सूरत SOG की साहसिक कार्रवाई: 2005 के पुराने केस में 21 साल बाद अपराधियों पर शिकंजा
सूरत पुलिस की स्पेशल ऑपरेशन ग्रुप (SOG) ने एक बार फिर अपनी बहादुरी और चतुराई का लोहा मनवा लिया है। 2005 में गुजरात के सूरत शहर में हुए गंभीर अपराध (हत्या और लूट) के मामले में फरार चल रहे दो सगे भाइयों को उत्तर प्रदेश के प्रयागराज से गिरफ्तार कर लिया गया। यह गिरफ्तारी इतनी स्मार्ट और प्लान्ड थी कि पुलिसकर्मियों ने खुद को चाय वाले और ग्राहक के रूप में छिपाकर जाल बिछाया। 21 साल तक छिपे अपराधियों को कानून की नजर से बचना मुश्किल साबित हुआ। यह ऑपरेशन इंटर-स्टेट पुलिस कोऑर्डिनेशन और सादगी भरी पुलिसिंग का शानदार उदाहरण है।
चाय की ठेली से शुरू हुआ जाल: हेड कांस्टेबल की चालाकी ने तोड़ा 21 साल का रिकॉर्ड
यह पूरी कहानी 2005 से शुरू होती है, जब सूरत में दो सगे भाइयों ने एक संगीन अपराध को अंजाम दिया। अपराध के बाद दोनों फरार हो गए और प्रयागराज में छिपकर सामान्य जीवन जीने लगे। सूरत SOG को हाल ही में विश्वसनीय मुखबिर से सूचना मिली कि आरोपी उत्तर प्रदेश में सक्रिय हैं। सूरत पुलिस ने गुप्त सूत्रों से जानकारी जुटाई और प्रयागराज पहुंची।
ऑपरेशन की खास बात यह थी कि हेड कांस्टेबल ने चाय की ठेली लगाकर कवर लिया। कांस्टेबल ग्राहक बनकर आसपास निगरानी करते रहे। ठेला लगाने का यह जाल इतना प्रभावी साबित हुआ कि संदिग्धों को जरा भी शक नहीं हुआ। जैसे ही दोनों भाई चाय पीने ठेले पर पहुंचे, पुलिस ने मौका देखकर उन्हें धर दबोचा। 21 साल पुराना केस एक झटके में सॉल्व हो गया। स्थानीय लोग और पुलिसकर्मी इस स्मार्ट रणनीति से हैरान हैं।
प्रयागराज से सूरत तक का सफर: अपराधियों की गिरफ्तारी ने खोला पुराने राज
प्रयागराज में छिपे ये भाई वर्षों से सामान्य जीवन जी रहे थे। वे लगातार लोकेशन बदलते रहे, लेकिन सूरत SOG ने डिजिटल ट्रैकिंग, लोकल इंटेलिजेंस और यूपी पुलिस के सहयोग से उनकी तलाश तेज की। गिरफ्तारी के बाद दोनों को सूरत लाया गया, जहां पूछताझ में
2005 के केस के कई राज खुले। पुलिस ने बताया कि अपराध में हत्या, लूट और अन्य गंभीर आरोप थे।
अब जल्द ही कोर्ट में चार्जशीट दाखिल की जाएगी।
यह घटना उत्तर प्रदेश क्राइम न्यूज में सुर्खियां बटोर रही है। सोशल मीडिया पर सूरत
SOG की तारीफ हो रही है और लोग पुलिस की इस साहसिक कार्रवाई को सलाम कर रहे हैं।
कानून की जीत: अपराधी पाताल में छिपे तो भी नहीं बच सकते
सूरत पुलिस की यह कार्रवाई अपराधियों के लिए करारा संदेश है। चाय ठेली वाली रणनीति ने
साबित कर दिया कि स्मार्ट पुलिसिंग और टीमवर्क से कोई अपराधी
लंबे समय तक नहीं छिप सकता। प्रयागराज पुलिस ने भी पूरे सहयोग की सराहना की है।
भविष्य में ऐसे इंटर-स्टेट ऑपरेशंस बढ़ेंगे, ताकि फरार अपराधी कहीं भी छिपकर नहीं बच सकें।
यह केस न केवल 21 साल पुरानी फाइल को बंद करने का प्रतीक है,
बल्कि पीड़ित परिवारों के लिए न्याय की उम्मीद भी जगाता है।
सूरत SOG के अफसरों को उच्चाधिकारियों से सम्मानित करने की चर्चा चल रही है।
प्रयागराज गिरफ्तारी न्यूज सोशल मीडिया पर ट्रेंड कर रही है और पुलिस की छवि को मजबूत कर रही है।