गोरखपुर राजघाट पुल मरम्मत
गोरखपुर में राप्ती नदी पर स्थित राजघाट का पुराना पुल (अपस्ट्रीम पुल) अब मरम्मत के दौर में प्रवेश करने वाला है। लोक निर्माण विभाग (पीडब्ल्यूडी) ने पुल की जॉइंट और बेयरिंग बदलने का काम 15 मार्च 2026 से शुरू करने का फैसला किया है। इस दौरान करीब 40 दिनों तक ट्रैफिक डायवर्जन लागू रहेगा। पुल की मरम्मत लगभग 20 वर्ष बाद हो रही है। पहले चरण में केमिकल से दरारें भर दी गई हैं, अब मुख्य काम जॉइंट और बेयरिंग बदलने का होगा। मरम्मत पूरी होने के बाद पुल की लोड टेस्टिंग भी की जाएगी ताकि यह सुनिश्चित हो सके कि पुल अब वर्षों तक भारी यातायात सहन कर सकता है।
मरम्मत का पूरा प्लान और डायवर्जन व्यवस्था
पीडब्ल्यूडी के प्रस्ताव के अनुसार मरम्मत के दौरान पुल की सड़क की आधी चौड़ाई बंद रहेगी। इस आधी चौड़ाई से छोटे वाहन (कार, ऑटो, बाइक) गुजर सकेंगे। बड़े वाहन (ट्रक, बस, ट्रैक्टर) समानांतर बने दूसरे पुल (डाउनस्ट्रीम पुल) से होकर आवागमन करेंगे। डायवर्जन 15 मार्च से शुरू होकर अप्रैल के पहले सप्ताह तक चलेगा।
पुल पर पहले से ही केमिकल ग्राउटिंग से दरारें भर दी गई हैं। अब मुख्य काम निम्नलिखित है:
- खराब हो चुके एक्सपेंशन जॉइंट बदलना
- जर्जर बेयरिंग का पूरा रिप्लेसमेंट
- सड़क सतह की मरम्मत और स्ट्रक्चरल स्ट्रेंग्थनिंग
- अंत में लोड टेस्टिंग और सेफ्टी सर्टिफिकेशन
पीडब्ल्यूडी अधिकारियों ने बताया कि यह मरम्मत पुल की उम्र और सुरक्षा को ध्यान में रखकर की जा रही है।
61 साल पुराना पुल: इतिहास और मौजूदा स्थिति
राजघाट पुल का निर्माण वर्ष 1965 में हुआ था, यानी यह पुल अब 61 वर्ष पुराना हो चुका है। यह गोरखपुर को नौतनवा, बेलपार, खजनी और आसपास के इलाकों से जोड़ने वाला प्रमुख मार्ग है। समय के साथ पुल की कंक्रीट में दरारें आईं, जॉइंट खराब हुए और बेयरिंग जर्जर हो गईं।
पीडब्ल्यूडी की हालिया जांच में पाया गया कि पुल की संरचनात्मक मजबूती प्रभावित हो रही है। यदि समय रहते मरम्मत नहीं की जाती तो भविष्य में बड़ा हादसा हो सकता था। इसलिए 20 वर्ष बाद यह बड़ा मरम्मत कार्य शुरू किया जा रहा है।
ट्रैफिक पर असर और वैकल्पिक व्यवस्था
40 दिनों के डायवर्जन से नौतनवा, बेलपार, खजनी, चौरीचौरा और आसपास के इलाकों से आने-जाने वाले वाहनों को परेशानी होगी। पीडब्ल्यूडी ने लोगों से अपील की है कि:
- छोटे वाहन आधी खुली लेन से गुजरें
- बड़े वाहन डाउनस्ट्रीम पुल का इस्तेमाल करें
- पीक आवर्स (सुबह 7-10 और शाम 4-8) में वैकल्पिक रूट चुनें
- ओवरटेकिंग से बचें और धीमी गति से चलें
ट्रैफिक पुलिस भी डायवर्जन के दौरान सख्ती से ड्यूटी करेगी।
पुल की मरम्मत के बाद क्या होगा?
मरम्मत पूरी होने के बाद पुल की पूरी लोड टेस्टिंग की जाएगी। इसमें भारी वजन वाले वाहनों से पुल की क्षमता जांच की जाएगी। सफल टेस्टिंग के बाद पुल को पूरी तरह सुरक्षित घोषित किया जाएगा। अधिकारियों का कहना है कि मरम्मत के बाद पुल अगले कई दशकों तक बिना किसी बड़ी समस्या के यातायात संभाल सकेगा।
राजघाट पुल की यह मरम्मत गोरखपुर के लाखों लोगों के लिए जरूरी और दूरदर्शी कदम है।
40 दिन का डायवर्जन असुविधा देगा, लेकिन पुल की लंबी उम्र और
सुरक्षा के लिए यह आवश्यक है। यात्रियों से अनुरोध है कि धैर्य रखें और नियमों का पालन करें।
गोरखपुर का प्रमुख पुल जल्द ही मजबूत और सुरक्षित होकर लौटेगा।
