CAG रिपोर्ट में लखनऊ मेट्रो फेज
लखनऊ मेट्रो में CAG रिपोर्ट से बड़ा खुलासा: महानगर स्टेशन बिना अनुमति हटाया गया
उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में मेट्रो परियोजना को लेकर एक बार फिर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (CAG) की रिपोर्ट में लखनऊ मेट्रो रेल परियोजना फेज-1ए में कई अनियमितताएं सामने आई हैं। रिपोर्ट के मुताबिक, कुल 22 मेट्रो स्टेशनों को स्वीकृत किया गया था, लेकिन महानगर स्टेशन को बिना किसी उच्चाधिकार अनुमति के परियोजना से हटा दिया गया। यह स्टेशन यात्री क्षमता के लिहाज से काफी महत्वपूर्ण था, फिर भी इसे हटाने का फैसला बिना उचित प्रक्रिया के लिया गया।
महानगर स्टेशन हटाने का मामला: यात्री क्षमता ऊंची होने के बावजूद हटाया
CAG रिपोर्ट में स्पष्ट किया गया है कि लखनऊ मेट्रो फेज-1ए में मूल रूप से 22 स्टेशन स्वीकृत थे। इनमें महानगर स्टेशन भी शामिल था, जो व्यस्त इलाके में स्थित होने और उच्च यात्री संख्या की वजह से महत्वपूर्ण माना जा रहा था। लेकिन परियोजना के दौरान इसे अचानक हटा दिया गया। रिपोर्ट में कहा गया है कि इस हटाने के लिए कोई उचित अनुमति या उच्च स्तरीय मंजूरी नहीं ली गई। इससे परियोजना की उपयोगिता और यात्री सुविधा पर नकारात्मक असर पड़ा।
रिपोर्ट में यह भी उल्लेख है कि महानगर स्टेशन हटाने से कुल स्वीकृत स्टेशनों की संख्या 21 रह गई, जबकि निर्माण भी इन्हीं 21 पर ही हुआ। इस फैसले से लाखों यात्रियों को असुविधा हुई और मेट्रो की क्षमता प्रभावित हुई।
अन्य गंभीर अनियमितताएं: विवादित जमीन पर डिपो और सुरक्षा प्रमाणपत्र में खामी
CAG रिपोर्ट में लखनऊ मेट्रो से जुड़ी कई अन्य गंभीर अनियमितताएं भी सामने आई हैं:
- विवादित जमीन पर डिपो निर्माण – मेट्रो डिपो का निर्माण ऐसी जमीन पर किया गया, जिस पर भूमि विवाद चल रहा था। इससे परियोजना पर कानूनी चुनौतियां बढ़ीं और लागत में भी इजाफा हुआ।
- सुरक्षा प्रमाणपत्र का नवीनीकरण नहीं – मेट्रो संचालन के लिए जरूरी सुरक्षा प्रमाणपत्र (Safety Certificate) का समय पर नवीनीकरण नहीं किया गया। इससे सुरक्षा मानकों का उल्लंघन हुआ और यात्रियों की जान को खतरा पैदा हो सकता था।
- शर्तों का उल्लंघन – परियोजना की कई शर्तों का पालन नहीं किया गया, जिससे वित्तीय अनियमितताएं और देरी हुई।
रिपोर्ट में सिफारिश की गई है कि ऐसी अनियमितताओं पर सख्त कार्रवाई हो और भविष्य में ऐसी गलतियां न हों।
लखनऊ मेट्रो परियोजना का संक्षिप्त विवरण
लखनऊ मेट्रो फेज-1ए का विस्तार चारबाग से वसंतकुंज तक था। इसमें कुल 22 स्टेशन प्रस्तावित थे, लेकिन
महानगर स्टेशन हटने से 21 ही बने। मेट्रो ने यात्रियों को काफी सुविधा दी है,
लेकिन CAG रिपोर्ट से पता चलता है कि प्रबंधन में कई कमियां रहीं।
क्या कहते हैं विशेषज्ञ और जनता?
विशेषज्ञों का मानना है कि महानगर जैसे महत्वपूर्ण स्टेशन को हटाना गलत फैसला था। इससे व्यस्त इलाके के
यात्रियों को अतिरिक्त दूरी तय करनी पड़ रही है। सोशल मीडिया पर लोग सरकार से जवाब मांग रहे हैं और
महानगर स्टेशन को फिर से शामिल करने की मांग कर रहे हैं।
CAG रिपोर्ट एक चेतावनी है कि सार्वजनिक परियोजनाओं में पारदर्शिता और नियमों का पालन जरूरी है।
लखनऊ मेट्रो ने शहर की यातायात व्यवस्था में सुधार किया है,
लेकिन ऐसी अनियमितताएं विश्वसनीयता पर सवाल उठाती हैं। उम्मीद है कि
सरकार रिपोर्ट की सिफारिशों पर अमल करेगी और भविष्य में ऐसी खामियों को दूर किया जाएगा।
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