गुलरिया चिलूआताल थाना क्षेत्र के राप्ती नगर विस्तार कॉलोनी में बुधवार शाम को एक दिल दहला देने वाली घटना घटी, जहां साइकिल सवार बालक कन्हैया खुले नाले में गिर गया। हादसे के दौरान उसके पेट में लोहे की सरिया धंस गई, जिससे मौके पर ही उसकी मौत हो गई। स्थानीय लोगों ने बताया कि यह नाला वर्षों से खुला पड़ा है और इलाके में बच्चों के लिए घातक साबित हो रहा है। कन्हैया जैसे मासूम की यह मौत पूरे इलाके में सनसनी फैला रही है।
घटना का पूरा विवरण
बुधवार शाम करीब 6 बजे राप्ती नगर विस्तार कॉलोनी में रहने वाला 10-12 वर्षीय बालक कन्हैया दोस्तों के साथ साइकिल चलाते हुए खुले नाले के पास पहुंचा। अचानक संतुलन बिगड़ने से वह नाले में गिर पड़ा। नाले में मौजूद जंग लगी सरिया उसके पेट में चुभ गई, जिससे भारी खून बहने लगा। चीख-पुकार सुनकर स्थानीय लोग दौड़े, लेकिन तब तक बहुत देर हो चुकी थी। कन्हैया को तुरंत सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया। पुलिस ने मौके पर पहुंचकर पंचनामा भराया और शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया।
खुले नालों का बढ़ता खतरा
गुलरिया क्षेत्र में कई खुले नाले अनदेखे पड़े हैं, जो बारिश के मौसम में और भी खतरनाक हो जाते हैं। स्थानीय निवासियों का कहना है कि चिलूआताल थाना पुलिस और नगर निगम को बार-बार शिकायत की गई, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई। कन्हैया की मौत के बाद ग्रामीणों ने रास्ता जाम कर प्रदर्शन किया, मांग की कि नालों पर तुरंत जाली लगाई जाए। विशेषज्ञों के अनुसार, उत्तर प्रदेश के ग्रामीण इलाकों में ऐसे 500 से अधिक मामले सालाना दर्ज होते हैं, जहां खुले नाले बच्चों की जान ले लेते हैं। गोरखपुर जिले में पिछले एक साल में 15 ऐसे हादसे हो चुके हैं, जो प्रशासन की नाकामी दर्शाते हैं।
प्रशासनिक लापरवाही और मांगें
चिलूआताल थाना प्रभारी ने बताया कि मामला दर्ज कर जांच शुरू हो गई है। नगर निगम ने आश्वासन दिया कि 48 घंटे में नालों की मरम्मत होगी। Fisherman World News की टीम ने स्थानीय सांसद से संपर्क किया, जिन्होंने पीड़ित परिवार को 2 लाख रुपये सहायता राशि देने का ऐलान किया।
सामाजिक कार्यकर्ता चंद्रभान निशाद ने कहा, “ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए
फिशरमैन आर्मी अभियान चलाएगी।” ग्रामीणों ने चेतावनी दी कि अगर नाले ढके नहीं गए तो बड़ा आंदोलन होगा।
सुरक्षा उपाय और जागरूकता
माता-पिता को सलाह दी जाती है कि बच्चों को अकेले साइकिल न चलने दें। स्थानीय स्तर पर
जागरूकता अभियान चलाने की जरूरत है। सरिया
जैसे खतरनाक सामान नालों से हटाए जाएं। कन्हैया के परिवार को सांत्वना देते हुए सभी ने
न्याय की मांग की है। खुले नालों को ढकना और
नियमित सफाई सुनिश्चित करना प्रशासन की प्राथमिक जिम्मेदारी है। ऐसी घटनाओं से बचाव के लिए
ग्रामीण क्षेत्रों में सामुदायिक निगरानी और सरकारी योजनाओं का सख्त क्रियान्वयन जरूरी है।
कन्हैया की मौत एक चेतावनी है कि बुनियादी ढांचे की अनदेखी कितनी भयानक कीमत वसूल सकती है।