गोरखपुर AIIMS
गोरखपुर, उत्तर प्रदेश में एक बेहद शर्मनाक और निंदनीय घटना ने पूरे समाज को झकझोर दिया है। अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (AIIMS) गोरखपुर की स्त्री एवं प्रसूति रोग विभाग में परास्नातक तृतीय वर्ष की रेजिडेंट डॉक्टर (नागालैंड की मूल निवासी) के साथ 22 फरवरी 2026 की रात करीब 8 बजे मोहद्दीपुर स्थित ओरियन मॉल के बाहर तीन युवकों ने डेढ़ किलोमीटर तक पीछा कर दुर्व्यवहार किया। आरोपियों ने नस्लीय टिप्पणियां कीं, अपशब्द कहे, हंसी-ठिठोली की और अंत में बैड टच (अनुचित शारीरिक छेड़छाड़) किया। एक आरोपी ने डॉक्टर को डराने के लिए अपनी शर्ट उतार दी। यह घटना AIIMS गेट नंबर 2 के पास हुई, जहां पीड़िता के चिल्लाने पर आरोपी फरार हो गए।
घटना का पूरा विवरण
पीड़िता रेजिडेंट डॉक्टर अपने एक मित्र के साथ ओरियन मॉल गई थीं। रात करीब 8 बजे जब वह मॉल से बाहर निकलीं और पैदल या स्कूटी से AIIMS की ओर जा रही थीं, तब तीन युवक बाइक पर सवार होकर उनका पीछा करने लगे। उन्होंने शुरू में घूरना, हंसना और नस्लीय भेदभाव वाली टिप्पणियां करना शुरू किया, जैसे उत्तर-पूर्वी महिलाओं पर अक्सर की जाने वाली टिप्पणियां। आरोपियों ने गाली-गलौज की और लगातार 1.5 किलोमीटर तक पीछा किया। मोहद्दीपुर से AIIMS गेट नंबर 2 तक यह सिलसिला जारी रहा। गेट के पास पहुंचते ही एक युवक ने अपनी शर्ट उतारकर गंदी हरकत की और बैड टच किया। डॉक्टर ने जोर से चिल्लाया तो आरोपी वहां से भाग निकले।
पीड़िता ने तुरंत AIIMS प्रशासन को सूचित किया, जिसके बाद मामला पुलिस तक पहुंचा। डॉक्टर ने मोहद्दीपुर थाने में तहरीर दी, जिसमें स्टॉकिंग, नस्लीय अपमान, अभद्र टिप्पणी, धमकी और यौन उत्पीड़न (IPC की धारा 354, 354A, 509, 341 आदि) के आरोप लगाए। पुलिस ने FIR दर्ज की और सीसीटीवी फुटेज के आधार पर जांच शुरू की।
पुलिस कार्रवाई और गिरफ्तारी
पुलिस ने फास्ट एक्शन लिया। ओरियन मॉल से AIIMS तक के सीसीटीवी कैमरों की जांच की गई। चार टीमें गठित कर आरोपियों की तलाश की गई। जल्द ही दो आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया गया, जबकि तीसरा अभी फरार है। गिरफ्तार आरोपियों की बाइक भी बरामद की गई। पुलिस जांच में पता चला कि आरोपी देवरिया के रहने वाले हैं। मामले में कठोर कार्रवाई का वादा किया गया है।
सामाजिक प्रतिक्रिया और मुद्दे
यह घटना उत्तर-पूर्वी भारत से आने वाली महिलाओं पर होने वाले नस्लीय भेदभाव और यौन उत्पीड़न को
फिर उजागर करती है। NAFORD (नॉर्थ ईस्ट फॉर राइट्स एंड डेवलपमेंट)
जैसे संगठनों ने सख्त कार्रवाई और महिलाओं-डॉक्टर्स की सुरक्षा की मांग की है।
डॉक्टरों के संगठन ने मुख्यमंत्री कार्यालय से न्याय की गुहार लगाई।
यह मामला दिल्ली के बाद यूपी में भी नस्लीय टिप्पणियों की घटनाओं को बढ़ावा देता है।
*यह घटना महिलाओं की सुरक्षा, नस्लीय समानता और चिकित्सा क्षेत्र में काम करने वाली
महिलाओं के लिए सुरक्षित माहौल पर गंभीर सवाल खड़े करती है।
पुलिस जांच जारी है और तीसरे आरोपी की तलाश में छापेमारी हो रही है।
समाज में ऐसे अपराधों पर जीरो टॉलरेंस की जरूरत है।