प्रदर्शनी में जिला कारागार गोरखपुर का कमाल: दुर्लभ जैविक सब्जियों ने खींचा ध्यान
गोरखपुर शहर के हृदय स्थल विद्या विनीशिनी पार्क में उद्यान विभाग और रोटरी क्लब के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित वार्षिक फल, फूल एवं शाकभाजी प्रदर्शनी-2026 ने एक बार फिर कृषि प्रेमियों को आकर्षित किया। इस भव्य आयोजन में जिला कारागार गोरखपुर का स्टॉल अपनी अनूठी प्रस्तुति से सभी का दिल जीत ले गया। जैविक विधि से उगाई गई दुर्लभ सब्जियां और रंग-बिरंगे फूलों ने दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया, जिसके चलते स्टॉल को उत्कृष्ट प्रदर्शन के लिए उद्यान विभाग द्वारा प्रतिष्ठित पुरस्कार प्रदान किया गया। यह उपलब्धि न केवल जेल प्रशासन की मेहनत को दर्शाती है, बल्कि बंदियों के कौशल विकास को भी प्रोत्साहित करती है।
प्रदर्शनी में जिला कारागार गोरखपुर द्वारा प्रदर्शित जैविक सब्जियां अपनी पौष्टिकता और अनोखी बनावट के कारण केंद्रबिंदु बनी रहीं। रोमांसो ब्रोकली और ब्रोकली राब जैसी दुर्लभ प्रजातियां, जो बाजार में कम ही देखने को मिलती हैं, ने विशेष आकर्षण पैदा किया। इन सब्जियों को पूरी तरह जैविक खाद और प्राकृतिक तरीकों से उगाया गया, जिसमें कोई रासायनिक उर्वरक का उपयोग नहीं किया गया। इसके अलावा, लाल पत्ता गोभी, गहरे बैंगनी पत्तागोभी, और अन्य रंग-बिरंगी सब्जियां जैसे पीली शिमला मिर्च व बैंगनी भिंडी ने स्टॉल को एक कलात्मक चित्रमंडल प्रदान किया। ये उत्पाद न केवल स्वादिष्ट हैं, बल्कि विटामिन, एंटीऑक्सीडेंट्स से भरपूर हैं, जो स्वास्थ्य के लिए अत्यंत लाभकारी हैं।
कारागार परिसर में जैविक खेती का क्रांतिकारी मॉडल
जिला कारागार गोरखपुर में जैविक खेती की यह पहल 2020 से चल रही है, जहां बंदी आधुनिक कृषि तकनीकों का प्रशिक्षण ले रहे हैं। कारागार परिसर के सीमित स्थान में ड्रिप इरिगेशन, वर्मीकम्पोस्ट और हाइब्रिड बीजों का उपयोग कर ये उत्पाद तैयार किए जाते हैं। प्रदर्शनी में प्रदर्शित आकर्षक पुष्प जैसे गुलाब की नई प्रजातियां, सूरजमुखी और क्रिसैंथेमम ने भी खूब तारीफ बटोरी। जेल प्रशासन ने स्टॉल को अत्यंत व्यवस्थित ढंग से सजाया, जिसमें लकड़ी के स्टैंड्स, LED लाइटिंग और सूचना बोर्ड लगाए गए। आगंतुकों ने इस सज्जा की भूरि-भूरि प्रशंसा की और कई ने जैविक उत्पाद खरीदे भी।
इस स्टॉल का मुख्य उद्देश्य केवल उत्पाद प्रदर्शन तक सीमित नहीं था। यह दिखाने का प्रयास था कि जेल के बंदी भी समाज की मुख्यधारा से जुड़ने को तैयार हैं। प्रशिक्षण के माध्यम से वे जैविक खेती, बागवानी और उद्यमिता के गुर सीख रहे हैं। इससे उनकी रिहाई के बाद स्वरोजगार के अवसर बढ़ेंगे। गोरखपुर जिले में जैविक खेती को बढ़ावा देने वाली यह पहल पर्यावरण संरक्षण और आत्मनिर्भर भारत अभियान से जुड़ी हुई है।
विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसे मॉडल अन्य जेलों के लिए आदर्श बन सकते हैं।
पुरस्कार वितरण और जेल प्रशासन की भूमिका
प्रदर्शनी के समापन पर उद्यान विभाग ने जिला कारागार गोरखपुर को प्रथम पुरस्कार से नवाजा।
यह पुरस्कार स्टॉल की विशिष्टता, उत्पादों की गुणवत्ता और
प्रस्तुति के आधार पर दिया गया। अवसर पर जेल अधीक्षक दिलीप कुमार पाण्डेय,
जेलर अरुण कुमार कुशवाहा, उपजेलर विजय कुमार सहित कारागार के सभी कर्मचारी उपस्थित रहे।
जेल अधीक्षक ने कहा, “बंदियों का यह प्रयास उनकी सुधार प्रक्रिया का हिस्सा है।
हम जैविक खेती को बढ़ावा देकर उन्हें उत्पादक बनाना चाहते हैं।”
गोरखपुर की कृषि प्रदर्शनी 2026 को यादगार बनाती है, जहां 50 से अधिक स्टॉल्स लगे थे। रोटरी क्लब ने भी
इस पहल की सराहना की। भविष्य में जिला कारागार ऐसे और आयोजनों में भाग लेगा,
ताकि जैविक उत्पादों का व्यावसायिक उत्पादन हो सके। स्थानीय किसानों के लिए यह प्रेरणा स्रोत है।
यह घटना बंदियों के पुनर्वास और जैविक कृषि के महत्व को रेखांकित करती है,
जो समाज के लिए एक सकारात्मक संदेश है।