मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की सुरक्षा फ्लीट
सीएम फ्लीट के सामने बस आने की घटना ने बढ़ाई सुरक्षा चिंता
गोरखपुर में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की सुरक्षा फ्लीट के सामने एक बस के आने की घटना ने प्रशासनिक हलकों में हलचल मचा दी है। यह घटना मुख्यमंत्री के स्पोर्ट्स कॉलेज से गोरखपुर एयरपोर्ट लौटते समय हुई। सूत्रों के अनुसार, फ्लीट के आगे चल रही पायलट वाहन और अन्य सुरक्षा वाहनों के बीच एक बस अचानक आ गई, जिससे सुरक्षा प्रोटोकॉल में गंभीर चूक की आशंका जताई जा रही है। घटना के बाद तत्कालीन एसएसपी राजकरन नय्यर ने जांच के आदेश दिए, लेकिन उन्होंने इसे सुरक्षा में बड़ी चूक नहीं माना। अब जांच तेज हो गई है और एसपी यातायात का बयान दर्ज किया जा चुका है।
घटना का विवरण: स्पोर्ट्स कॉलेज से एयरपोर्ट रूट पर क्या हुआ
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ हाल ही में गोरखपुर दौरे पर थे। स्पोर्ट्स कॉलेज कार्यक्रम के बाद वे एयरपोर्ट की ओर रवाना हुए। इस दौरान सुरक्षा फ्लीट में कई वाहन शामिल थे – पायलट कार, सिक्योरिटी वाहन, एम्बुलेंस और अन्य सपोर्ट व्हीकल। रूट पर प्रमुख चौराहों और क्रॉसिंग पर यातायात पुलिस की ड्यूटी लगी थी। सूत्र बताते हैं कि एक बस (संभवतः यात्री बस) ने फ्लीट के आगे आने की कोशिश की या अनजाने में रूट क्रॉस कर लिया। यह पल कुछ सेकंड का था, लेकिन सुरक्षा दृष्टि से गंभीर माना जा रहा है।
प्रारंभिक जांच में यह बात सामने आई है कि बस को फ्लीट के आने की सूचना नहीं मिली या यातायात पुलिस ने रूट क्लियर नहीं किया। जिस चौराहे पर यह घटना हुई, वहां सिग्नल या बैरिकेडिंग में कमी बताई जा रही है। घटना के तुरंत बाद फ्लीट ने रफ्तार बनाए रखी और एयरपोर्ट तक सुरक्षित पहुंच गई, लेकिन यह चूक अब जांच के दायरे में है।
जांच की स्थिति: एसपी यातायात का बयान दर्ज
एसएसपी राजकरन नय्यर ने घटना के बाद यातायात पुलिस और सुरक्षा अधिकारियों से रिपोर्ट मांगी थी। उन्होंने इसे “सुरक्षा में बड़ी चूक” नहीं माना, लेकिन समन्वय की कमी और निगरानी में लापरवाही को स्वीकार किया। अब जांच एसपी यातायात स्तर पर चल रही है। एसपी यातायात का बयान दर्ज कर लिया गया है। जांच में निम्न बिंदुओं पर फोकस है:
- रूट पर ड्यूटी लगे पुलिसकर्मियों की भूमिका
- फ्लीट मूवमेंट की सूचना देने की प्रक्रिया
- चौराहों पर बैरिकेडिंग और सिग्नल मैनेजमेंट
- बस ड्राइवर को फ्लीट के आने का पता कैसे नहीं चला
पुलिस सूत्रों का कहना है कि जल्द ही बस ड्राइवर और संबंधित बस ऑपरेटर से भी पूछताछ होगी। जांच रिपोर्ट एसएसपी और उच्च अधिकारियों को सौंपी जाएगी।
सुरक्षा प्रोटोकॉल और समन्वय की कमी पर सवाल
मुख्यमंत्री की सुरक्षा में SPG और राज्य पुलिस का संयुक्त प्रोटोकॉल होता है।
गोरखपुर जैसे शहर में जहां ट्रैफिक घना रहता है, रूट क्लियरेंस के लिए विशेष इंतजाम जरूरी होते हैं।
इस घटना ने एक बार फिर समन्वय की कमी को उजागर किया है।
विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसी घटनाएं छोटी लग सकती हैं, लेकिन सुरक्षा दृष्टि से
इन्हें गंभीरता से लेना चाहिए। पिछले कुछ वर्षों में यूपी में सीएम और अन्य
VIP मूवमेंट के दौरान कई बार ऐसी चूकें सामने आई हैं, जिसके बाद प्रोटोकॉल में सुधार किए गए थे।
जांच के नतीजे पर सबकी नजर
यह घटना मुख्यमंत्री की सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल खड़े करती है, भले ही एसएसपी ने
इसे बड़ी चूक न माना हो। जांच के नतीजे से पता चलेगा कि असल कमी कहां थी – यातायात पुलिस में,
सुरक्षा टीम में या समन्वय में। गोरखपुरवासियों और प्रदेशवासियों की
उम्मीद है कि ऐसी घटनाएं दोबारा न हों और सुरक्षा व्यवस्था और मजबूत होगी। फिलहाल जांच जारी है और
एसपी यातायात के बयान के बाद अगले कदमों का इंतजार है।
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