उत्तर प्रदेश में होली के दौरान कोई बिजली कटौती नहीं होगी
होली पर बिजली सप्लाई बरकरार: सरकार का फैसला
उत्तर प्रदेश में होली के त्योहार के दौरान आम जनता को बड़ी राहत मिली है। प्रदेश सरकार ने स्पष्ट निर्देश जारी किए हैं कि होली के मौके पर कोई अनावश्यक बिजली कटौती नहीं की जाएगी। केवल किसी बड़ी तकनीकी खराबी या फॉल्ट आने पर ही बिजली सप्लाई बंद होगी। यह फैसला होली के दौरान लोगों को परेशानी से बचाने के लिए लिया गया है। पिछले वर्षों में त्योहारों पर बिजली कटौती की शिकायतें आम रही हैं, लेकिन इस बार प्रशासन ने पहले से तैयारी कर ली है।
बिजलीकर्मियों की बैठक: निजीकरण के खिलाफ रणनीति बनेगी
विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति ने 26 फरवरी 2026 को महत्वपूर्ण बैठक बुलाई है। इस बैठक में बिजली कर्मचारियों के आवासों पर जबरन स्मार्ट मीटर लगाने और उत्पीड़न के खिलाफ रणनीति तैयार की जाएगी। समिति ने आरोप लगाया है कि स्मार्ट मीटर लगाने के पीछे छिपी मंशा प्रदेश के कुछ चुनिंदा शहरों को फ्रेंचाइजी मॉडल पर निजी कंपनियों को सौंपने की है। खासतौर पर लखनऊ सहित अन्य शहरों में यह योजना चल रही है, ताकि पूर्वांचल विद्युत वितरण निगम और दक्षिणांचल विद्युत वितरण निगम के निजीकरण की प्रक्रिया आसान हो सके।
फ्रेंचाइजी मॉडल का विरोध: हजारों संविदा कर्मी हटाए गए
संघर्ष समिति के पदाधिकारियों ने कहा कि जिन शहरों को फ्रेंचाइजी मॉडल पर देने की तैयारी है, वहां पहले ही वर्टिकल व्यवस्था लागू कर दी गई है। इसके तहत हजारों संविदा कर्मचारियों को हटा दिया गया है। नियमित बिजली कर्मचारियों का बड़े पैमाने पर स्थानांतरण किया जा रहा है। राजधानी लखनऊ में लेसा (लखनऊ विद्युत आपूर्ति कंपनी) में हाल ही में बड़े पैमाने पर बिजली कर्मियों के निलंबन और ट्रांसफर किए गए हैं। पदाधिकारियों का आरोप है कि इसका एकमात्र उद्देश्य कर्मचारियों में भय का माहौल बनाना है, ताकि वे विरोध न कर सकें।
स्मार्ट मीटर और निजीकरण: कर्मचारियों का बड़ा डर
बिजली कर्मचारी संगठन का कहना है कि स्मार्ट मीटर लगाने की प्रक्रिया को तेज करने के नाम पर कर्मचारियों पर दबाव बनाया जा रहा है। यह मीटर निजी कंपनियों को सिस्टम सौंपने की तैयारी का हिस्सा है। फ्रेंचाइजी मॉडल लागू होने पर बिजली वितरण का नियंत्रण निजी हाथों में चला जाएगा, जिससे कर्मचारियों की नौकरियां खतरे में पड़ सकती हैं। पहले से ही कई क्षेत्रों में फ्रेंचाइजी के नाम पर संविदा कर्मचारियों की छंटनी हो चुकी है। समिति ने चेतावनी दी है कि यदि निजीकरण की प्रक्रिया नहीं रोकी गई तो बड़े आंदोलन की स्थिति बन सकती है।
बैठक में क्या होगा फैसला?
26 फरवरी की बैठक में बिजलीकर्मी अपनी मांगें और विरोध की रणनीति तय करेंगे।
इसमें शामिल हो सकता है – विरोध प्रदर्शन, धरना, हड़ताल की
तैयारी या कानूनी कार्रवाई। संगठन का कहना है कि वे प्रदेश की जनता के हित में
बिजली सप्लाई सुचारू रखने के पक्ष में हैं, लेकिन कर्मचारियों के अधिकारों और
नौकरियों की रक्षा के लिए लड़ेंगे। निजीकरण से बिजली दरें बढ़ सकती हैं और
सेवा की गुणवत्ता प्रभावित हो सकती है, जिसका विरोध जनता के हित में है।
जनता और कर्मचारियों के बीच संतुलन की चुनौती
एक तरफ सरकार होली पर बिजली कटौती न करने का वादा कर रही है, तो दूसरी तरफ बिजलीकर्मी निजीकरण के
खिलाफ संघर्ष कर रहे हैं। यह स्थिति प्रदेश में बिजली विभाग की नीतियों पर सवाल उठा रही है।
यदि बैठक में आक्रामक रणनीति बनी तो आने वाले दिनों में
बिजली सप्लाई पर असर पड़ सकता है। फिलहाल होली के दौरान बिजली सुचारू रहेगी,
लेकिन लंबे समय में कर्मचारियों की मांगों का समाधान जरूरी है।