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उत्तर प्रदेश, भारत का सबसे अधिक आबादी वाला राज्य, जहां शिक्षा मानव विकास की रीढ़ मानी जाती है, वहां स्कूलों और कॉलेजों की स्थिति दिन-प्रतिदिन खराब हो रही है। शिक्षा मंत्री कभी अपने विभाग के संस्थानों का निरीक्षण नहीं करते। ग्रामीण क्षेत्रों में प्राथमिक स्कूलों में शिक्षक अनुपस्थित रहते हैं, कक्षाएं बंद पड़ी रहती हैं, और बुनियादी सुविधाएं जैसे शौचालय, पीने का पानी तक उपलब्ध नहीं। प्रयागराज, गोरखपुर जैसे जिलों में हालात और भी चिंताजनक हैं।
फिशरमैन आर्मी के राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं समाजसेवी चंद्रभान निषाद ने इस घोर लापरवाही पर तीखा प्रहार किया है। उन्होंने कहा, “शिक्षा मंत्री का एक भी स्कूल दौरा न होना राज्य के भविष्य के साथ खिलवाड़ है।” हाल के आंकड़ों के अनुसार, UP में 25% से अधिक सरकारी स्कूलों में शिक्षकों की कमी है, और ड्रॉपआउट रेट राष्ट्रीय औसत से दोगुना है। यह लापरवाही न केवल बच्चों के सपनों को कुचल रही है, बल्कि राज्य की GDP ग्रोथ को भी प्रभावित कर रही है।
शिक्षा व्यवस्था का बदहाल हाल: मंत्री का दौरा शून्य, छात्रों का भविष्य खतरे में
उत्तर प्रदेश में शिक्षा का हाल बेहद दयनीय है। ग्रामीण स्कूलों में शिक्षक नियमित नहीं आते, जिससे बच्चे पढ़ाई से दूर हो रहे हैं। कई स्कूलों में बुनियादी ढांचा ही नहीं है। चंद्रभान निषाद ने आरोप लगाया कि शिक्षा मंत्री का विभागीय दौरा न होना लापरवाही की पराकाष्ठा है। प्रयागराज और गोरखपुर मंडलों में सर्वे से पता चला कि अधिकांश स्कूलों में शिक्षक-छात्र अनुपात खराब है। यह स्थिति न केवल शिक्षा के अधिकार का उल्लंघन है, बल्कि आने वाली पीढ़ी के साथ अन्याय भी है।
स्वास्थ्य सेवाओं पर स्वास्थ्य मंत्री की उदासीनता: अस्पताल बिना दवा-डॉक्टर, मरीज सड़कों पर
स्वास्थ्य के क्षेत्र में स्थिति और भी दयनीय है। स्वास्थ्य मंत्री का अस्पतालों का दौरा न होना आम बात हो गई है। जिला चिकित्सालयों में डॉक्टर नदारद, दवाइयां उपलब्ध न होने से मरीज परिजनों को प्राइवेट अस्पतालों की शरण लेनी पड़ती है। कोविड के बाद भी UP के ग्रामीण स्वास्थ्य केंद्रों में वेंटिलेटर, ऑक्सीजन प्लांट जैसी बुनियादी चीजें अधर में लटकी हैं। चंद्रभान निषाद ने स्वास्थ्य मंत्री पर सीधा आरोप लगाते हुए कहा, “चिकित्सालय मानव जीवन की जान हैं, लेकिन यहां लापरवाही से मौतें हो रही हैं।” प्रयागराज और गोरखपुर मंडलों में हाल के सर्वे से पता चला कि 40% स्वास्थ्य केंद्रों पर स्टाफ की कमी है। आयुष्मान भारत योजना के बावजूद गरीब मरीज इलाज के अभाव में तड़प रहे हैं। यह लापरवाही महामारी के समय दोहराई जा सकती है, जो राज्य के लिए घातक साबित होगी।
फिशरमैन आर्मी का आह्वान: मुख्यमंत्री और प्रधानमंत्री से कड़ी कार्रवाई की मांग
फिशरमैन आर्मी, जो सामाजिक सक्रियता के लिए जानी जाती है, के राष्ट्रीय अध्यक्ष चंद्रभान निषाद ने उत्तर प्रदेश के माननीय मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से विनम्र निवेदन किया है। उन्होंने कहा, “शिक्षा औ
र स्वास्थ्य दोनों पर कड़ी निगरानी जरूरी है। मंत्रियों को जिम्मेदारी दी जाए,
नियमित निरीक्षण हो, और दोषियों पर कार्रवाई हो।” निषाद जी ने सुझाव दिया कि
डिजिटल डैशबोर्ड बनाकर मंत्रियों के दौरे ट्रैक किए जाएं। फिशरमैन आर्मी ने पहले भी पर्यावरण, विकास और सामाजिक
मुद्दों पर आवाज उठाई है, और इस बार भी वे जन जागरण अभियान चला रहे हैं।
यह मांग न केवल निषाद समुदाय बल्कि पूरे UP के लिए है।
सुधार के रास्ते: तत्काल कदम उठाने की जरूरत
शिक्षा में सुधार के लिए मंत्री स्तर पर साप्ताहिक निरीक्षण, शिक्षक भर्ती अभियान, और डिजिटल क्लासरूम लागू हों।
स्वास्थ्य में टेलीमेडिसिन, डॉक्टर भर्ती, और दवा बैंक स्थापित किए जाएं। केंद्र सरकार की योजनाओं
जैसे समग्र शिक्षा अभियान और राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन को सख्ती से लागू किया जाए।
यदि ये कदम उठाए गए तो UP 2026 तक शिक्षा-स्वास्थ्य में
अग्रणी राज्य बन सकता है। चंद्रभान निषाद का यह आह्वान सभी पार्टियों से ऊपर उठकर एकजुटता का प्रतीक है।
समाजसेवी संगठनों को साथ लेकर बदलाव लाया जा सकता है।