आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत
मोहन भागवत का यूपी दौरा: सीएम योगी से मुलाकात के बाद डिप्टी सीएम्स से चर्चा
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) प्रमुख डॉ. मोहन भागवत का उत्तर प्रदेश दौरा राजनीतिक गलियारों में हलचल मचा रहा है। बुधवार को लखनऊ में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से मुलाकात के बाद संघ प्रमुख ने प्रदेश के दोनों उप मुख्यमंत्रियों केशव प्रसाद मौर्य और ब्रजेश पाठक से अलग-अलग मुलाकात की। इन बैठकों को लेकर सियासी तापमान बढ़ गया है, और विपक्षी दल इसे भाजपा की आंतरिक राजनीति से जोड़कर देख रहे हैं। भागवत का यह दौरा आरएसएस के शताब्दी वर्ष के उपलक्ष्य में है, लेकिन राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह 2027 विधानसभा चुनाव की रणनीति से जुड़ा हो सकता है।
सीएम योगी से क्या हुई चर्चा: सामाजिक सद्भाव पर फोकस
मोहन भागवत ने सबसे पहले मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से मुलाकात की, जो लगभग एक घंटे चली। सूत्रों के अनुसार, इस दौरान हिंदू समाज की एकता, सामाजिक सद्भाव और राष्ट्र निर्माण पर चर्चा हुई। आरएसएस प्रमुख ने यूपी सरकार की कानून-व्यवस्था और विकास कार्यों की सराहना की। योगी आदित्यनाथ ने संघ की भूमिका को राष्ट्र सेवा का प्रतीक बताया। यह मुलाकात इंदिरा गांधी प्रतिष्ठान में हुई, जहां भागवत ने प्रबुद्धजनों से भी संवाद किया। राजनीतिक जानकारों का कहना है कि यह बैठक भाजपा और आरएसएस के बीच समन्वय को मजबूत करने वाली है।
दोनों डिप्टी सीएम से अलग-अलग मुलाकात: सियासी हलचल क्यों?
सीएम से मुलाकात के बाद भागवत ने उप मुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य से मुलाकात की, जो ओबीसी राजनीति के प्रमुख चेहरे हैं। इसके बाद ब्रजेश पाठक से चर्चा हुई, जो ब्राह्मण वोट बैंक को मजबूत करते हैं। इन बैठकों को लेकर सवाल उठ रहे हैं कि क्या आरएसएस यूपी में जातिगत समीकरणों को साध रहा है? विपक्षी नेता अखिलेश यादव ने इसे भाजपा की आंतरिक कलह का संकेत बताया, जबकि भाजपा इसे नियमित संवाद कह रही है। सियासी तापमान बढ़ने की वजह यह है कि 2024 लोकसभा चुनाव के बाद यूपी में राजनीतिक समीकरण बदल रहे हैं, और 2027 चुनाव नजदीक हैं।
आरएसएस का शताब्दी वर्ष और यूपी का महत्व
आरएसएस के 100 वर्ष पूरे होने पर मोहन भागवत का यूपी दौरा महत्वपूर्ण है। यूपी संघ का मजबूत गढ़ है,
जहां लाखों स्वयंसेवक हैं। भागवत ने हिंदू समाज को जगाने और मंदिरों की आय को
जनकल्याण में लगाने पर जोर दिया। डिप्टी सीएम्स से मुलाकात को
सामाजिक और राजनीतिक संदेश के रूप में देखा जा रहा है। केशव मौर्य ने इसे प्रेरणादायक बताया,
जबकि ब्रजेश पाठक ने राष्ट्र सेवा पर फोकस की बात कही।
राजनीतिक विश्लेषण: क्या चुनावी रणनीति का हिस्सा?
विश्लेषकों का मानना है कि यह मुलाकातें भाजपा की चुनावी रणनीति का हिस्सा हैं।
यूपी में ओबीसी और ब्राह्मण वोटर्स निर्णायक हैं,
और आरएसएस इन समुदायों को साध रहा है। विपक्ष इसे भाजपा की कमजोरी बता रहा है। हालांकि,
संघ इसे गैर-राजनीतिक बताता है। आने वाले दिनों में और दौरों की संभावना है।
यूपी राजनीति में नया मोड़
मोहन भागवत की इन मुलाकातों से यूपी की राजनीति में नया मोड़ आया है। सियासी तापमान बढ़ना स्वाभाविक है,
लेकिन यह राष्ट्र निर्माण की दिशा में सकारात्मक कदम है। अपडेट्स के लिए जुड़े रहें।
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