POCSO केस में शंकराचार्य स्वामी
प्रयागराज/वाराणसी, उत्तर प्रदेश: ज्योतिष पीठ के शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती अब कानूनी मुश्किलों में घिर गए हैं। प्रयागराज के झूंसी पुलिस थाने में नाबालिग बच्चों के कथित यौन उत्पीड़न (POCSO एक्ट) और अन्य गंभीर अपराधों के आरोप में दर्ज FIR के बाद उन्होंने मंगलवार (24 फरवरी 2026) को इलाहाबाद उच्च न्यायालय में अग्रिम जमानत याचिका दायर की। सूत्रों के अनुसार, याचिका दाखिल करने से पहले सरकारी वकील के कार्यालय को नोटिस भेजा गया है, ताकि सुनवाई के दौरान राज्य पक्ष अपनी दलीलें रख सके। यह कदम दर्शाता है कि शंकराचार्य को गिरफ्तारी का डर सता रहा है और वे पहले से ही जमानत सुनिश्चित करना चाहते हैं।
केस की पृष्ठभूमि और आरोप
झूंसी थाने में 21 फरवरी को POCSO स्पेशल कोर्ट के आदेश पर FIR दर्ज की गई थी। शिकायतकर्ता आशुतोष पांडेय (उर्फ आशुतोष ब्रह्मचारी) ने आरोप लगाया कि स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद और उनके शिष्य मुकुंदानंद गिरी ने माघ मेले के दौरान नाबालिग बच्चों के साथ यौन शोषण किया। FIR में IPC की धारा 376 (बलात्कार), POCSO एक्ट की विभिन्न धाराएं, 354 (महिला की गरिमा भंग), 506 (धमकी) आदि लगाई गई हैं। कोर्ट ने पुलिस को जांच के निर्देश दिए थे, जिसके बाद पुलिस ने पीड़ित परिवार के बयान दर्ज किए और साक्ष्य जुटाए।
शंकराचार्य के पक्ष में पहले से ही बयान आ रहे थे कि यह राजनीतिक साजिश है और आरोप झूठे हैं। लेकिन अब उन्होंने खुद कोर्ट का रुख किया है, जो इस बात का संकेत है कि जांच में दबाव बढ़ रहा है और गिरफ्तारी की आशंका मजबूत हो गई है।
हाईकोर्ट में याचिका और प्रक्रिया
इलाहाबाद हाईकोर्ट में दायर अग्रिम जमानत याचिका (क्रिमिनल मिस्क एप्लीकेशन) में स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने दावा किया है कि आरोप बेबुनियाद हैं और उन्हें बदनाम करने की साजिश रची जा रही है। याचिका में कहा गया है कि वे जांच में पूरा सहयोग करने को तैयार हैं, लेकिन गिरफ्तारी से बचना चाहते हैं क्योंकि इससे उनकी धार्मिक छवि और संस्था को अपूरणीय क्षति होगी।
सूत्रों ने बताया कि याचिका पर जल्द सुनवाई हो सकती है।
सरकारी वकील को नोटिस मिलने के बाद राज्य पक्ष अपना
जवाब दाखिल करेगा। हाईकोर्ट आमतौर पर ऐसे मामलों में पुलिस जांच की स्थिति,
साक्ष्यों की प्रारंभिक रिपोर्ट और आरोपी की स्थिति को देखते हुए फैसला लेता है।
अगर जमानत मिलती है तो शर्तों के साथ होगी, जैसे जांच में सहयोग, गवाहों पर दबाव न डालना आदि।
साजिश के आरोप और राजनीतिक कोण
स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने पहले ही इसे साजिश करार दिया था। शाहजहांपुर के पत्रकार रमाशंकर
दीक्षित ने आरोप लगाया था कि आशुतोष पांडेय ने उन्हें झूठे आरोप लगाने के लिए
प्रलोभन और धमकी दी थी। सपा प्रमुख अखिलेश यादव ने भी पुलिस कार्रवाई का
विरोध किया और इसे संतों के खिलाफ साजिश बताया। वहीं, भाजपा और अन्य संगठनों ने कहा है
कि जांच होनी चाहिए और कानून अपना काम करेगा।
यह प्रकरण धार्मिक नेताओं की विश्वसनीयता, POCSO कानून के दुरुपयोग के आरोप और राजनीतिक
हस्तक्षेप पर बहस छेड़ रहा है। हाईकोर्ट का फैसला इस मामले की दिशा तय करेगा।
फिलहाल शंकराचार्य के खिलाफ कोई गिरफ्तारी नहीं हुई है, लेकिन जांच तेजी से चल रही है।
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