लेन-देन के संबंध नहीं, अपनत्व है भारत की पहचान: गोरखपुर में बोले RSS प्रमुख मोहन भागवत

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के सरसंघचालक मोहन भागवत ने गोरखपुर में एक सभा को संबोधित करते हुए कहा कि भारत की पहचान लेन-देन के संबंधों से नहीं, बल्कि अपनत्व की गहरी भावना से बनती है। यह बयान उत्तर प्रदेश के गोरखपुर में आयोजित एक बड़े कार्यक्रम के दौरान आया, जहां हजारों कार्यकर्ता और नागरिक उपस्थित थे। भागवत जी ने हिंदू समाज की एकता पर बल देते हुए राष्ट्रवाद की भावना को मजबूत करने की अपील की। गोरखपुर, जो मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का गृह नगर है, इस प्रेरणादायक भाषण का साक्षी बना।

मोहन भागवत का गोरखपुर प्रवास: अपनत्व की भावना पर जोर

भागवत जी ने कहा, “हमारे देश में रिश्ते पैसे या व्यापार पर आधारित नहीं होते। यहां अपनत्व है, जो परिवार की तरह सबको जोड़ता है।” यह कथन आज के सामाजिक विघटन के दौर में अत्यंत प्रासंगिक है। RSS प्रमुख ने युवाओं से आह्वान किया कि वे इस अपनत्व को मजबूत करें और समाज में फैलाएं। कार्यक्रम में उपस्थित जनसमूह ने तालियों से उनका जोरदार स्वागत किया। यह सभा RSS की शताब्दी वर्ष की तैयारियों का हिस्सा थी, जिसमें संगठन की विचारधारा को और गहराई से समझाया गया।

भारत की सांस्कृतिक पहचान और हिंदू एकता पर RSS प्रमुख के विचार

मोहन भागवत ने स्पष्ट किया कि भारत की पहचान उसकी प्राचीन संस्कृति और हिंदू मूल्यों में निहित है। “लेन-देन तो हर जगह होता है, लेकिन अपनत्व केवल भारत में मिलता है,” उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा। गोरखपुर सभा में उन्होंने राम जन्मभूमि आंदोलन का जिक्र किया, जो एकता का जीता-जागता प्रतीक बना। RSS की विचारधारा के अनुरूप, भागवत जी ने कहा कि हिंदू समाज को संगठित होकर राष्ट्र सेवा में लगना चाहिए।

पर्यावरण संरक्षण, सामाजिक समरसता और शिक्षा पर उन्होंने विशेष जोर दिया। उत्तर प्रदेश में चल रही विकास योजनाओं की सराहना करते हुए उन्होंने कहा कि ये अपनत्व की भावना से ही संभव हैं। उन्होंने चेतावनी दी कि पश्चिमी संस्कृति का अंधानुकरण भारत की पहचान को कमजोर कर सकता है।

गोरखपुर भाषण के प्रमुख बिंदु: राष्ट्रवाद और समाज सुधार

  • अपनत्व की परिभाषा: भारत में रिश्ते भावनात्मक होते हैं, न कि लेन-देन वाले।
  • हिंदू एकता: विभाजनकारी शक्तियों से सावधान रहें, एकजुट रहें।
  • युवा जिम्मेदारी: स्वयंसेवक बनें, राष्ट्र निर्माण में योगदान दें।
  • सांस्कृतिक विरासत: राम, कृष्ण जैसे आदर्शों से प्रेरणा लें।
  • वर्तमान चुनौतियां: वैश्वीकरण में भारतीय मूल्यों को बनाए रखें।

भागवत जी ने पर्यावरण मुद्दों पर बोलते हुए गंगा सफाई का उदाहरण दिया और सेवा कार्यों पर बल दिया।

उत्तर प्रदेश में RSS का प्रभाव और मोहन भागवत की भूमिका

उत्तर प्रदेश, खासकर गोरखपुर में RSS का मजबूत नेटवर्क है। मोहन भागवत के इस दौरे से संगठन को नई ऊर्जा मिली। उन्होंने योगी सरकार की नीतियों की प्रशंसा की, जो हिंदुत्व और विकास को जोड़ती हैं। गोरखपुर गोरक्षपीठ का केंद्र है, जहां योगी आदित्यनाथ महंत हैं। यह भाषण भाजपा-RSS समन्वय को दर्शाता है। 2024 लोकसभा चुनावों के बाद यह पहला बड़ा बयान है। विपक्षी दलों पर निशाना साधते हुए उन्होंने एकता का संदेश दिया।

अपनत्व से मजबूत भारत का निर्माण

मोहन भागवत का गोरखपुर भाषण प्रेरणादायक रहा। यह भारत की पहचान को अपनत्व से जोड़ता है

RSS कार्यकर्ता इसे सोशल मीडिया पर वायरल कर रहे हैं।

भविष्य में ऐसे और कार्यक्रम होंगे, जो समाज में एकता और सेवा की भावना को मजबूत करेंगे।

गोरखपुर का यह दौरा न केवल RSS के लिए, बल्कि पूरे उत्तर प्रदेश के लिए महत्वपूर्ण रहा।