9 दिनों में 1.58 करोड़ रुपये
डिजिटल अरेस्ट का शिकार बनी डॉक्टर: 9 दिनों में 1.58 करोड़ रुपये की ठगी
एक रिटायर्ड डॉक्टर मंजुला को डिजिटल अरेस्ट के नाम पर जालसाजों ने बुरी तरह लूट लिया। महज 9 दिनों में उनके बैंक खाते से 1.58 करोड़ रुपये ट्रांसफर करवा लिए गए। जालसाजों ने खुद को CBI और ED अधिकारी बताकर दबाव बनाया और झूठे केस में फंसने की धमकी दी। इस दौरान डॉक्टर ने अपनी दो फिक्स्ड डिपॉजिट (FD) भी तोड़ीं और पैसे ट्रांसफर कर दिए।
घटना की शुरुआत 20 फरवरी को हुई, जब डॉ. मंजुला मुख्य शाखा में पहुंचीं। उन्होंने 20 लाख और 25 लाख रुपये की दो FD तुड़वाने की बात कही। बैंक कर्मचारियों को उनके चेहरे पर थकान और डर दिखाई दिया। कर्मचारियों को शक हुआ और उन्होंने इतनी जल्दी बड़ी रकम न देने की बात कही। डॉक्टर ने बताया कि तमिलनाडु में बेटे के फ्लैट और जमीन खरीदने के लिए पैसे चाहिए। दबाव में आकर बैंक ने 21 फरवरी को FD की रकम जारी कर दी।
रिटायर्ड सरकारी अफसर होने के कारण बैंक ने उनसे ज्यादा पूछताछ नहीं की। लेकिन जालसाजों का दबाव जारी रहा। उन्होंने फोन पर बार-बार कॉल करके धमकियां दीं कि अगर पैसे नहीं ट्रांसफर किए तो गिरफ्तारी होगी और संपत्ति जब्त हो जाएगी। डॉक्टर ने डर के मारे लगातार ट्रांसफर किए। कुल 9 दिनों में 1.58 करोड़ रुपये विभिन्न खातों में भेज दिए गए।
कैसे काम करता है डिजिटल अरेस्ट फ्रॉड?
डिजिटल अरेस्ट एक नया और खतरनाक साइबर फ्रॉड है, जिसमें जालसाज खुद को CBI, ED, इनकम टैक्स या पुलिस अधिकारी बताते हैं। वे कहते हैं कि आपके नाम पर मनी लॉन्ड्रिंग, ड्रग्स या टेरर फंडिंग का केस दर्ज है। फोन पर वीडियो कॉल करके फर्जी वर्दी, आईडी कार्ड और ऑफिस का बैकग्राउंड दिखाते हैं। पीड़ित को घर में ही ‘अरेस्ट’ कर लिया जाता है और बाहर जाने, किसी से बात करने या बैंक जाने से मना किया जाता है।
डॉ. मंजुला के मामले में भी यही हुआ। जालसाजों ने उन्हें घर पर ही रखा और लगातार दबाव बनाया।
FD तोड़ने के लिए बैंक जाने की इजाजत दी, लेकिन
पैसे ट्रांसफर करने के लिए फोन पर निर्देश दिए। पीड़ित अकेलेपन और डर के कारण सब मान लेती हैं।
बैंक कर्मचारियों का शक और सीमित जांच
बैंक कर्मचारियों ने डॉक्टर के व्यवहार से शक तो किया, लेकिन रिटायर्ड होने और
‘परिवार के लिए पैसे’ की बात पर ज्यादा सवाल नहीं किए। अगर बैंक ने ज्यादा
सतर्कता बरती होती तो शायद इतनी बड़ी रकम ट्रांसफर होने से पहले रोक ली जाती।
अब पुलिस जांच में पता चला कि जालसाजों ने कई खाते इस्तेमाल किए और पैसे जल्दी बाहर निकाल लिए।
पुलिस जांच और सावधानियां
पुलिस ने केस दर्ज कर जांच शुरू की है। साइबर क्राइम यूनिट ट्रांसफर वाले खातों की जांच कर रही है।
विशेषज्ञों का कहना है कि ऐसे फ्रॉड में तुरंत 1930 (साइबर क्राइम हेल्पलाइन) या 112 पर कॉल करें।
किसी भी सरकारी अधिकारी का फोन आए तो पहले थाने या आधिकारिक नंबर से वेरिफाई करें।
FD या बड़ा ट्रांसफर करने से पहले परिवार या बैंक से सलाह लें।
डॉ. मंजुला का केस एक बार फिर डिजिटल अरेस्ट की बढ़ती समस्या को उजागर करता है।
बुजुर्गों और अकेले रहने वालों को ज्यादा सतर्क रहना होगा।