नेपाल से 80 रुपये किलो पाम ऑयल
मिलावट का खेल: नेपाल से 80 रुपये में ला रहे पाम ऑयल…सरसों का मिलावटी तेल बेच रहे 160 रुपये लीटर
शुद्ध सरसों का तेल भारतीय रसोई का अभिन्न हिस्सा है, लेकिन होली के मौके पर मिलावटखोरों ने फिर से सक्रिय होकर लोगों की सेहत के साथ खिलवाड़ शुरू कर दिया है। सूत्रों के मुताबिक शहर के हार्बर्ट बंधे के पास और आसपास के इलाकों में कुछ धंधेबाज सरसों तेल में बड़े पैमाने पर मिलावट कर रहे हैं। ये लोग नेपाल से मात्र 80 रुपये प्रति किलो की दर से पाम ऑयल लाकर उसमें केमिकल और एसेंस मिलाकर मिलावटी सरसों तेल तैयार कर रहे हैं और इसे 150 से 160 रुपये प्रति लीटर के दाम पर बेच रहे हैं।
मंडी में रोजाना 15 टन सरसों तेल की खपत, 5 टन मिलावटी
मंडी में शुद्ध और मिलावटी मिलाकर सरसों तेल की प्रतिदिन 15 टन की खपत है। सूत्रों का दावा है कि इसमें से रोजाना करीब 5 टन मिलावटी तेल खपत हो रहा है। धंधेबाज होली को देखते हुए विशेष रूप से सक्रिय हो गए हैं, क्योंकि त्योहार के दौरान सरसों तेल की मांग कई गुना बढ़ जाती है। नेपाल बॉर्डर से ट्रकों में सस्ता पाम ऑयल लाकर छोटे-बड़े पैकेट में बेचा जा रहा है। पीला रंग और सरसों जैसी तेज सुगंध देने वाले केमिकल के इस्तेमाल से मिलावटी तेल बिल्कुल असली जैसा दिखता और महकता है।
कैसे बनता है मिलावटी तेल?
धंधेबाज पहले नेपाल से 80 रुपये किलो में पाम ऑयल लाते हैं। इसमें सरसों तेल की थोड़ी मात्रा, पीला रंग (कलर), सरसों की तेज खुशबू देने वाला एसेंस और कुछ केमिकल मिलाए जाते हैं। इस मिश्रण से 1 लीटर मिलावटी तेल तैयार हो जाता है, जिसकी लागत 90-100 रुपये से ज्यादा नहीं होती। इसे 150-160 रुपये लीटर में बेचकर 50-60 रुपये प्रति लीटर का मुनाफा कमाया जा रहा है। गर्म करने पर यह तेल काला पड़ जाता है और विषैले धुएं छोड़ता है, लेकिन आम उपभोक्ता को पता नहीं चलता।
सेहत पर गंभीर खतरा
स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार पाम ऑयल में सैचुरेटेड फैट की मात्रा बहुत ज्यादा होती है, जो कोलेस्ट्रॉल बढ़ाता है और हृदय रोग का खतरा 30-40% तक बढ़ा सकता है। मिलावटी तेल में इस्तेमाल होने वाले केमिकल लीवर, किडनी और पाचन तंत्र को नुकसान पहुंचाते हैं। लंबे समय तक सेवन से कैंसर, ब्लड प्रेशर और डायबिटीज जैसी बीमारियां हो सकती हैं।
ग्रामीण और निम्न-मध्यम वर्ग के लोग सस्ते तेल के चक्कर में यह जहर खरीद रहे हैं।
पुलिस सेटिंग का आरोप, कार्रवाई क्यों नहीं?
स्थानीय लोगों का आरोप है कि कुछ बड़े धंधेबाजों की पुलिस और प्रशासन से सेटिंग है,
इसलिए छापेमारी नहीं हो रही। जिनकी सेटिंग नहीं है, वे कभी-कभी कार्रवाई की जद में आ जाते हैं,
लेकिन बड़े नेटवर्क पर कोई सख्त कार्रवाई नहीं हो रही। FSSAI और
स्थानीय प्रशासन से अपील है कि होली से पहले विशेष अभियान चलाकर मिलावटखोरों पर नकेल कसी जाए।
उपभोक्ता सावधानियां और क्या करें?
- तेल हमेशा ब्रांडेड पैकेट में खरीदें, जिसमें FSSAI लाइसेंस नंबर स्पष्ट हो।
- तेल मशीन से निकालवाकर खरीदें, जहां आप खुद देख सकें।
- तेल गर्म करने पर अगर काला पड़ जाए, तेज बदबू आए या धुआं ज्यादा निकले तो तुरंत फेंक दें।
- मिलावट की शिकायत FSSAI हेल्पलाइन 1800112100 या स्थानीय FSSAI ऑफिस में करें।
- पड़ोसियों को बताएं और सोशल मीडिया पर शेयर करें।
होली का त्योहार खुशियों का है, लेकिन मिलावटी तेल से सेहत बर्बाद न हो। जागरूक रहें, शुद्ध तेल खरीदें और
मिलावटखोरों को सबक सिखाएं। स्वस्थ भारत के लिए सामूहिक जागरूकता जरूरी है।