जेफरी एपस्टीन एक अमेरिकी वित्तीयकर्मी और दोषी सिद्ध यौन अपराधी था, जिसकी मृत्यु 2019 में जेल में हुई। वह नाबालिग लड़कियों की सेक्स ट्रैफिकिंग के लिए कुख्यात था और उच्च वर्ग के लोगों से जुड़ा रहा। उसका मामला आज भी साजिश सिद्धांतों, पावरफुल लोगों के नाम और अनसुलझे सवालों से भरा हुआ है।
जेफरी एपस्टीन का जीवन और वित्तीय साम्राज्य
एपस्टीन का जन्म 20 जनवरी 1953 को ब्रुकलिन, न्यूयॉर्क में हुआ था। उसने कॉलेज डिग्री नहीं ली, लेकिन Dalton School में गणित शिक्षक बन गया। बाद में Bear Stearns में काम किया और 1980 के दशक में अपना फर्म J. Epstein & Company शुरू किया। वह अरबपति लेस्ली वेक्सनर जैसे क्लाइंट्स को वित्तीय सलाह देता था। उसकी संपत्ति में न्यूयॉर्क का महलनुमा घर, पाम बीच का मकान, न्यू मैक्सिको का रैंच और कैरिबियन में लिटिल सेंट जेम्स द्वीप शामिल थे। उसकी नेटवर्थ अरबों में बताई जाती थी, हालांकि स्रोत हमेशा संदिग्ध रहे।
अपराधों का इतिहास और पहली सजा
2005 में पाम बीच पुलिस ने जांच शुरू की जब एक 14 वर्षीय लड़की के पिता ने शिकायत की। जांच में पता चला कि एपस्टीन 36 से ज्यादा नाबालिग लड़कियों (कुछ 14 साल की) का यौन शोषण करता था। वह गरीब लड़कियों को मसाज के बहाने बुलाता और उसकी सहयोगी घिस्लेन मैक्सवेल उन्हें भर्ती करती थीं। 2008 में फ्लोरिडा में एक विवादास्पद plea deal के तहत उसने दो राज्य अपराध कबूल किए, मात्र 13 महीने जेल काटी (जिसमें work release की सुविधा थी), और संघीय जांच बंद हो गई। इस डील को बाद में “Perversion of Justice” कहा गया।
लिटिल सेंट जेम्स द्वीप: अपराध का केंद्र
एपस्टीन का लिटिल सेंट जेम्स द्वीप (जिसे “पेडो आइलैंड” या “ऑर्गी आइलैंड” कहा जाता था) उसके अपराधों का मुख्य केंद्र था। वहां प्राइवेट जेट से मेहमान आते थे। पीड़िताओं ने बताया कि द्वीप पर हर जगह कैमरे लगे थे और भागना लगभग असंभव था। एपस्टीन बिल क्लिंटन, डोनाल्ड ट्रंप, प्रिंस एंड्रयू जैसे नामों से जुड़ा रहा, हालांकि ट्रंप ने 2000 के दशक में दूरी बना ली। घिस्लेन मैक्सवेल को 2022 में 20 साल की सजा हुई।
2019 की गिरफ्तारी और रहस्यमयी मौत
2018 में Miami Herald की “Perversion of Justice” सीरीज के बाद
2019 में न्यूयॉर्क में सेक्स ट्रैफिकिंग के आरोप में गिरफ्तार हुआ। उसके घर से
नाबालिगों की नग्न तस्वीरें और CD मिलीं। 10 अगस्त 2019 को मेट्रोपॉलिटन करेक्शनल सेंटर में
उसकी मौत हो गई, जिसे आधिकारिक रूप से आत्महत्या बताया गया।
DOJ रिपोर्ट में जेल की लापरवाही (गार्ड्स सो नहीं रहे थे, कैमरे काम नहीं कर रहे थे)
सामने आई, लेकिन हत्या का कोई सबूत नहीं मिला। फिर भी साजिश सिद्धांत आज भी प्रचलित हैं।
2025-2026 में जारी Epstein Files और भारत कनेक्शन
Epstein Files Transparency Act के तहत 2025-2026 में लाखों ईमेल, दस्तावेज और फ्लाइट लॉग्स जारी हुए।
इनमें ट्रंप प्रशासन के अधिकारी, क्लिंटन और अन्य नाम आए। भारत से जुड़े उल्लेख सतही रहे:
एक 2019 ईमेल में एपस्टीन ने स्टीव बैनन से “Modi on board” मीटिंग ब्रोकर करने की बात की,
लेकिन कोई मीटिंग या अपराधी लिंक साबित नहीं हुआ। हार्दीप पुरी का कैलेंडर में
उल्लेख और अनिल अंबानी के कुछ ईमेल भी सामने आए, लेकिन कोई गंभीर संबंध नहीं पाया गया।
एपस्टीन का केस आज भी पावर, सेलिब्रिटी और न्याय व्यवस्था पर सवाल उठाता है।
2026 तक फाइल्स से कई नाम सामने आए, लेकिन ज्यादातर मामले अनसुलझे हैं।