लखनऊ एंटी करप्शन टीम की सख्ती: भ्रष्ट अधिकारी बर्खास्त
लखनऊ में एंटी करप्शन टीम ने भ्रष्टाचार के गंभीर आरोपों में एक पुलिस अधिकारी को बर्खास्त कर दिया है। यह कार्रवाई विभागीय जांच के बाद की गई, जिसमें अधिकारी पर रिश्वतखोरी और कदाचार के सबूत मिले। योगी आदित्यनाथ सरकार की जीरो टॉलरेंस पॉलिसी के तहत यह कदम पुलिस विभाग में साफ-सफाई लाने की दिशा में महत्वपूर्ण है। भ्रष्टाचार विरोधी अभियान 2026 की शुरुआत में और तेज हो गया है, जिससे पुलिस की छवि सुधारने में मदद मिल रही है।
घटना का पूरा विवरण
एंटी करप्शन टीम को प्राप्त शिकायत पर जांच शुरू हुई, जिसमें पुलिस अधिकारी ने रिश्वत लेते हुए पकड़ा गया। ठोस सबूतों के आधार पर अधिकारी को तत्काल बर्खास्तगी का सामना करना पड़ा। लखनऊ जैसे बड़े शहर में पुलिस की छवि धूमिल करने वाले इस कृत्य से जनता में आक्रोश है। विभाग ने तुरंत विभागीय जांच शुरू कर दी है, ताकि मामले की गहराई से पड़ताल हो सके और दोषी को सजा मिले।
आरोपी अधिकारी की भूमिका
आरोपी अधिकारी लखनऊ या आसपास के क्षेत्र में तैनात थे और रिश्वत के जरिए काम कराने का आरोप लगा। एंटी करप्शन टीम ने ठोस सबूत इकट्ठा कर कार्रवाई की। इसी तरह के मामलों में पहले भी कई दरोगा निलंबित हो चुके हैं, जैसे बहराइच और श्रावस्ती में। यह घटना 2026 की शुरुआत में हुई, जब भ्रष्टाचार विरोधी अभियान तेज था। पुलिस महकमे में ऐसे मामलों पर लगातार नजर रखी जा रही है।
विभागीय जांच की प्रक्रिया
विभागीय जांच में आरोपी को नोटिस जारी कर सफाई का मौका दिया गया, लेकिन सबूतों के सामने वह दोषी साबित हुए। उत्तर प्रदेश पुलिस की दंड एवं अपील नियमावली 1991 के तहत बर्खास्तगी वैध है। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने भी ऐसे मामलों में बिना जांच बर्खास्तगी को गलत ठहराया है, इसलिए यहां पूरी प्रक्रिया अपनाई गई। जांच रिपोर्ट उच्च अधिकारियों को सौंपी गई है, जिसके आधार पर आगे की कार्रवाई होगी।
पिछले महीनों में लखनऊ में कई पुलिसकर्मी निलंबित हुए, जैसे PGI थाने से
जुड़े इंस्पेक्टर और दरोगा फर्जी केस में फंसाने के आरोप में। देवीपाटन रेंज में
दो एसआई रिश्वत में सस्पेंड। 2025 में 52 पुलिसकर्मी निलंबित हो चुके थे।
ये घटनाएं UP पुलिस में सुधार की जरूरत दर्शाती हैं।
योगी सरकार की नीति से ऐसे मामलों पर लगाम लग रही है।
जनता की प्रतिक्रिया और प्रभाव
यह बर्खास्तगी आम जनता के बीच सराहनीय है, क्योंकि एंटी करप्शन पोर्टल पर सैकड़ों शिकायतें आ रही हैं।
लखनऊ निवासियों का मानना है कि इससे भ्रष्टाचार पर लगाम लगेगी। भविष्य में स्टिंग ऑपरेशन बढ़ सकते हैं।
पुलिस विभाग की विश्वसनीयता बहाल करने में यह कदम मील का पत्थर साबित होगा।
जनता अब पुलिस पर अधिक भरोसा कर रही है और शिकायत दर्ज करने में आगे आ रही है।
योगी सरकार की जीरो टॉलरेंस पॉलिसी पुलिस में पारदर्शिता ला रही है। ऐसे कदमों से अपराधियों और भ्रष्ट तत्वों में
खौफ पैदा हो रहा है। लखनऊ जैसे शहर में कानून व्यवस्था मजबूत बनाने के लिए यह अभियान जारी रहेगा।
नागरिकों से अपील है कि भ्रष्टाचार की शिकायत एंटी करप्शन टीम या पोर्टल पर दर्ज करें।