इस्राइल-ईरान युद्ध
इस्राइल-ईरान युद्ध का वैश्विक व्यापार पर असर
इस्राइल और ईरान के बीच बढ़ते तनाव और हालिया मिसाइल हमलों ने मध्य पूर्व के हवाई क्षेत्र को पूरी तरह अस्थिर कर दिया है। दुबई इंटरनेशनल एयरपोर्ट सहित खाड़ी देशों का एयरस्पेस अस्थायी रूप से बंद कर दिया गया है, जिससे एशिया से यूरोप, अमेरिका और मिडिल ईस्ट जाने वाले हजारों शिपमेंट प्रभावित हुए हैं। इस संकट का सबसे ज्यादा असर भारत के निर्यातकों पर पड़ रहा है, खासकर उत्तर प्रदेश के मुरादाबाद जैसे हस्तशिल्प केंद्रों पर। यहां के निर्यातक अमेरिका, जर्मनी, यूके और खाड़ी देशों में हस्तशिल्प, ब्रास आर्ट, लैंप और डेकोरेटिव आइटम्स के सैंपल भेजते हैं, जो अब दुबई एयरपोर्ट पर फंसे हुए हैं।
मुरादाबाद के 350+ सैंपल दुबई में अटके
मुरादाबाद जिले के निर्यातकों ने बताया कि पिछले 10-15 दिनों में भेजे गए करीब 350 से अधिक हस्तशिल्प सैंपल दुबई एयरपोर्ट पर फंसे पड़े हैं। ये सैंपल मुख्य रूप से अमेरिका, जर्मनी और सऊदी अरब, यूएई जैसे मिडिल ईस्ट देशों के लिए थे। सामान्य स्थिति में दुबई से ये शिपमेंट 3-5 दिनों में आगे भेज दिए जाते थे, लेकिन इस्राइल-ईरान युद्ध के कारण हवाई मार्ग बंद होने से कोरियर कंपनियां शिपमेंट रोकने पर मजबूर हैं। कई निर्यातकों ने कहा कि उनके क्लाइंट्स से ऑर्डर कैंसिल होने का खतरा बढ़ गया है, क्योंकि सैंपल समय पर नहीं पहुंच रहे।
एक प्रमुख निर्यातक एसोसिएशन के पदाधिकारी ने बताया, “हमारे पास 15-20 लाख रुपये के सैंपल फंसे हैं। अगर ये 10-15 दिन और अटके रहे तो क्लाइंट्स नए सप्लायर ढूंढ लेंगे।” मुरादाबाद में हस्तशिल्प उद्योग छोटे-मध्यम उद्यमियों पर निर्भर है, जहां सालाना करोड़ों का निर्यात होता है। इस संकट से न केवल राजस्व प्रभावित हो रहा है, बल्कि मजदूरों की रोजी-रोटी भी खतरे में पड़ गई है।
खाड़ी हवाई मार्ग क्यों महत्वपूर्ण?
भारत से यूरोप और अमेरिका जाने वाले अधिकांश एयर कार्गो दुबई, अबू धाबी या दोहा होते हैं। ये हब खाड़ी क्षेत्र में स्थित होने के कारण इस्राइल-ईरान संघर्ष से सीधे प्रभावित हुए हैं। ईरान के हवाई क्षेत्र के ऊपर से उड़ानें पहले ही सीमित थीं, लेकिन अब इजरायल के जवाबी हमलों के बाद पूरा क्षेत्र रेड जोन में आ गया है। कई एयरलाइंस ने फ्लाइट्स कैंसिल कर दी हैं या रूट बदलकर सऊदी अरब के ऊपर से ले जा रही हैं, लेकिन ये रूट लंबे और महंगे हैं।
निर्यातकों की परेशानी और वैकल्पिक उपाय
मुरादाबाद निर्यातकों ने फेडएक्स, डीएचएल और डीटीडीसी जैसी कंपनियों से संपर्क किया है, लेकिन सभी ने कहा कि फिलहाल दुबई से आगे कोई गारंटी नहीं है। कुछ निर्यातक अब मुंबई या दिल्ली से सीधे यूरोप जाने वाले रूट की तलाश कर रहे हैं, लेकिन इसमें लागत 40-50% तक बढ़ जाती है। कई छोटे व्यापारी इस अतिरिक्त खर्च को वहन नहीं कर पा रहे।
उत्तर प्रदेश सरकार और निर्यात संवर्धन परिषद से निर्यातकों ने मांग की है कि वैकल्पिक हवाई मार्गों पर
सब्सिडी या विशेष व्यवस्था की जाए। साथ ही, सरकार से अपील की गई है कि
इस संकट को देखते हुए निर्यातकों को वित्तीय सहायता या इंश्योरेंस कवर प्रदान किया जाए।
भविष्य की चुनौतियां और सबक
यह घटना भारत के निर्यात क्षेत्र के लिए एक बड़ा सबक है। मध्य पूर्व पर अत्यधिक निर्भरता
जोखिम भरी साबित हो रही है। विशेषज्ञों का कहना है कि
भारत को अब इंडोनेशिया, मलेशिया या तुर्की जैसे वैकल्पिक हब्स विकसित करने चाहिए।
साथ ही, एयर कार्गो क्षमता बढ़ाने और समुद्री मार्ग को मजबूत करने की जरूरत है।
इस्राइल-ईरान युद्ध न केवल क्षेत्रीय सुरक्षा का मुद्दा है, बल्कि वैश्विक व्यापार और अर्थव्यवस्थाओं को भी प्रभावित कर रहा है।
मुरादाबाद जैसे शहरों के निर्यातक इस संकट से जूझ रहे हैं, लेकिन उम्मीद है कि जल्द ही
एयरस्पेस खुल जाएगा और शिपमेंट्स आगे बढ़ पाएंगे। तब तक निर्यातकों को धैर्य और वैकल्पिक रणनीतियों की जरूरत है।
