कच्चे माल की कीमतों में उछाल,
युद्ध ने बढ़ाई बोतलबंद पानी की कीमतें
पश्चिम एशिया में ईरान-अमेरिका के बीच बढ़ते तनाव और युद्ध की स्थिति ने भारत की अर्थव्यवस्था पर सीधा असर डाला है। खासकर बोतलबंद पानी के बाजार पर गहरा संकट मंडरा रहा है। उत्तर प्रदेश में बोतलबंद पानी का बाजार 5000 करोड़ रुपये से अधिक का है, और यहां कीमतों में तेजी से इजाफा हो रहा है। फेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया पैकेज्ड ड्रिंकिंग वॉटर एसोसिएशन और उत्तर प्रदेश पैकेज्ड वॉटर एसोसिएशन ने आधिकारिक तौर पर दाम बढ़ाने की घोषणा की है।
12 बोतलों के डिब्बे में न्यूनतम 10 रुपये की बढ़ोतरी
संगठनों के अनुसार, अब 12 बोतलों वाले एक डिब्बे की कीमत में कम से कम 10 रुपये की वृद्धि की गई है। छोटी-छोटी कंपनियां और लोकल ब्रांड्स भी इसी रास्ते पर चल रहे हैं। यदि युद्ध की स्थिति लंबी खिंची तो अगले 7 दिनों में यह महंगाई दोगुनी हो सकती है। उपभोक्ताओं को अब एक लीटर बोतलबंद पानी के लिए पहले से ज्यादा पैसे चुकाने पड़ रहे हैं।
कच्चे माल की लागत में भारी उछाल
युद्ध के कारण वैश्विक सप्लाई चेन प्रभावित हुई है, जिससे बोतलों के लिए इस्तेमाल होने वाले कच्चे माल की कीमतें आसमान छू रही हैं। मुख्य कारण पीईटी रेजिन (PET Resin) की कीमतों में आई तेजी है। संगठनों के मुताबिक, पीईटी रेजिन की कीमत प्रति किलो करीब 25.75 रुपये बढ़ गई है। इससे बोतलों और प्रीफॉर्म (Preform) की उत्पादन लागत सीधे प्रभावित हुई है।
इसके अलावा अन्य पॉलिमर भी महंगे हुए हैं:
- हाई-डेंसिटी पॉलीइथिलीन (HDPE) में 15,000 रुपये प्रति मीट्रिक टन की बढ़ोतरी
- लो-डेंसिटी पॉलीइथिलीन (LDPE) में 17,000 रुपये प्रति मीट्रिक टन की वृद्धि
6 मार्च से ही विभिन्न पॉलिमर की कीमतों में बड़ा इजाफा दर्ज किया गया है। परिवहन लागत में भी वृद्धि हुई है, क्योंकि ईंधन की कीमतें बढ़ रही हैं।
उत्तर प्रदेश में बाजार का आकार और प्रभाव
उत्तर प्रदेश देश के सबसे बड़े बोतलबंद पानी बाजारों में से एक है। यहां लाखों लीटर पानी रोजाना पैकेज्ड रूप में बिकता है। छोटे-मध्यम उद्यम, होटल, रेस्तरां, ट्रेन, बस स्टैंड और ऑफिस में बोतलबंद पानी की मांग बहुत ज्यादा है। कीमत बढ़ने से आम उपभोक्ता के साथ-साथ होटल-रेस्तरां और ट्रैवल इंडस्ट्री पर भी बोझ पड़ेगा।
कंपनियों को झटका, उपभोक्ताओं पर असर
कंपनियां कह रही हैं कि उत्पादन लागत बढ़ने के कारण दाम बढ़ाना मजबूरी हो गया है।
अगर युद्ध जारी रहा तो कच्चे माल की कमी और भी गंभीर हो सकती है, जिससे सप्लाई प्रभावित होगी।
विशेषज्ञों का मानना है कि यह महंगाई सिर्फ पानी तक सीमित नहीं रहेगी,
बल्कि पैकेज्ड फूड, ड्रिंक्स और अन्य प्लास्टिक उत्पादों पर भी असर पड़ेगा।
आगे क्या?
युद्ध की स्थिति अगर जल्द खत्म नहीं हुई तो बोतलबंद पानी की कीमतें और बढ़ सकती हैं।
उपभोक्ताओं को सलाह दी जा रही है कि
जहां संभव हो, घरेलू फिल्टर या उबला पानी इस्तेमाल करें। सरकार और संगठनों से उम्मीद है कि
जल्द वैकल्पिक सप्लाई चेन या सब्सिडी जैसे कदम उठाए जाएंगे।
यह घटना एक बार फिर भारत की ऊर्जा और कच्चे माल पर निर्भरता को उजागर करती है।
युद्ध का असर सिर्फ तेल या गैस तक सीमित नहीं, बल्कि रोजमर्रा की चीजों तक पहुंच गया है।
