प्रयागराज के इलाहाबाद जिला अदालत ने ज्योतिष पीठ के शंकराचार्य स्वामी मुक्तेश्वर आनंद सरस्वती और उनके शिष्य स्वामी मुकुंदानंद के खिलाफ दो नाबालिग लड़कियों के यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों की जांच के लिए मुकदमा दर्ज करने का सख्त आदेश जारी किया है। यह मामला धार्मिक जगत में हड़कंप मचा रहा है, जहां पीड़ित नाबालिगों ने आश्रम में रहते हुए शारीरिक और यौन शोषण की शिकायत दर्ज कराई है। कोर्ट ने पीड़ितों की याचिका पर सुनवाई करते हुए पुलिस को निर्देश दिया है कि आरोप सिद्ध होने पर कड़ी कार्रवाई की जाए। स्वामी मुक्तेश्वर आनंद, जो ज्योतिष पीठ के प्रमुख शंकराचार्य के रूप में पूजे जाते हैं, पर नाबालिगों को बहला-फुसलाकर शोषण करने का आरोप लगाया गया है, जबकि उनके शिष्य मुकुंदानंद ने भी इसमें सहयोग किया। यह घटना उत्तर प्रदेश के प्रयागराज जिले में आश्रम से जुड़ी है, जहां पीड़ित परिवारों ने लंबे समय से न्याय की गुहार लगाई थी।
स्वामी मुक्तेश्वर आनंद के खिलाफ POCSO एक्ट के तहत कार्रवाई की तैयारी
अदालत के आदेश के अनुसार, प्रयागराज पुलिस को POCSO एक्ट (Protection of Children from Sexual Offences) की धाराओं के तहत प्राथमिकी दर्ज करने का निर्देश दिया गया है, जो नाबालिगों के यौन शोषण पर सबसे सख्त कानून है। पीड़ित लड़कियां, जो 14 और 16 वर्ष की बताई जा रही हैं, ने बताया कि आश्रम में रहने के दौरान स्वामी मुक्तेश्वर आनंद ने धार्मिक आड़ में शारीरिक शोषण किया और वीडियो बनाकर ब्लैकमेल किया। शिष्य मुकुंदानंद ने इन कृत्यों में सक्रिय भूमिका निभाई, जिसमें पीड़ितों को डराने-धमकाने का आरोप भी शामिल है। जिला जज ने सुनवाई में पीड़ितों के बयानों को प्रामाणिक मानते हुए तत्काल मुकदमा दर्ज करने का फैसला सुनाया। इस मामले ने ज्योतिष पीठाधीश्वर की छवि पर गहरा सवाल खड़ा कर दिया है, क्योंकि वे धार्मिक सभाओं और ज्योतिषीय प्रवचनों के लिए प्रसिद्ध हैं। प्रयागराज SSP ने पुष्टि की है कि जांच टीम गठित कर आश्रम की तलाशी ली जाएगी।
नाबालिग पीड़ितों की शिकायत: आश्रम में यौन शोषण का खुलासा
पीड़ित परिवारों के अनुसार, नाबालिग लड़कियां आश्रम में धार्मिक शिक्षा के नाम पर रखी गई थीं, लेकिन वहां स्वामी मुक्तेश्वर आनंद और मुकुंदानंद ने यौन शोषण शुरू कर दिया। एक पीड़िता ने बयान में कहा कि शंकराचार्य ने ‘आध्यात्मिक क्रिया’ का बहाना बनाकर शारीरिक संबंध बनाए, जबकि मुकुंदानंद ने द्वार पर पहरा दिया। मामला तब उजागर हुआ जब पीड़ितों ने घर लौटकर परिजनों को राज खोला। प्रयागराज चाइल्ड वेलफेयर कमिटी ने भी शिकायत दर्ज कराई, जिसके बाद कोर्ट पहुंचे। अदालत ने कहा कि ऐसे अपराधों में कोई छूट नहीं दी जा सकती, चाहे आरोपी कितने ही बड़े संत हों। यह घटना धार्मिक संस्थानों में नाबालिग सुरक्षा पर बहस छेड़ रही है।
ज्योतिष पीठ शंकराचार्य पर भारी पड़ेगा कोर्ट का यह आदेश
स्वामी मुक्तेश्वर आनंद सरस्वती ज्योतिष पीठ के शंकराचार्य के पद पर विराजमान हैं और उत्तर भारत में लाखों भक्तों के आराध्य हैं। उनके शिष्य मुकुंदानंद भी प्रमुख पद पर हैं। कोर्ट के आदेश से आश्रम में हड़कंप मच गया है, और भक्तों में दो फाड़ हो रही है। पुलिस जांच में मोबाइल फोन, वीडियो और अन्य सबूत खंगाले जाएंगे। यदि आरोप साबित हुए तो आजीवन कारावास तक की सजा हो सकती है। प्रयागराज जिला प्रशासन ने सुरक्षा बढ़ा दी है।