2027 यूपी विधानसभा चुनाव
उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2027 को लेकर राजनीतिक सरगर्मियां तेज हो गई हैं। बहुजन समाज पार्टी (बसपा) ने बड़ा दांव खेलते हुए घोषणा की है कि वह प्रदेश की कुल 403 विधानसभा सीटों में से 50 प्रतिशत यानी करीब 201-202 सीटों पर ब्राह्मण प्रत्याशी उतारेगी। यह रणनीति ब्राह्मण बिरादरी के वोट बैंक को साधने और पार्टी की सामाजिक संरचना को और मजबूत करने की दिशा में उठाया गया महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
पार्टी ने प्रदेश के पहले ब्राह्मण उम्मीदवार के रूप में आशीष पांडेय का नाम घोषित कर दिया है। आशीष पांडेय को पार्टी ने एक महत्वपूर्ण सीट से चुनाव लड़ाने की तैयारी की है, हालांकि अभी उनकी सीट का नाम सार्वजनिक नहीं किया गया है। बसपा सूत्रों के मुताबिक होली के बाद कानपुर मंडल की 27 विधानसभा सीटों में से करीब 10 सीटों पर प्रभारियों और संभावित प्रत्याशियों की घोषणा हो सकती है। इनमें ब्राह्मण चेहरों को प्राथमिकता दी जाएगी।
यूजीसी प्रकरण के बाद ब्राह्मण राजनीति में बढ़ा दखल
हाल ही में यूजीसी (विश्वविद्यालय अनुदान आयोग) से जुड़े विवाद और ब्राह्मण समाज में उत्पन्न असंतोष ने उत्तर प्रदेश की राजनीति में ब्राह्मण बिरादरी का दखल अचानक बढ़ा दिया है। इस मुद्दे ने ब्राह्मण वोटरों में एकजुटता पैदा की है, जिसका फायदा उठाने के लिए सभी प्रमुख दल सक्रिय हो गए हैं। लेकिन बसपा इस मामले में सबसे आगे नजर आ रही है।
मायावती की रणनीति साफ है – पार्टी अपनी पुरानी कोर वोट बैंक (दलित-मुस्लिम) के साथ-साथ ब्राह्मणों को भी साधकर एक व्यापक सामाजिक गठजोड़ बनाने की कोशिश कर रही है। 2007 में बसपा ने ठीक इसी फॉर्मूले से पूर्ण बहुमत की सरकार बनाई थी, जब ब्राह्मणों को बड़ी संख्या में टिकट दिए गए थे। अब 2027 में पार्टी उसी सफल प्रयोग को दोहराने की तैयारी में है।
कानपुर मंडल में 10 सीटों पर प्रभारियों की घोषणा जल्द
सूत्रों के अनुसार होली के बाद बसपा कानपुर मंडल की 27 सीटों में से करीब 10 सीटों पर प्रभारियों की घोषणा कर सकती है। इन सीटों पर ब्राह्मण चेहरों को टिकट देने की संभावना सबसे ज्यादा है। पार्टी नेतृत्व का मानना है कि कानपुर, फतेहपुर, उन्नाव, कानपुर देहात जैसे इलाकों में ब्राह्मण वोटर निर्णायक भूमिका निभाते हैं।
इन सीटों पर मजबूत ब्राह्मण प्रत्याशी उतारकर बसपा सपा, भाजपा और कांग्रेस को चुनौती देना चाहती है।
बसपा की ब्राह्मण रणनीति: क्या है गणित?
उत्तर प्रदेश में ब्राह्मण मतदाता कुल वोटों का करीब 10-12% हैं, जो कई सीटों पर निर्णायक साबित होते हैं।
बसपा का लक्ष्य है कि ब्राह्मण वोटों का
एक बड़ा हिस्सा अपनी ओर मोड़कर दलित-ब्राह्मण गठजोड़ को मजबूत किया जाए। पार्टी का मानना है कि
अगर ब्राह्मण वोटर बसपा की ओर झुकते हैं तो कई सीटों पर जीत आसान हो जाएगी।
आशीष पांडेय को पहले उम्मीदवार के रूप में चुनना भी इसी रणनीति का हिस्सा है।
पांडेय एक शिक्षित और युवा ब्राह्मण चेहरा हैं, जो पार्टी को नया संदेश देने में मदद कर सकते हैं।
राजनीतिक विश्लेषकों की राय
विश्लेषकों का कहना है कि बसपा की यह रणनीति 2027 में गेम चेंजर साबित हो सकती है।
अगर पार्टी ब्राह्मणों को 50% टिकट देती है तो यह सामाजिक समीकरणों में बड़ा बदलाव लाएगी।
हालांकि, पार्टी को यह भी ध्यान रखना होगा कि दलित कोर वोट बैंक नाराज न हो।
बसपा अब हर मंडल में ब्राह्मण नेताओं को जोड़ने और संगठन मजबूत करने में जुटी है।
होली के बाद घोषणाओं का दौर शुरू होगा, जिससे यूपी की राजनीति में नया मोड़ आएगा।