अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की वापसी के साथ ही भारत पर व्यापारिक दबाव बढ़ता जा रहा है। ट्रंप प्रशासन ने भारत पर 10 प्रतिशत टैरिफ लगाने की घोषणा की है और अब इसे जल्द 15 प्रतिशत तक बढ़ाने का ऐलान किया गया है। ट्रंप टैरिफ भारत प्रभाव यह लगातार बढ़ते टैरिफ का सिलसिला देश की अर्थव्यवस्था को कमजोर कर रहा है। फिशरमैन आर्मी के राष्ट्रीय अध्यक्ष चंद्रभान निषाद ने इसे सख्त शब्दों में नकारा है। उन्होंने कहा कि हमारे माननीय प्रधानमंत्री जी इस अन्याय को चुपचाप स्वीकार कर रहे हैं, जिससे भारत मजबूत नहीं बल्कि मजबूर बनाया जा रहा है। निषाद जी का मानना है कि मजबूर नहीं, मजबूत चाहिए। किसी भी देश के आगे झुकने की कोई आवश्यकता नहीं। यह बयान न केवल आर्थिक नीतियों पर सवाल उठाता है बल्कि राष्ट्रीय स्वाभिमान की बात करता है। भारत अमेरिका व्यापार युद्ध में भारत को मजबूत रुख अपनाना चाहिए।
ट्रंप टैरिफ की शुरुआत और भारत पर असर
ट्रंप ने अपनी पहली पारी में ही भारत को ‘टैरिफ किंग’ करार दिया था। अब 2025 के अंत में सत्ता में लौटते ही 10 प्रतिशत टैरिफ लागू कर दिया। ट्रंप 10 प्रतिशत टैरिफ यह स्टील, एल्यूमीनियम और अन्य निर्यात वस्तुओं पर सीधा प्रहार है। अमेरिका का कहना है कि जल्द ही यह 15 प्रतिशत हो जाएगा। भारत का निर्यात बाजार सिकुड़ रहा है। टेक्सटाइल, फार्मास्यूटिकल्स और ज्वेलरी सेक्टर सबसे ज्यादा प्रभावित हो रहे हैं। 2026 के पहले तिमाही में ही भारत के $10 बिलियन के निर्यात पर असर पड़ा है। चंद्रभान निषाद ने कहा, “यह टैरिफ नहीं, आर्थिक ब्लैकमेल है।” भारत निर्यात हानि ट्रंप पीएम मोदी की चुप्पी से देशवासी आहत हैं। क्या यह नीति भारत को वैश्विक पटल पर कमजोर कर रही है?
प्रधानमंत्री की नीति: स्वीकार या समर्पण?
हमारे देश के माननीय प्रधानमंत्री जी लगातार इन टैरिफ को स्वीकार करते जा रहे हैं। पीएम मोदी ट्रंप टैरिफ कोई कड़ा जवाब नहीं, कोई प्रतिटैरिफ नहीं। निषाद जी का सवाल बिल्कुल जायज है- इससे भारतवर्ष आर्थिक रूप से मजबूत होगा या मजबूर? आंकड़े बताते हैं कि 2024-25 में भारत-अमेरिका व्यापार असंतुलन $36 बिलियन पहुंच गया। अमेरिका घाटे की भरपाई टैरिफ से कर रहा है। लेकिन भारत क्यों चुप? चंद्रभान निषाद ने जोर देकर कहा, “देश को मजबूत बनाना है, मजबूर नहीं।” फिशरमैन आर्मी जैसे संगठन राष्ट्रीय हितों की रक्षा के लिए आगे आ रहे हैं। फिशरमैन आर्मी चंद्रभान उनकी आवाज लाखों भारतीयों की पुकार है। सरकार को अब आक्रामक व्यापार नीति अपनानी चाहिए।
आर्थिक मजबूती vs मजबूरी: वास्तविक तस्वीर
ट्रंप के टैरिफ से भारत की GDP ग्रोथ 0.5 प्रतिशत गिर सकती है। भारत GDP प्रभाव टैरिफ RBI के अनुमान के मुताबिक, निर्यात में 8-10 प्रतिशत कमी आएगी।
किसान, मजदूर और छोटे उद्योगी सबसे ज्यादा प्रभावित। दवा कंपनियां अमेरिका को
40 प्रतिशत निर्यात करती हैं, वहां महंगाई बढ़ेगी। निषाद जी ने सही कहा- मजबूर नहीं, मजबूत चाहिए।
भारत को BRICS देशों से गठबंधन मजबूत करना चाहिए। चीन मॉडल अपनाएं- स्वदेशी उत्पादन बढ़ाएं।
भारत स्वदेशी नीति आत्मनिर्भर भारत अब असल परीक्षा में है। झुकना नहीं, जवाब देना समय है।
चंद्रभान निषाद: राष्ट्रीय स्वाभिमान की आवाज
फिशरमैन आर्मी के राष्ट्रीय अध्यक्ष चंद्रभान निषाद ने प्रभावशाली शब्दों में कहा,
“किसी भी देश के आगे झुकाने की आवश्यकता नहीं है।” चंद्रभान निषाद बयान उनका
यह बयान सोशल मीडिया पर वायरल हो गया। लाखों फिशरमैन और
किसान समुदाय उनका समर्थन कर रहे हैं। निषाद जी ने पीएम से अपील की कि
टैरिफ युद्ध में भारत पीछे न हटे। मजबूत अर्थव्यवस्था के लिए कूटनीति के साथ
आर्थिक हथियार भी जरूरी। उनका नेतृत्व नदिया-नर्मदा तक फैला है।
निषाद समुदाय आवाज यह बयान पूरे भारत के लिए प्रेरणा है।
आगे की राह: मजबूत भारत की रणनीति
भारत को अब टैरिफ पर जवाबी कार्रवाई करनी चाहिए। अमेरिकी सेब, नट्स पर 20 प्रतिशत टैरिफ लगाएं।
भारत प्रतिटैरिफ रणनीति FTA वार्ता तेज करें लेकिन दबाव न झेलें।
चंद्रभान निषाद की तरह हर नागरिक जागे। मजबूत नहीं मजबूर- यह नारा राष्ट्रीय संकल्प बने।
भारत आर्थिक स्वाभिमान 2026 में ट्रंप की चुनौती का जवाब देकर भारत सुपरपावर बने।