विश्व विजय सिंह का तीखा प्रहार: डबल इंजन सरकार की प्रदूषण नीति पर सवाल
उत्तर प्रदेश कांग्रेस के प्रदेश उपाध्यक्ष विश्व विजय सिंह ने भाजपा की डबल इंजन सरकार पर जोरदार हमला बोला है। उन्होंने कहा कि यह सरकार न तो दिल्ली को प्रदूषण मुक्त कर पाई और न ही गोमती नदी तथा गोरखपुर को साफ-सुथरा बना सकी। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ द्वारा गोरखपुर और गोमती के प्रदूषण पर चर्चा किए बिना दिल्ली के प्रदूषण पर बोलना “चिराग तले अंधेरा” की स्थिति है। विश्व विजय सिंह का यह बयान उत्तर प्रदेश की जनता के लिए एक आईना है, जहां पर्यावरण संकट लगातार गहराता जा रहा है। उन्होंने डबल इंजन सरकार के दावों को खोखला करार दिया।
दिल्ली प्रदूषण: केंद्र की नाकामी का प्रतीक, लेकिन यूपी में चुप्पी क्यों?
दिल्ली में सर्दियों के मौसम में AQI अक्सर 500 के पार चला जाता है और औसत स्तर 300 से ऊपर रहता है। केंद्र की भाजपा सरकार अब तक ठोस कदम नहीं उठा पाई है। विश्व विजय सिंह ने सवाल उठाया कि दिल्ली के प्रदूषण पर तो चर्चा होती है, लेकिन गोरखपुर और गोमती नदी के प्रदूषण पर मौन क्यों? गोरखपुर में औद्योगिक कचरा, वाहनों का धुआं और निर्माण कार्यों से हवा जहरीली हो रही है। गोमती नदी में सीवेज और प्लास्टिक का ढेर लगा हुआ है। मुख्यमंत्री खुद गोरखपुर के सांसद हैं, फिर भी स्थानीय प्रदूषण को अनदेखा किया जा रहा है। यह डबल इंजन सरकार की असलियत है – दिल्ली पर बोलो, लेकिन यूपी के मुद्दों को भूल जाओ।
गोमती नदी प्रदूषण: सफाई अभियान का ढोंग उजागर
लखनऊ की गोमती नदी कभी जीवनदायिनी थी, लेकिन आज यह कचरे का डंप बन चुकी है। भाजपा सरकार के गोमती रिवर फ्रंट प्रोजेक्ट के बावजूद प्रदूषण में कोई कमी नहीं आई, बल्कि बढ़ता ही जा रहा है। विश्व विजय सिंह ने कहा कि करोड़ों रुपये खर्च करने के बाद भी नदी का पानी पीने योग्य नहीं है। फैक्ट्रियों का वेस्ट और घरेलू गंदगी बिना फिल्टर के बह रही है। UPPCB की रिपोर्ट्स में गोमती का BOD स्तर खतरे के पार (कई जगहों पर 10-14 mg/l से ऊपर) दर्ज किया गया है, जबकि सुरक्षित स्तर 3 mg/l से कम होना चाहिए। डबल इंजन सरकार ने साफ नदियों का वादा किया था, लेकिन हकीकत इसके ठीक विपरीत है। जनता सांस लेने के लिए तरस रही है।
गोरखपुर में पर्यावरण संकट: मुख्यमंत्री की नजर क्यों हटी?
गोरखपुर में एयर क्वालिटी इंडेक्स (AQI) अक्सर खराब से गंभीर श्रेणी में रहता है, कई बार 250 से ऊपर पहुंच जाता है। रामगढ़ ताल और रोहनी ताल प्रदूषित हो चुके हैं, जहां कचरा और सीवेज के कारण जलीय जीवन खतरे में है। विश्व विजय सिंह ने तंज कसा कि मुख्यमंत्री गोरखपुर से हैं, फिर प्रदूषण पर चर्चा क्यों नहीं? इंडस्ट्रीज, ट्रैफिक और कंस्ट्रक्शन धूल-धुंध फैला रहे हैं।
बच्चों और बुजुर्गों में सांस की बीमारियां तेजी से बढ़ रही हैं। डबल इंजन सरकार का फोकस दिल्ली पर है,
लेकिन लोकल इश्यूज पर ध्यान नहीं दिया जा रहा। यह “चिराग तले अंधेरा” की जीती-जागती मिसाल है।
डबल इंजन सरकार की विफलताएं: आंकड़ों में सच्चाई
CPCB के आंकड़ों के अनुसार दिल्ली का औसत AQI 300 से अधिक रहता है, गोरखपुर में 250+ स्तर आम है
और गोमती का BOD 20 mg/l से ऊपर कई जगहों पर।
विश्व विजय सिंह ने कहा कि वादों के पुलिंदे हैं,
लेकिन काम शून्य। नमामि गंगे प्रोजेक्ट में देरी, स्मार्ट सिटी योजनाएं फेल।
विपक्ष उत्तर प्रदेश में प्रदूषण मुक्ति का मजबूत वादा कर रहा है। भाजपा को अब जवाब देना होगा।
विश्व विजय सिंह का आह्वान: प्रदूषण के खिलाफ जन आंदोलन
प्रदेश उपाध्यक्ष ने प्रदेशवासियों से अपील की कि प्रदूषण के खिलाफ एकजुट हों और सरकार को जगाएं।
गोरखपुर, लखनऊ और दिल्ली सभी प्रभावित हैं। वोट की राजनीति बंद कर पर्यावरण बचाओ।
यह बयान उत्तर प्रदेश की राजनीति में भूचाल ला सकता है और पर्यावरण मुद्दे को प्रमुखता दे सकता है।