निषाद समाज की अनुसूचित जाति में शामिल करने की मांग: गोरखपुर में शुरू हुआ आमरण अनशन
गोरखपुर की धरती एक बार फिर सामाजिक न्याय की लड़ाई का गवाह बन रही है। निषाद समाज (जिसमें केवट, मल्लाह, बिंद, कश्यप, धीवर, बाथम आदि उपजातियां शामिल हैं) को अनुसूचित जाति (SC) में शामिल करने की लंबे समय से चली आ रही मांग को लेकर निषाद युवा वाहिनी ने बड़ा आंदोलन शुरू कर दिया है। दिल्ली और पश्चिम बंगाल की तर्ज पर उत्तर प्रदेश में भी इस मांग को लेकर आमरण अनशन की घोषणा की गई है।
महाराज गुरुराज निषाद जय के बैनर तले गोरखपुर में अंबेडकर प्रतिमा के सामने 25 फरवरी 2026 से अनिश्चितकालीन आमरण अनशन शुरू हुआ। निषाद युवा वाहिनी के राष्ट्रीय अध्यक्ष सुशील चंद साहनी (एडवोकेट) के नेतृत्व में यह आंदोलन चल रहा है। अनशन में फिशरमैन आर्मी के प्रमुख अक्ष विनोद साहनी, जिला अध्यक्ष और समाज सेवक दुर्गेश साहनी भी शामिल हुए हैं। दोनों फोटो में मौजूद दस्तावेज और बैनर से साफ है कि संगठन ने राज्य सरकार को 23 फरवरी 2026 तक समय दिया था, लेकिन मांग पूरी न होने पर 25 फरवरी से अनशन शुरू कर दिया गया।
दस्तावेज और मांग का पूरा विवरण
प्रस्तुत दस्तावेज (पेज 1 और 2) में स्पष्ट लिखा है कि निषाद समाज की उपजातियां – केवट, मल्लाह, बिंद, कश्यप, धीवर, बाथम आदि – को दिल्ली और पश्चिम बंगाल की तरह उत्तर प्रदेश में भी अनुसूचित जाति में शामिल किया जाए। ज्ञापन में कहा गया है कि 23 फरवरी 2026 तक प्रमाण-पत्र जारी न होने पर 25 फरवरी दोपहर 1 बजे से बाबा साहेब डॉ. भीमराव अंबेडकर की प्रतिमा के सामने अनिश्चितकालीन आमरण अनशन शुरू होगा।
दस्तावेज में मुख्यमंत्री उत्तर प्रदेश सरकार को संबोधित करते हुए लिखा है कि यदि मांग पूरी नहीं हुई तो अनशन जारी रहेगा। संगठन का कहना है कि निषाद समाज को OBC से हटाकर SC में शामिल करने का फैसला पहले से ही हो चुका है, लेकिन प्रमाण-पत्र जारी नहीं हो रहे। इससे समाज को संवैधानिक अधिकारों से वंचित किया जा रहा है।
फिशरमैन आर्मी के अक्ष विनोद साहनी और समाज सेवक दुर्गेश साहनी की भूमिका
अनशन में फिशरमैन आर्मी के प्रमुख अक्ष विनोद साहनी और जिला अध्यक्ष एवं समाज सेवक दुर्गेश साहनी भी शामिल हुए हैं। फोटो में वे बैनर और दस्तावेज के साथ मौजूद दिख रहे हैं। फिशरमैन आर्मी मछुआ समुदाय के उत्थान और अधिकारों के लिए काम करती है, और यह मांग सीधे उनके एजेंडे से जुड़ी है। अक्ष विनोद साहनी और दुर्गेश साहनी ने कहा कि निषाद समाज मछुआ समुदाय का बड़ा हिस्सा है और SC दर्जा मिलने से आरक्षण, सरकारी योजनाओं और सामाजिक न्याय में लाभ होगा। दुर्गेश साहनी ने समाज सेवक के तौर पर
इस आंदोलन को मजबूती दी और कहा कि निषाद समाज को उसके हक से वंचित नहीं रखा जा सकता।
अनशन का कारण और सामाजिक प्रभाव
निषाद समाज का कहना है कि दिल्ली और पश्चिम बंगाल में
इन उपजातियों को SC में शामिल किया गया है, लेकिन
उत्तर प्रदेश में प्रमाण-पत्र जारी नहीं हो रहे। इससे समाज आर्थिक और सामाजिक रूप से पिछड़ रहा है।
संगठन ने 3 जनवरी 2026 को मुख्यमंत्री को
ज्ञापन सौंपा था, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई। अब अनशन के जरिए दबाव बनाया जा रहा है।
सरकार से अपील और आगे की रणनीति
निषाद युवा वाहिनी ने अपील की है कि 25 फरवरी से शुरू अनशन तब तक चलेगा
जब तक SC प्रमाण-पत्र जारी नहीं हो जाते।
यदि मांग पूरी नहीं हुई तो आंदोलन और तेज होगा। फिशरमैन आर्मी, समाज सेवक दुर्गेश साहनी और
अन्य संगठन भी समर्थन में शामिल हो रहे हैं।
यह मांग निषाद समाज के लिए ऐतिहासिक है। SC दर्जा मिलने से शिक्षा,
नौकरी और राजनीतिक प्रतिनिधित्व में बड़ा लाभ होगा।
गोरखपुर में चल रहा यह अनशन पूरे प्रदेश में फैल सकता है। हम लगातार अपडेट्स लाते रहेंगे।