाश में हैं।
लखनऊ गोशाला में गो पूजन और गोरक्षा धर्मयुद्ध का ऐलान
शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ने लखनऊ के हासेमऊ स्थित गोशाला में बृहस्पतिवार को गो पूजन कर गोरक्षा के लिए धर्मयुद्ध का ऐलान किया। इसी के साथ उन्होंने गो प्रतिष्ठा जनजागरण अभियान की शुरुआत करते हुए चतुरंगिणी सेना बनाने की घोषणा की। शंकराचार्य ने ऋग्वेद के पद अहम् हनन् वृत्ते गविष्ठे का अनुयायियों से सामूहिक जाप कराया। तर्जनी उंगली उठाकर भगवान कृष्ण की चक्र मुद्रा का अभ्यास भी कराया।
यह कार्यक्रम गोरक्षा के प्रति उनके समर्पण को दर्शाता है। गोशाला में बड़ी संख्या में अनुयायी और स्थानीय लोग जमा हुए थे। शंकराचार्य ने कहा कि गोरक्षा हिंदू धर्म का मूल है और इसके लिए एकजुट होकर लड़ाई लड़नी होगी। चतुरंगिणी सेना बनाने की घोषणा से संकेत मिलता है कि वे एक संगठित अभियान चलाने जा रहे हैं, जिसमें विभिन्न वर्गों को शामिल किया जाएगा।
राजनीतिक समीकरणों पर शंकराचार्य की स्पष्ट राय
शंकराचार्य ने बातचीत में सपा और कांग्रेस के साथ अपने संबंधों पर स्पष्ट किया। उन्होंने कहा कि कोई भी दल उन्हें चुनावी मोहरे के रूप में इस्तेमाल नहीं कर सकता। उनका काम गंगा की स्वच्छता और गोरक्षा जैसे राष्ट्रीय मुद्दों पर केंद्रित है, जो भाजपा के एजेंडे से भी मेल खाते हैं। उन्होंने भाजपा को आमंत्रित करते हुए कहा कि अगर वे चाहें तो उनके अभियान में शामिल हो सकती है।
यह बयान राजनीतिक गलियारों में चर्चा का विषय बन गया है। विशेषज्ञों का मानना है कि शंकराचार्य का
यह स्टैंड चुनावी मौसम में धार्मिक वोटों को प्रभावित कर सकता है।
उत्तर प्रदेश में जहां हिंदुत्व के मुद्दे प्रमुख हैं,
वहां गोरक्षा और गंगा जैसे विषयों पर उनका अभियान महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।
गोरक्षा अभियान और चतुरंगिणी सेना की भूमिका
*शंकराचार्य द्वारा घोषित चतुरंगिणी सेना गोरक्षा के लिए एक नई पहल है। यह सेना चार अंगों पर आधारित होगी,
जिसमें युवा, महिलाएं, किसान और धार्मिक कार्यकर्ता शामिल होंगे।
अभियान का उद्देश्य पूरे देश में गो प्रतिष्ठा को बढ़ावा देना है।
ऋग्वेद जाप और चक्र मुद्रा अभ्यास से अनुयायियों में उत्साह जगाया गया।
शंकराचार्य ने कहा कि गोरक्षा धर्मयुद्ध है और इसमें सभी को भाग लेना चाहिए। यह अभियान
उत्तर प्रदेश से शुरू होकर अन्य राज्यों तक फैलेगा। लखनऊ गोशाला कार्यक्रम में उन्होंने गो पूजन कर संदेश दिया कि
गाय हिंदू संस्कृति का प्रतीक है और इसकी रक्षा आवश्यक है।
शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती का यह बयान और अभियान राजनीति और धर्म के बीच की कड़ी को मजबूत कर रहा है।
सपा-कांग्रेस को चेतावनी और भाजपा को आमंत्रण से साफ है कि वे मुद्दों पर आधारित समर्थन चाहते हैं।
गोरक्षा धर्मयुद्ध उत्तर प्रदेश की राजनीति में नया मोड़ ला सकता है।
