फिशरमैन आर्मी के राष्ट्रीय अध्यक्ष की चिंता: नदियों को सफाई युद्ध स्तर पर अनिवार्य। नई दिल्ली/गोरखपुर: विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) और संयुक्त राष्ट्र पर्यावरण कार्यक्रम (UNEP) की ताजा रिपोर्ट ने भारत की नदियों की दयनीय स्थिति को उजागर किया है। रिपोर्ट के अनुसार, गंगा-यमुना सहित अधिकांश नदियां संक्रमित हो चुकी हैं, जबकि झीलें और भूजल भी एंटीमाइक्रोबियल रेसिस्टेंस (AMR) के प्रमुख वाहक बन गए हैं। फिशरमैन आर्मी के राष्ट्रीय अध्यक्ष फिशरमैन चंद्रभान निषाद ने इस रिपोर्ट पर गहरी चिंता जाहिर करते हुए कहा कि नदियों को सफाई युद्ध स्तर पर करना अनिवार्य है। उन्होंने गंगा सफाई का सबसे बड़ा जिम्मा एनजीटी (नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल) पर डालते हुए आरोप लगाया कि आज भारत की सारी नदियां लुप्त के कगार पर पहुंच रही हैं।
WHO-UNEP रिपोर्ट का चौंकाने वाला खुलासा: नदियां बन रहीं AMR का केंद्र
WHO-UNEP की संयुक्त रिपोर्ट में स्पष्ट रूप से कहा गया है कि भारत की प्रमुख नदियां जैसे गंगा, यमुना, गोमती आदि में एंटीबायोटिक प्रतिरोधी बैक्टीरिया की भारी मौजूदगी पाई गई है। ये बैक्टीरिया औद्योगिक कचरा, सीवेज और कृषि रसायनों से उत्पन्न हो रहे हैं, जो AMR वाहक के रूप में कार्य कर रहे हैं। रिपोर्ट के मुताबिक, झीलें-भूजल भी संक्रमित हो चुके हैं, जिससे जलजनित रोगों का खतरा कई गुना बढ़ गया है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि तत्काल कदम नहीं उठाए गए, तो यह वैश्विक स्वास्थ्य संकट का रूप ले सकता है। फिशरमैन चंद्रभान निषाद ने कहा, “शासन और प्रशासन विभाग हवा में तीर चला रहा है। गंगा सफाई के नाम पर करोड़ों रुपये भारत का पानी की तरह बहाए जा रहे हैं।”
नमामि गंगे योजना पर सवाल: अरबों खर्च के बावजूद नदियां बदहाल
नमामि गंगे परियोजना पर अब तक 20,000 करोड़ रुपये से अधिक खर्च हो चुके हैं, फिर भी गंगा यमुना नदियां संक्रमित बनी हुई हैं। चंद्रभान निषाद ने इसे ‘महाघोटाला’ करार देते हुए एनजीटी से विशेष जांच की मांग की है। उन्होंने कहा कि नदियों की सफाई के लिए ठोस योजना की कमी है, जबकि राजनीतिक वायदे ही हो रहे हैं। रिपोर्ट में यह भी उल्लेख है कि उत्तर भारत की नदियां सबसे अधिक प्रभावित हैं, जहां प्रदूषण स्तर चिंताजनक है।
गोरखपुर का उदाहरण: राप्ती नदी और रामगढ़ झील की दैनिक बदहाली
स्थानीय स्तर पर गोरखपुर राप्ती नदी और रामगढ़ झील की स्थिति सबसे खराब है। राप्ती नदी गोरखपुर में प्लास्टिक कचरा, मल-मूत्र और औद्योगिक अपशिष्ट से भरी पड़ी है। कभी स्वच्छ जल का स्रोत रही यह नदी अब मछलियों के लिए घातक हो गई है। इसी तरह रामगढ़ झील प्रदूषण से काली पड़ चुकी है, जहां भूजल भी AMR वाहक बन रहा है। फिशरमैन समुदाय बुरी तरह प्रभावित है,
क्योंकि मछली पकड़ना मुश्किल हो गया है। चंद्रभान निषाद ने गोरखपुर
प्रशासन से तत्काल सफाई अभियान चलाने की मांग की है।
फिशरमैन समुदाय की पुकार: युद्ध स्तर पर नदियों की सफाई जरूरी
फिशरमैन आर्मी के नेतृत्व में मछुआरे समुदाय नदियों को बचाने के लिए आंदोलन की तैयारी में है।
चंद्रभान निषाद ने केंद्र-राज्य सरकारों से अपील की कि नदियों की सफाई को प्राथमिकता दें।
उन्होंने सुझाव दिया कि एनजीटी को सख्ती से निगरानी करनी चाहिए।
विशेषज्ञों के अनुसार, जैविक सफाई, सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट और
जन जागरूकता से ही गंगा-यमुना सहित नदियां बचाई जा सकती हैं।
आगे की राह: तत्काल कार्रवाई की जरूरत
WHO-UNEP रिपोर्ट एक चेतावनी है। यदि नदियां संक्रमित रहीं, तो आने वाली पीढ़ियां जल संकट झेलेंगी।
फिशरमैन चंद्रभान निषाद की चिंता सही है- सफाई अब युद्ध स्तर पर होनी चाहिए।
गोरखपुर जैसे क्षेत्रों में स्थानीय नदियों को
प्राथमिकता देकर शुरुआत की जा सकती है। सरकार को नमामि गंगे की पारदर्शिता सुनिश्चित करनी होगी।