Israel-Iran War के कारण तेल-गैस संकट
Israel-Iran War का मेरठ पर आर्थिक प्रभाव
अमेरिका-इस्राइल और ईरान के बीच चल रहे युद्ध ने वैश्विक स्तर पर तेल और गैस की आपूर्ति को बुरी तरह प्रभावित किया है। इस संकट का असर अब भारत के औद्योगिक शहर मेरठ तक पहुंच गया है। जिले में लगभग 50 हजार उद्योगों पर इसका सीधा प्रभाव पड़ा है। इंडियन इंडस्ट्रीज एसोसिएशन (आईआईए) के अनुसार, अब तक 8 हजार से अधिक उद्योगों ने अपना उत्पादन घटा दिया है, जबकि 50 यूनिटें पूरी तरह बंद हो चुकी हैं। यह संकट न केवल उद्योगों को प्रभावित कर रहा है, बल्कि होटल, रेस्तरां और विवाह जैसे सामाजिक आयोजनों पर भी चिंता की लकीरें खींच रहा है। तेल-गैस की कमी से कच्चे माल के दाम आसमान छू रहे हैं, जिससे मेरठ के एमएसएमई (माइक्रो, स्मॉल एंड मीडियम एंटरप्राइजेज) सेक्टर में गहरा संकट उत्पन्न हो गया है।
तेल-गैस संकट का उद्योगों पर सीधा असर
युद्ध के कारण मध्य पूर्व से तेल और गैस की सप्लाई चेन बाधित हो गई है, जिसका खामियाजा मेरठ के उद्योगों को भुगतना पड़ रहा है। परतापुर, ध्यानचंद नगर और अन्य औद्योगिक क्षेत्रों में स्थित यूनिटें अब उत्पादन को बनाए रखने में असमर्थ हैं। आईआईए के वाइस चेयरमैन राजीव अग्रवाल ने इसे एक बड़ी चुनौती बताया है। उनके अनुसार, गैस और प्लास्टिक की किल्लत से कई यूनिटें बंद होने की कगार पर हैं। प्लास्टिक चिप्स की सप्लाई पूरी तरह ठप हो गई है, जिसके कारण कारखाने नहीं चल पा रहे। कॉमर्शियल सिलिंडर के दामों में भारी वृद्धि ने स्थिति को और जटिल बना दिया है। उद्योगों में ऊर्जा की कमी से उत्पादन घटाने के अलावा कोई विकल्प नहीं बचा है, जिससे हजारों श्रमिकों की नौकरियां खतरे में पड़ गई हैं।
एमएसएमई सेक्टर में बढ़ता संकट और उत्पादन में कमी
मेरठ का एमएसएमई सेक्टर, जो स्पोर्ट्स गुड्स, टेक्सटाइल और प्लास्टिक उद्योगों के लिए जाना जाता है, इस संकट से सबसे ज्यादा प्रभावित हुआ है। आईआईए उद्योग एसोसिएशन के दावे के मुताबिक, 8 हजार से अधिक उद्योगों ने अपना उत्पादन 20-50 प्रतिशत तक घटा दिया है। कच्चे माल के दाम बढ़ने से लागत में इजाफा हुआ है, जिसे बाजार में पास करना मुश्किल हो रहा है। परिणामस्वरूप, कई छोटे उद्यमी घाटे में चल रहे हैं। 50 यूनिटों के बंद होने से सैकड़ों परिवार प्रभावित हुए हैं। राजीव अग्रवाल ने कहा कि युद्ध से उपजे हालात ने पूरे औद्योगिक इकोसिस्टम को हिलाकर रख दिया है। यदि जल्द ही सप्लाई नॉर्मल नहीं हुई, तो और अधिक यूनिटें बंद हो सकती हैं, जो स्थानीय अर्थव्यवस्था के लिए घातक साबित होगा।
होटल, रेस्तरां और सामाजिक आयोजनों पर प्रभाव
संकट का असर केवल उद्योगों तक सीमित नहीं है। होटल और रेस्तरां व्यवसाय भी गैस की किल्लत से जूझ रहे हैं। कॉमर्शियल सिलिंडरों की कमी और महंगाई ने इनकी लागत बढ़ा दी है, जिससे मेनू की कीमतें बढ़ानी पड़ रही हैं। विवाह और अन्य आयोजनों में कैटरिंग सेवाएं प्रभावित हो रही हैं, क्योंकि गैस की उपलब्धता अनिश्चित है। लोगों के माथे पर चिंता की लकीरें साफ दिखाई दे रही हैं। आईआईए के पदाधिकारियों का मानना है कि यदि सरकार हस्तक्षेप नहीं करती, तो यह संकट और गहरा सकता है। वैकल्पिक ऊर्जा स्रोतों की तलाश और सब्सिडी की मांग उठ रही है, लेकिन फिलहाल कोई ठोस समाधान नजर नहीं आ रहा।
चुनौतियों से निपटने की आवश्यकता
Israel-Iran War से उत्पन्न तेल-गैस संकट ने मेरठ के उद्योगों को
गहरे संकट में डाल दिया है। 50 यूनिट बंद और
8 हजार से अधिक में उत्पादन घटने से अर्थव्यवस्था पर लंबा असर पड़ सकता है। आईआईए वाइस चेयरमैन
राजीव अग्रवाल ने सरकार से तत्काल राहत पैकेज की मांग की है। कच्चे माल के
दामों को नियंत्रित करने और सप्लाई चेन को मजबूत बनाने की जरूरत है। यदि समय रहते
कदम नहीं उठाए गए, तो मेरठ का औद्योगिक वैभव कमजोर पड़ सकता है। स्थानीय उद्यमियों को एकजुट होकर
वैकल्पिक रणनीतियां अपनानी होंगी, ताकि इस वैश्विक संकट से उबरा जा सके।
