ईरान-इजरायल युद्ध
ईरान-इजरायल युद्ध का असर उद्योगों पर
अंतरराष्ट्रीय स्तर पर जारी ईरान-इजरायल तनाव का असर अब भारत के उद्योगों पर भी दिखाई देने लगा है। राजधानी लखनऊ में कॉमर्शियल गैस सिलिंडर की आपूर्ति बाधित होने से करीब 800 से 1000 फैक्टरियां बंद होने की कगार पर पहुंच गई हैं।
गैस की कमी के कारण कई उद्योगों में उत्पादन प्रभावित हो गया है। जिन फैक्टरियों में मशीनों को चलाने के लिए हीटिंग प्रक्रिया की जरूरत होती है, वहां काम लगभग ठप होने की स्थिति में पहुंच गया है।
गैस आपूर्ति रुकने से बढ़ी परेशानी
कॉमर्शियल गैस सिलिंडर की आपूर्ति अचानक रुक जाने से उद्योग जगत में चिंता बढ़ गई है। कई फैक्टरियों के पास केवल एक-दो दिन का ही गैस स्टॉक बचा है। यदि जल्द ही आपूर्ति सामान्य नहीं हुई तो कई इकाइयों को मजबूरन उत्पादन बंद करना पड़ सकता है।
इस संकट से सैकड़ों उद्यमियों के साथ-साथ हजारों कामगारों की आजीविका पर भी खतरा मंडराने लगा है।
कार्टन बॉक्स और पैकेजिंग इंडस्ट्री पर सबसे ज्यादा असर
लखनऊ में कार्टन बॉक्स और पैकेजिंग से जुड़ी करीब 45 से 50 फैक्टरियां काम कर रही हैं। इन फैक्टरियों में गत्ते की नालियां बनाने के लिए रोलर मशीन का उपयोग किया जाता है।
रोलर को गर्म करने के लिए गैस की आवश्यकता होती है। मशीन के अंदर लगे बर्नर जलने के बाद ही रोलर गर्म होता है और उसी प्रक्रिया के जरिए गत्ते की नालियां तैयार की जाती हैं। गैस न मिलने के कारण यह पूरी प्रक्रिया प्रभावित हो गई है।
यदि गैस आपूर्ति जल्द शुरू नहीं हुई तो इन फैक्टरियों को उत्पादन बंद करना पड़ सकता है।
स्नैक्स और फूड इंडस्ट्री भी प्रभावित
कॉमर्शियल गैस की कमी का असर स्नैक्स और फूड इंडस्ट्री पर भी साफ नजर आ रहा है। नमकीन, बिस्किट,
चिप्स और अन्य खाद्य उत्पाद बनाने वाली कंपनियां गैस पर ही उत्पादों को तलने और पकाने का काम करती हैं।
कॉमर्शियल किचन में बड़े स्तर पर उत्पादन के लिए लगातार गैस की जरूरत होती है।
गैस आपूर्ति बाधित होने से इन कंपनियों का उत्पादन भी प्रभावित होने लगा है।
फार्मा कंपनियों में भी बढ़ी चिंता
फार्मा सेक्टर में भी गैस की कमी बड़ी समस्या बनती जा रही है। दवा कंपनियों में सिरप और
अन्य तरल दवाओं को तैयार करने के लिए बड़े-बड़े कड़ाहों में घोल को गैस पर पकाया जाता है।
गैस न मिलने के कारण यह प्रक्रिया बाधित हो रही है, जिससे दवा निर्माण पर भी असर पड़ सकता है।
फैब्रिकेशन इंडस्ट्री पर भी पड़ा असर
फैब्रिकेशन इंडस्ट्री भी इस संकट से अछूती नहीं है। इस उद्योग में एलपीजी के साथ ऑक्सीजन
मिलाकर बिल्डिंग गैस तैयार की जाती है, जिसका उपयोग धातु काटने और वेल्डिंग जैसे कामों में होता है।
लेकिन गैस की कमी के कारण यह प्रक्रिया भी प्रभावित हो गई है।
इससे फैब्रिकेशन से जुड़े कामों में रुकावट आने लगी है।
हजारों कामगारों की रोजी-रोटी पर संकट
यदि यह स्थिति लंबे समय तक बनी रहती है तो इसका असर हजारों कामगारों की आजीविका पर पड़ सकता है।
उद्योगों के बंद होने की स्थिति में करीब 50 हजार से अधिक मजदूरों के सामने रोजगार का संकट खड़ा हो सकता है।
उद्यमियों का कहना है कि यदि जल्द ही गैस आपूर्ति बहाल नहीं की गई तो उन्हें उत्पादन बंद करना पड़ेगा,
जिससे आर्थिक नुकसान के साथ-साथ रोजगार पर भी बड़ा असर पड़ेगा।
ईरान-इजरायल तनाव के अप्रत्यक्ष प्रभाव के चलते गैस आपूर्ति में आई बाधा ने लखनऊ के उद्योगों के सामने गंभीर
संकट खड़ा कर दिया है। कॉमर्शियल गैस सिलिंडर की कमी से कार्टन बॉक्स, स्नैक्स, फार्मा और फैब्रिकेशन
जैसे कई उद्योग प्रभावित हो रहे हैं। यदि जल्द ही आपूर्ति सामान्य नहीं हुई तो
सैकड़ों फैक्टरियों के बंद होने और हजारों लोगों की आजीविका प्रभावित होने की आशंका बढ़ सकती है।
