वाराणसी न्यूज: शाहजहांपुर पत्रकार रमाशंकर दीक्षित ने लगाया बड़ा आरोप, स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद को फंसाने के लिए आशुतोष पांडेय पर प्रलोभन-धमकी का दावा; प्रकरण में नया मोड़

वाराणसी, उत्तर प्रदेश: ज्योतिष पीठ के शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती के खिलाफ प्रयागराज में दर्ज POCSO एक्ट के तहत यौन शोषण की FIR का प्रकरण थमने का नाम नहीं ले रहा है। अब इस मामले में नया मोड़ आया है, जब शाहजहांपुर निवासी पत्रकार रमाशंकर दीक्षित सोमवार (23 फरवरी 2026) देर शाम केदारघाट स्थित श्री विद्या मठ पहुंचे और स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद से मुलाकात की। उन्होंने आरोप लगाया कि उन पर शंकराचार्य को फंसाने के लिए दबाव बनाया गया था। रमाशंकर ने दावा किया कि आशुतोष पांडेय (उर्फ आशुतोष ब्रह्मचारी/महाराज) ने उन्हें झूठा यौन शोषण का आरोप लगाने के लिए प्रलोभन दिया और इनकार करने पर धमकी भी दी।

आरोपों का पूरा विवरण

रमाशंकर दीक्षित ने पत्रकारों के समक्ष बताया कि 18 फरवरी को तीन अज्ञात लोग उनके पास आए और फोन पर आशुतोष पांडेय से बात कराई। आशुतोष ने पुराने रिश्तों का हवाला देते हुए कहा कि अपनी तीन बेटियों के साथ स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद पर बद्रीनाथ में यौन शोषण का आरोप लगवा दो, बदले में आर्थिक सहयोग मिलेगा। उन्होंने कहा, “सिर्फ एक शपथपत्र पर हस्ताक्षर करना है। अगर मैं कह देता कि मेरी बेटियों के साथ सेक्सुअल हैरेसमेंट हुआ तो मुझे पैसा मिलता।” रमाशंकर ने इनकार किया, क्योंकि उनके पिता भी दंडी सन्यासी थे और वे झूठे आरोप लगाकर पाप नहीं करना चाहते थे। इस पर आशुतोष ने धमकी दी कि “हमारे पास तमाम रास्ते हैं।” रमाशंकर ने यह पूरी बात सादे कागज पर लिखकर हस्ताक्षर करके स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद को सौंपी।

स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद की प्रतिक्रिया

शंकराचार्य ने इसे पूरी तरह साजिश करार दिया। उन्होंने कहा कि यह मामला राजनीतिक और धार्मिक स्तर पर उन्हें बदनाम करने की कोशिश है। प्रयागराज में 21 फरवरी को POCSO स्पेशल कोर्ट के आदेश पर झूंसी थाने में FIR दर्ज हुई थी, जिसमें स्वामी और उनके शिष्य मुकुंदानंद गिरी पर नाबालिगों से यौन शोषण का आरोप है। FIR में आशुतोष पांडेय की शिकायत पर कार्रवाई हुई।

स्वामी ने कहा कि वे जांच का सामना करेंगे और पुलिस का सहयोग करेंगे।

प्रकरण की पृष्ठभूमि

यह विवाद माघ मेले के दौरान गंगा स्नान और अन्य घटनाओं से शुरू हुआ था।

आशुतोष पांडेय ने स्वामी पर गंभीर आरोप लगाए, जिसके बाद कोर्ट ने FIR का आदेश दिया।

पुलिस ने हरदोई में पीड़ित परिवार के बयान लिए और जांच तेज की है। रमाशंकर के दावे से

मामला उल्टा हो गया है, जहां अब आशुतोष पर झूठे आरोप लगाने की साजिश का इल्जाम है।

राजनीतिक और सामाजिक प्रभाव

यह प्रकरण UP राजनीति में गरमा गया है। सपा प्रमुख अखिलेश यादव ने स्वामी का समर्थन किया और

पुलिस कार्रवाई का विरोध किया। धार्मिक संगठनों में चर्चा है कि यह संतों के बीच चरित्र हनन की जंग है।

पुलिस जांच जारी है, जिसमें रमाशंकर के बयान को भी शामिल किया जा सकता है।

यह घटना धार्मिक नेताओं की विश्वसनीयता और साजिशों पर सवाल खड़े करती है।